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लंपी वायरस से पांच गोवंश ने तोड़ा दम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Aug 2022 02:09 AM IST
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Five cows died of lumpi virus, Ambala
गाय का दूध निकालता व्यक्ति। संवाद - फोटो : Ambala
संवाद न्यूज एजेंसी
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बराड़ा। लंपी वायरस से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को भी सुल्लर गोशाला में जहां एक पशु ने दम तोड़ दिया वहीं चार बेसहारा गोवंशों की भी इसी वायरस से मौत हुई। पशुपालन विभाग पशुओं को तलाश कर उन्हें वैक्सीन लगा रहा है। सोमवार को कुल 4 हजार 441 को टीका लगाकर वायरस से सुरक्षित किया गया।
वहीं लंपी वायरस का असर दूध बिक्री पर भी पड़ने लगा है। पशु में बीमारी की बात के डर से पशु पालकों व डेयरी संचालकों पर खुले दूध का काम 30 से 40 प्रतिशत तक घट गया है। पैकेट वाले दूध की डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। लोगों को भ्रम है कि कहीं वायरस वाले दूध का सेवन करने से बीमारी न फैल जाए। जबकि पशु चिकित्सकों की मानें तो उबालकर दूध पीने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है।
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जिले में संक्रमण से मरने वाले पशुओं का आंकड़ा 60 तक पहुंच गया है। इनमें से 11 गायों की गौशाला में मौत हुई है तो 49 बेसहारा गोवंश शामिल है। पशुपालकों को पशुओं की मौत से काफी आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। अब तक कुल 11753 पशु संक्रमित हो चुके हैं। जिसमें 6075 गाय रिकवरी कर चुकी हैं।
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जिले में इसके लिए 30900 पशुओं को वैक्सीन लग चुकी है। इस रोग से ग्रसित पशु को 14 दिन अथवा जब तक बीमारी पूरी तरह से ठीक न हो जाए तब तक आइसोलेट करना पड़ रहा है। यह एक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी से ग्रस्त पशुओं को आइसोलेट कर इस बीमारी के फैलने से रोक का प्रयास किया जा सकता है। पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

अब तक 60 पशुओं की मौत : डॉ. प्रेम सिंह
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया जिले में अब तक करीब 11753 पशु इसकी चपेट में आ चुके हैं। 6075 पशु रिकवरी कर चुके हैं। 60 पशुओं की इसमें मौत हो चुकी है। इसके साथ ही 30900 वैक्सीन जिले में पशुओं को लग चुकी है। एलएसडी की जांच पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सकों से करवाएं, बचाव के उपाय करें। पशुपालकों से आग्रह है कि भयभीत न होकर बताए जा रहे तरीकों से पशुओं का बचाव व उपचार करवाएं। विशेष परिस्थितियों में पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।
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