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लेप्रोस्कोपिक से हर्निया का छावनी नागरिक अस्पताल में पहला ऑपरेशन, एक दिन बाद ही मिल जाएगी मरीज को छुट्टी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Mar 2022 01:21 AM IST
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First operation in Cantonment Civil Hospital for hernia with laparoscopic
छावनी के नागरिक अस्पताल में हर्निया का लेप्रोस्कोपिक के जरिए ऑपरेशन हुआ। प्रदेशभर के नागरिक अस्पताल में इस तरह की सर्जरी करने वाला यह पहला अस्पताल बन गया है। गैस्ट्रो सर्जन डॉ. जतिंद्र व उनकी टीम ने दूरबीन की मदद से बिना चीरफाड़ किए यह सफल ऑपरेशन किया।
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प्राइवेट अस्पताल में इस ऑपरेशन में करीब दो लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन छावनी नागरिक अस्पताल में खोजकीपुर निवासी 59 वर्षीय मरीज का बिल्कुल निशुल्क हुआ। पहले हर्निया का चीरफाड़ करके उपचार किया जाता था। मरीज को कई दिन तक अस्पताल में दाखिल रहना पड़ता था। इस सुविधा के बाद मरीज को ऑपरेशन के एक दिन बाद ही छुट्टी मिल जाएगी। ऑपरेशन के दौरान गैस्ट्रो सर्जन डॉ. जतिंद्र के अलावा सहयोगी सर्जन अभिषेक, डॉ. रुचि, नर्स रीना, विशाल, अन्ना आदि मौजूद रहे। फिलहाल मरीज डॉक्टरों की निगरानी में है। डॉक्टर ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक हर्निया सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है जिस से मरीज को बिना लंबा चीरा दिए बगैर तीन छोटे-छोटे छेद से ऑपरेशन किया जाता है। छोटे छेद से दूरबीन डालकर मरीज का हर्निया ठीक किया जाता है। पीएमओ डॉ. राकेश सहल ने बताया कि गृहमंत्री अनिल विज के प्रयासों से आधुनिक मशीनों के साथ इस तरह की जटिल सर्जरी की गई है।
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हर्निया एक ऐसा रोग है, जिसमें असहनीय दर्द होता है। यह महिला, पुरुष, बच्चे, बूढ़े किसी को भी हो सकता है। हर्निया के कारण पेट के हिस्से में दर्द होता है। आमतौर पर पेट की मांसपेशियां कमजोर होने के कारण ये रोग होता है। हर्निया होने पर अगर शुरुआती अवस्था में ही इलाज न किया जाए तो ज्यादातर मामलों में सर्जरी के द्वारा ही इसे ठीक किया जा सकता है।
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डॉ. जतिंद्र ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक हर्निया की मरम्मत में एक लेप्रोस्कोप (एक छोटे टेलीस्कोप), जो एक विशेष कैमरे से जुड़ा होता है। उसे एक ट्यूब के माध्यम से डाला जाता है जिससे सर्जन हर्निया और आसपास के टिश्यू को एक वीडियो स्क्रीन पर देख सकते हैं। इसके बाद अन्य दूरबीन डाली जाती है। हर्निया की पेट की दीवार के पीछे से मरम्मत की जाती है। शल्य जाल का एक टुकड़ा हर्निया दोष पर रखा जाता है जिसे यह स्टेपल, चिपकने वाला सीलेंट या टांके के उपयोग से अपनी जगह पर स्थिर रखा जा सकता है।

यह सर्जरी सुरक्षित और दर्द रहित ऑपरेशन प्रक्रिया है। इससे ऑपरेशन के बाद रोगी को बड़ी परेशानी नहीं होती है और ऑपरेशन के बाद जल्द से जल्द घर चला जाता है। इसे डे-केयर सर्जरी भी कहते हैं, जिसमें रोगी ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर चलने फिरने की स्थिति में आ जाता है और अपना काम भी कर सकते हैं।
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