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किसान भवन से किसानों का किनारा, मासिक खर्च एक लाख और आमदनी तीन माह में 600 रुपये
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आमदनी अठन्नी, खर्च रुपया की कहावत हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के दो करोड़ के किसान भवन पर स्टीक बैठ रही है। किसान भवन न सिर्फ मार्केट कमेटी कार्यालय अंबाला के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है बल्कि धान का सीजन बीत जाने के बावजूद एक किसान भी यहां पर आकर नहीं रुका है। किसानों ने भवन से पूरी तरह से किनारा कर रखा है। यह किसान भवन अंबाला-दिल्ली नेशनल हाईवे पर नई अनाज एवं चारा मंडी के अंदर तैयार किया गया है जिसमें वीआईपी सुविधाओं के साथ-साथ किसानों के लिए आराम फरमाने और सोने की बेहतरीन व्यवस्था है।
इसका शुभारंभ करीब तीन माह पहले किया गया था लेकिन अभी तक एक किसान भी इस रेस्ट हाउस में आराम या सोने के लिए नहीं ठहरा है। यदि किसान भवन में ठहरने की नियमों की बात करें तो यदि मंडी में एक किसान फसल बेचने के लिए जाता है तो किसान को फसल गिराने पर एक जे फार्म काट कर देगा। इस फार्म के आधार पर किसान भवन में किसान अपना कमरा बुक करा सकता है। किसान को किसान भवन में बुकिंग के लिए 25 रुपये देने होंगे। इसके अलावा एक कमरा बुक कराने पर 600 रुपये देने होंगे। लेकिन अभी तक किसान भवन में एक किसान भी नहीं ठहरा है। किसान राज कुमार, पुरुषोत्तम, रामबीर और करनैल सिंह से जब किसान भवन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि आढ़ती से जे-फार्म उन्हें देरी से मिलता है। दूसरा यदि किसान मंडी में अपनी धान के ढेर को छोड़ कर किसान भवन में आकर रहता है तो पीछे से उसकी धान की ढेरी से धान गायब होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में किसान दुविधा में रहता है कि वह किसान भवन में सोए या फिर अपनी धान की फसल की रखवाली करें।
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600 रुपये में बुक हुआ कमरा
किसान भवन के अंदर महज एक रसीद कटी हुई है वह भी शाहबाद से किसी प्रधान के नाम की है। जिस पर न तो पूरा पता है और न ही बुकिंग कराने वाले व्यक्ति की पूरी जानकारी। हिंदी भाषा में जो रसीद बुक पर नाम और एड्रेस लिखा गया है वह भी त्रुटी पूर्ण हैं। ऐसे में किसान भवन की तरफ बोर्ड की अनदेखी के चलते कुछ भी हो सकता है।
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एक लाख रुपये महीने का खर्च
किसान रेस्ट हाउस पर खर्च की बात करें तो हर माह करीब 20 हजार रुपये का बिजली का बिल और 50 हजार रुपये का वेतन दिन रात रहने वाले स्टाफ को दिया जा रहा है। इसके अलावा किसान भवन के अन्य भी खर्च भी है। ऐसे में मोटे तौर पर एक लाख रुपये खर्च हो रहा है।
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कोट्स
- किसानों के लिए बना किसान भवन अभी मार्केट कमेटी के अधीन नहीं आया है अभी मार्केट कमेटी की इंजीनियरिंग ब्रांच इसकी देखरेख कर रही है। किसान आते हैं और फसल बेचकर घर चले जाते हैं बाकी इसका पूरा रिकॉर्ड जानकारी में नहीं है और इंजीनियरिंग ब्रांच एक्सईएन इस मामले में ज्यादा जानकारी दे सकते हैं।
- रामकुमार दहिया, सचिव, मार्केट कमेटी अंबाला छावनी।
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इसका शुभारंभ करीब तीन माह पहले किया गया था लेकिन अभी तक एक किसान भी इस रेस्ट हाउस में आराम या सोने के लिए नहीं ठहरा है। यदि किसान भवन में ठहरने की नियमों की बात करें तो यदि मंडी में एक किसान फसल बेचने के लिए जाता है तो किसान को फसल गिराने पर एक जे फार्म काट कर देगा। इस फार्म के आधार पर किसान भवन में किसान अपना कमरा बुक करा सकता है। किसान को किसान भवन में बुकिंग के लिए 25 रुपये देने होंगे। इसके अलावा एक कमरा बुक कराने पर 600 रुपये देने होंगे। लेकिन अभी तक किसान भवन में एक किसान भी नहीं ठहरा है। किसान राज कुमार, पुरुषोत्तम, रामबीर और करनैल सिंह से जब किसान भवन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि आढ़ती से जे-फार्म उन्हें देरी से मिलता है। दूसरा यदि किसान मंडी में अपनी धान के ढेर को छोड़ कर किसान भवन में आकर रहता है तो पीछे से उसकी धान की ढेरी से धान गायब होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में किसान दुविधा में रहता है कि वह किसान भवन में सोए या फिर अपनी धान की फसल की रखवाली करें।
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600 रुपये में बुक हुआ कमरा
किसान भवन के अंदर महज एक रसीद कटी हुई है वह भी शाहबाद से किसी प्रधान के नाम की है। जिस पर न तो पूरा पता है और न ही बुकिंग कराने वाले व्यक्ति की पूरी जानकारी। हिंदी भाषा में जो रसीद बुक पर नाम और एड्रेस लिखा गया है वह भी त्रुटी पूर्ण हैं। ऐसे में किसान भवन की तरफ बोर्ड की अनदेखी के चलते कुछ भी हो सकता है।
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एक लाख रुपये महीने का खर्च
किसान रेस्ट हाउस पर खर्च की बात करें तो हर माह करीब 20 हजार रुपये का बिजली का बिल और 50 हजार रुपये का वेतन दिन रात रहने वाले स्टाफ को दिया जा रहा है। इसके अलावा किसान भवन के अन्य भी खर्च भी है। ऐसे में मोटे तौर पर एक लाख रुपये खर्च हो रहा है।
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कोट्स
- किसानों के लिए बना किसान भवन अभी मार्केट कमेटी के अधीन नहीं आया है अभी मार्केट कमेटी की इंजीनियरिंग ब्रांच इसकी देखरेख कर रही है। किसान आते हैं और फसल बेचकर घर चले जाते हैं बाकी इसका पूरा रिकॉर्ड जानकारी में नहीं है और इंजीनियरिंग ब्रांच एक्सईएन इस मामले में ज्यादा जानकारी दे सकते हैं।
- रामकुमार दहिया, सचिव, मार्केट कमेटी अंबाला छावनी।