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Ambala News: लोहड़ी पर उत्साह मगर वक्त के साथ बदला मनाने का अंदाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Jan 2023 07:30 AM IST
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Excitement on Lohri but style of celebrating revenge with time
अंबाला टीम। लोहड़ी खुशियों का त्योहार माना जाता है। लोहड़ी का पर्व हर किसी के लिए खास होता है। नवविवाहित जोड़ों के लिए यह पर्व और भी अधिक खास हो जाता है। शादी के बाद पहली लोहड़ी को लेकर परिवार की ओर से भरपूर तैयारी की जाती है। हर वर्ष 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर लकड़ियों और उपलों से खुली जगह पर आग जलाई जाती है और इसके चारों ओर परिक्रमा की जाती है। ऐसे में आसपास और घर परिवार के लोग एकत्र होते हैं। शादी के बाद परिवार के नए सदस्य के आगमन पर भी यह पर्व बहुत खास हो जाता है। इसके अलावा बुजुर्ग भी इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। जिले में ऐसे कई परिवार हैं जो वर्षों से लोहड़ी की परंपराओं को संजो कर रखे हुए हैं। वह अपने परिवार के साथ लोहड़ी मनाते ही हैं। साथ ही समाज को भी इस त्योहार पर एकजुट करने का काम करते हैं।
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परिवार वाले तैयारी में जुटे
लोहड़ी पर्व को देखते हुए परिवार वाले तैयारी में जुटे हैं। शादी के बाद पहली लोहड़ी का अपना अलग ही आनंद है। इसे खास बनाने के लिए तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही मुझे पुत्र रत्न की भी प्राप्ति हुई है।
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-शुभम शर्मा और पत्नी शैली जफरपुर
दोहरी खुशी के साथ मनाएंगे
साल का पहला पर्व और शादी के बाद की पहली लोहड़ी है। इसके साथ ही मेरे घर में कन्या का जन्म हुआ है। इसलिए इस लोहड़ी पर्व पर दोहरी खुशी के साथ यह त्योहार मनाया जाएगा। जश्न को लेकर कोई कमी नहीं होगी।
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-राकेश मेहरा और पत्नी स्मृति देवी बराड़ा
पर्व को लेकर काफी उत्साह
पहले लोहड़ी पर्व को लेकर काफी उत्साह है। लोहड़ी पर्व को विशेष रूप से मनाया जाएगा। अभी पिछले दिनों ही शादी हुई है तो हर कार्यक्रम को पूरे धूमधाम के साथ मनाने की तैयारी चल रही है। इस दिन पूरा परिवार जुटेगा।
- सुनील सैनी और पत्नी रितु सैनी
एकजुटता का त्योहार
लोहड़ी पर्व परिवार के एकजुट होकर मनाया जाने वाला त्योहार है। शादी के बाद पहली लोहड़ी है। इसको लेकर अलग ही उत्साह है। बहुत ही धूमधाम के साथ पुराने तरीके से ही इस पर्व को मनाया जाएगा। पूरी तैयारी है।
- अक्षय और उनकी पत्नी आरजू।
अलाव जलाकर गाते थे गीत
हम शादी के बाद 40वीं लोहड़ी मना रहे हैं। हमारे समय में नवजात बच्चे और नवविवाहित जोड़े की प्रथम लोहड़ी के अवसर पर मोहल्लेवासी घर के आंगन में अलाव जलाकर इर्द-गिर्द बैठते थे। वे भांगड़ा, गिद्दा और लोकगीत गाते हुए सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की मंगल कामना करते थे।
-राजकुमार और पत्नी वीना देवी, राजोखेड़ी
आपस में बांटते थे दुख-दर्द
हम 48वीं लोहड़ी मना रहे हैं। हमारे समय में देर रात तक चलने वाले इस उत्सव में भावनाओं और आपसी प्रेम की ऊर्जा का अनुभव करते थे। परिवार के लोग आपस में विचार, दुख-दर्द, फसल और पारिवारिक गतिविधियों पर एक दूसरे को परामर्श, शुभकामना व सहयोग की चर्चा करते थे।
-जसवंत सिंह और जसवंत कौर धीन
खूब पड़ती थी बोलियां
शादी को करीब 40 साल हो गए हैं। उस समय की लोहड़ी और इस समय की लोहड़ी में बहुत अंतर है। जहां पहले एकजुट होकर लोहड़ी का पर्व मनाया जाता था, खूब बोलियां पड़ती थी। अब बदलते समय के साथ जितने दरवाजे उतनी लोहड़ी की ओर पर्व बढ़ता जा रहा है। युवा होटलों में लोहड़ी का पर्व मनाते हैं।

- सविंद्र सिंह और पत्नी कुलदीप कौर।
तरीका बदला, उत्साह वही
पंजाबी बहुत ही जोश और उत्साह के साथ यह त्योहार मनाते हैं। पिछले दिनों भी बिरादरी की ओर से बड़ा उत्सव रखा गया था। अब लोहड़ी वाले दिन भी परिवार की ओर से विशेष कार्यक्रम कर इस त्योहार को धूमधाम के साथ मनाएंगे। बदलते समय के साथ पर्व का तरीका चाहे बदल रहा है परंतु उत्साह वही है।
- संदीप सचदेवा और पत्नी शैलजा सचदेवा।
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