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Ambala News: बिजली कर्मचारियों ने फूंकी लाइसेंस की प्रतियां
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अंबाला में पैरलेल लाइसेंस की प्रतियां जलाते बिजली कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Archive
निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बिजली निगमों के निजीकरण के विरोध में बुधवार को प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पैरेलल लाइसेंस जारी करने वाले आदेशों की प्रतियां जलाईं। विरोधस्वरूप बुलाई गई तीन दिवसीय प्रस्तावित हड़ताल बुधवार रात 10 बजे से प्रभावी हो गई।
सर्कल सचिव (ऑपरेशन) सतबीर देशवाल ने बराड़ा में कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि मोर्चा ने जनहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल टालने का हरसंभव प्रयास किया था। गत 10 अगस्त को हरियाणा सरकार और निगम मैनेजमेंट के साथ यूनियनों का लिखित समझौता हुआ था। लेकिन सरकार ने समझौते का उल्लंघन किया।
गुरुग्राम और नूंह में 11 पावर कंपनियों को पैरेलल लाइसेंस जारी कर दिए गए। कर्मचारियों का आरोप है कि यह कदम पिछले दरवाजे से बिजली विभाग के निजीकरण की सुनियोजित पहल है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। विभिन्न सब-डिविजनों में भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। केंद्रीय परिषद के उप प्रधान राजकुमार सेहला और नंबर 1 के प्रधान तिलक सिंह ने नेतृत्व किया। संघर्ष मोर्चा के सदस्य राजेश चंद्र सिरोही ने समर्थन मांगा। इंजीनियर संगठन के उपमंडल अधिकारी भी कर्मचारियों के साथ थे।
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विभिन्न सब-डिविजनों में कर्मचारियों का आक्रोश
बब्याल में यूनिट अध्यक्ष राम लाल और सचिव मुकेश शर्मा ने कर्मचारियों को संबोधित किया। केसरी में रवि कुमार फोरमैन व प्रेम पाल की अगुवाई में गेट मीटिंग हुई। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद 24 अक्तूबर को मोर्चा की उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसमें आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। कर्मचारी नेताओं ने कहा, यदि सरकार ने अपना दमनकारी और अहंकारी रवैया नहीं छोड़ा, तो कर्मचारी इस तीन दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व सर्कल सचिव रवि चौधरी समेत सैकड़ों बिजली कर्मचारी व इंजीनियर मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बिजली निगमों के निजीकरण के विरोध में बुधवार को प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पैरेलल लाइसेंस जारी करने वाले आदेशों की प्रतियां जलाईं। विरोधस्वरूप बुलाई गई तीन दिवसीय प्रस्तावित हड़ताल बुधवार रात 10 बजे से प्रभावी हो गई।
सर्कल सचिव (ऑपरेशन) सतबीर देशवाल ने बराड़ा में कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि मोर्चा ने जनहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल टालने का हरसंभव प्रयास किया था। गत 10 अगस्त को हरियाणा सरकार और निगम मैनेजमेंट के साथ यूनियनों का लिखित समझौता हुआ था। लेकिन सरकार ने समझौते का उल्लंघन किया।
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गुरुग्राम और नूंह में 11 पावर कंपनियों को पैरेलल लाइसेंस जारी कर दिए गए। कर्मचारियों का आरोप है कि यह कदम पिछले दरवाजे से बिजली विभाग के निजीकरण की सुनियोजित पहल है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। विभिन्न सब-डिविजनों में भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। केंद्रीय परिषद के उप प्रधान राजकुमार सेहला और नंबर 1 के प्रधान तिलक सिंह ने नेतृत्व किया। संघर्ष मोर्चा के सदस्य राजेश चंद्र सिरोही ने समर्थन मांगा। इंजीनियर संगठन के उपमंडल अधिकारी भी कर्मचारियों के साथ थे।
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विभिन्न सब-डिविजनों में कर्मचारियों का आक्रोश
बब्याल में यूनिट अध्यक्ष राम लाल और सचिव मुकेश शर्मा ने कर्मचारियों को संबोधित किया। केसरी में रवि कुमार फोरमैन व प्रेम पाल की अगुवाई में गेट मीटिंग हुई। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद 24 अक्तूबर को मोर्चा की उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसमें आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। कर्मचारी नेताओं ने कहा, यदि सरकार ने अपना दमनकारी और अहंकारी रवैया नहीं छोड़ा, तो कर्मचारी इस तीन दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व सर्कल सचिव रवि चौधरी समेत सैकड़ों बिजली कर्मचारी व इंजीनियर मौजूद रहे।