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नशा मुक्त का दावा : गांव की फिरनी के बाहर श्मशान के पास युवा कर रहे नशा
Sat, 01 Nov 2025 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 01 Nov 2025 02:12 AM IST
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भूपेंद्र कौर
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। गांवों को नशा मुक्त कर पुलिस विभाग ने वाहवाही तो लूट ली, लेकिन बाद में नियमित तौर पर गश्त के कारण दोबारा से गांव में नशे के पैर पसर रहे हैं। पुलिस द्वारा नशा मुक्त किए गए गांव की फिरनी के पास ही आसपास के गांव से युवा आकर धड़ल्ले से नशा कर रहे हैं, इस बात से पुलिस विभाग भी अनजान है। अमर उजाला की टीम ने पुलिस द्वारा नशा मुक्त घोषित किए सदर थाना क्षेत्र के बहबलपुर गांव में जाकर जायजा लिया तो गांव के हालात में तो सुधार दिखा, लेकिन फिरनी के पास बने श्मशान घाट का जायजा लिया तो शाम के समय युवाओं का झुंड झाड़ियों के पास बैठा मिला। जब तक पास गए तो युवा बाइकों पर फरार हो गए। मौके पर भांग से भरी सिगरेट सहित कुछ सिल्वर पेपर भी मिले थे जो नशे में इस्तेमाल होते हैं।
ग्रामीण बोले- गांव में इक्का-दुक्का नशेड़ी, बाहरी युवा कर रहे नशा
पुलिस के द्वारा नशा मुक्त घोषित किए गए बहबलपुर गांव के भीतर गए तो ग्रामीणों ने कहा कि पहले की अपेक्षा गांव में बेहद सुधार है। एक-दुक्का जो नशा करता है तो उसमें सुधार किया जा रहा है। सूखा नशा लगभग खत्म है। गांव की फिरनी के आसपास कुछ बाहरी युवा आ जाते होंगे तो उन्हें पता नहीं है। एक-दो बार सुना जरूर है। श्मशान घाट गांव से दूर होने के कारण उस ओर कोई ध्यान नहीं देता। यदि पुलिस नियमित तौर पर गश्त करे तो वह भी खत्म हो जाएगा।
पुलिस को समय-समय पर करनी चाहिए गश्त
श्री गुरु ग्रंथ साहिब विद्या केंद्र की संचालिका भूपेंद्र कौर ने कहा कि बड़े-बड़े गांव में नशे का बहुत प्रभाव था। जो धीरे-धीरे उनके गांव की तरफ आ गया था लेकिन वह अपने विद्या केंद्र के माध्यम से बच्चों और युवाओं को हमेशा नशे से दूर रहने का पाठ पढ़ा रही है। उनकी पुलिस प्रशासन से मांग है कि वह समय-समय पर गांव में गश्त करें ताकि युवाओं में पुलिस का भी डर बना रहे।
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युवाओं को खेलों से जोड़ने का रहता है प्रयास
ग्रामीण जगतार सिंह ने बताया कि उसकी हमेशा से यह प्रयास रहता है कि युवा खेलों से जुड़कर नशे के बारे में सोच भी न सकें। समय-समय पर गांव के युवाओं को जागरूक किया जाता है। फिरनी से बाहर श्मशान घाट के पास कोई आकर बैठ जाए तो उन्हें पता नहीं चल पाता है। गांव में भांग, नशीले कैप्सूल, हेरोइन से कोई ग्रस्त नहीं है। चंद लोग शराब का सेवन कर लेते हैं, उन्हें भी छुड़वाने का प्रयास किया जाता है।
बहबलपुर गांव में नियमित तौर पर गश्त रहती है। अगर कोई श्मशान घाट के पास बैठकर नशा कर रहा है तो उसके काबू कर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
शंभू लाल, थाना प्रभारी अंबाला सदर
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अंबाला। गांवों को नशा मुक्त कर पुलिस विभाग ने वाहवाही तो लूट ली, लेकिन बाद में नियमित तौर पर गश्त के कारण दोबारा से गांव में नशे के पैर पसर रहे हैं। पुलिस द्वारा नशा मुक्त किए गए गांव की फिरनी के पास ही आसपास के गांव से युवा आकर धड़ल्ले से नशा कर रहे हैं, इस बात से पुलिस विभाग भी अनजान है। अमर उजाला की टीम ने पुलिस द्वारा नशा मुक्त घोषित किए सदर थाना क्षेत्र के बहबलपुर गांव में जाकर जायजा लिया तो गांव के हालात में तो सुधार दिखा, लेकिन फिरनी के पास बने श्मशान घाट का जायजा लिया तो शाम के समय युवाओं का झुंड झाड़ियों के पास बैठा मिला। जब तक पास गए तो युवा बाइकों पर फरार हो गए। मौके पर भांग से भरी सिगरेट सहित कुछ सिल्वर पेपर भी मिले थे जो नशे में इस्तेमाल होते हैं।
ग्रामीण बोले- गांव में इक्का-दुक्का नशेड़ी, बाहरी युवा कर रहे नशा
पुलिस के द्वारा नशा मुक्त घोषित किए गए बहबलपुर गांव के भीतर गए तो ग्रामीणों ने कहा कि पहले की अपेक्षा गांव में बेहद सुधार है। एक-दुक्का जो नशा करता है तो उसमें सुधार किया जा रहा है। सूखा नशा लगभग खत्म है। गांव की फिरनी के आसपास कुछ बाहरी युवा आ जाते होंगे तो उन्हें पता नहीं है। एक-दो बार सुना जरूर है। श्मशान घाट गांव से दूर होने के कारण उस ओर कोई ध्यान नहीं देता। यदि पुलिस नियमित तौर पर गश्त करे तो वह भी खत्म हो जाएगा।
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पुलिस को समय-समय पर करनी चाहिए गश्त
श्री गुरु ग्रंथ साहिब विद्या केंद्र की संचालिका भूपेंद्र कौर ने कहा कि बड़े-बड़े गांव में नशे का बहुत प्रभाव था। जो धीरे-धीरे उनके गांव की तरफ आ गया था लेकिन वह अपने विद्या केंद्र के माध्यम से बच्चों और युवाओं को हमेशा नशे से दूर रहने का पाठ पढ़ा रही है। उनकी पुलिस प्रशासन से मांग है कि वह समय-समय पर गांव में गश्त करें ताकि युवाओं में पुलिस का भी डर बना रहे।
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युवाओं को खेलों से जोड़ने का रहता है प्रयास
ग्रामीण जगतार सिंह ने बताया कि उसकी हमेशा से यह प्रयास रहता है कि युवा खेलों से जुड़कर नशे के बारे में सोच भी न सकें। समय-समय पर गांव के युवाओं को जागरूक किया जाता है। फिरनी से बाहर श्मशान घाट के पास कोई आकर बैठ जाए तो उन्हें पता नहीं चल पाता है। गांव में भांग, नशीले कैप्सूल, हेरोइन से कोई ग्रस्त नहीं है। चंद लोग शराब का सेवन कर लेते हैं, उन्हें भी छुड़वाने का प्रयास किया जाता है।
बहबलपुर गांव में नियमित तौर पर गश्त रहती है। अगर कोई श्मशान घाट के पास बैठकर नशा कर रहा है तो उसके काबू कर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
शंभू लाल, थाना प्रभारी अंबाला सदर

भूपेंद्र कौर- फोटो : संवाद

भूपेंद्र कौर- फोटो : संवाद

भूपेंद्र कौर- फोटो : संवाद