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Ambala News: ख्वाब आसमान पर कार्रवाई कागजों पर
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सीएमओ कार्यालय अंबाला। आर्काइव
अंबाला सिटी। जिला की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सपना संजोया था कि वह जिलों के 35 स्थानों पर सब सेंटर खोलेंगे।
इन सेंटरों को खोलने के बाद विभाग ने काफी काेशिशें भी कीं। दो माह पूर्व इनके लिए निदेशालय ने बजट जारी कर दिया। मगर सरकारी सिस्टम के हालात ऐसे हैं कि यह ख्वाब मौजूदा समय में जमीन पर दिखाई दे रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सब सेंटरों को बनाने के लिए जमीन चाहिए थी और फंड। फंड विभाग ने दे दिया मगर जमीन जिला परिषद उपलब्ध कराएगा। अब जिला परिषद की अपनी समस्याएं ही इन सब सेंटरों के बनने में अड़चन बन गया है।
जमीन आबंटन के लिए जिला परिषद अपनी आंतरिक समस्याएं गिना रहा है तो स्वास्थ्य विभाग पत्राचार करते-करते इतना थक गया है कि निदेशालय से ही कह रहा है कि आप ही कुछ मदद कीजिए। अब एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग ने निदेशालय को इस बाबत पत्र लिखा है और आला अधिकारियों से कहा है कि उन्हें इस समस्या का हल निकालकर दिया जाए। अभी तक विभाग को 35 में से सिर्फ तीन सेंटरों की लिए जमीन अलॉट हुई है। जबकि अन्य सब सेंटर अभी भी लटके हैं।
हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ
जिले भर में चल रहे पुराने स्वास्थ्य विभाग के सब सेंटर अधिकतर किराये की जमीन पर चल रहे हैं। इसे देखते हुए यह सब सेंटर अपनी जमीन पर बनाने के लिए निर्देश जारी हुए थे। सभी सब सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में ही बनाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों मरीज ऐसे हैं जो सब सेंटर न होने के कारण सीएचसी और नागरिक अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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प्रत्येक सब सेंटर के लिए लाखों का बजट
35 सब सेंटर के लिए 45 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक का बजट जारी किया है। यहां पर गर्भवतियों की जांच की सुविधा, प्राथमिक उपचार, चोटिल होने पर मरहम पट्टी और छोटी मोटी बीमारियों के लिए दवा की सुविधा मिलेगी। किराये के भवन में होने के कारण अधिकतर सब सेंटर की हालात खस्ता है। किसी सब सेंटर की दीवारें टूटी तो किसी सेंटर में शौचालय की व्यवस्था ठीक नहीं है।
यहां पर बनने हैं नए सब सेंटर
अंबाला के ठरवा, काठगढ़, जफ्फरपुर, उगाला, तहहेड़ी, रांगना, मुलाना, खेड़ा, तलहेड़ी, संभालखा, नन्हेड़ा, बसंत ओर कालड़ सहित 35 जगह नए सब सेंटर बनाने की मंजूरी मिली है। जनसंख्या के आधार पर ही सब सेंटर का निर्माण किया जाता है। पांच हजार की जनसंख्या वाले क्षेत्र में एक सब सेंटर खोला जाता है। इससे मरीजों को पीएचसी और सीएचसी तक न जाना पड़े। इन सेंटर में स्वास्थ्य से जुड़ी सभी मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही अलग से चिकित्सक और अन्य स्टाफ की भी नियुक्ति होगी।
जिला परिषद के सीईओ गगनदीप ने बताया कि हमारी ओर से एक बार बैठक हो चुकी है। ग्राम पंचायतें जमीन की निशानदेही करवाती हैं। इसके साथ ही सब सेंटर के आधार पर एंबुलेंस के आने जाने के रास्ते को देखते हुए ही जमीन का चुनाव होता है। फिलहाल हमारी ओर से 16 जगहों का चुनाव किया जा चुका है। दो सब सेंटर का निर्माण कार्य जारी है। अन्य 14 जगहों के लिए ग्राम पंचायतें जगह की पहचान के लिए जुटी हुई है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण का कार्य हो जाएगा। हमारी तरफ से कोई समस्या होगी तो उसका भी हल किया जाएगा।
वर्जन
निदेशालय की ओर से पत्र के बाद अब निर्देश आए हैं कि जिला परिषद के साथ मिलकर जमीन अधिग्रहण का हल निकाला जाए। अब बैठक में ही जमीन अधिग्रहण पर फैसला लिया जाएगा। इसके बाद सब सेंटर का निर्माण कार्य शुरू होगा।
-डॉ. संजीव सिंगला, नोडल अधिकारी बिल्डिंग ब्रांच, स्वास्थ्य विभाग, अंबाला।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक कर इसका हल किया जाएगा। चेयरमैन पद के मामले के कारण ही काम में देरी हो रही है।
- गगनदीप सिंह, सीईओ, जिला परिषद
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इन सेंटरों को खोलने के बाद विभाग ने काफी काेशिशें भी कीं। दो माह पूर्व इनके लिए निदेशालय ने बजट जारी कर दिया। मगर सरकारी सिस्टम के हालात ऐसे हैं कि यह ख्वाब मौजूदा समय में जमीन पर दिखाई दे रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सब सेंटरों को बनाने के लिए जमीन चाहिए थी और फंड। फंड विभाग ने दे दिया मगर जमीन जिला परिषद उपलब्ध कराएगा। अब जिला परिषद की अपनी समस्याएं ही इन सब सेंटरों के बनने में अड़चन बन गया है।
जमीन आबंटन के लिए जिला परिषद अपनी आंतरिक समस्याएं गिना रहा है तो स्वास्थ्य विभाग पत्राचार करते-करते इतना थक गया है कि निदेशालय से ही कह रहा है कि आप ही कुछ मदद कीजिए। अब एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग ने निदेशालय को इस बाबत पत्र लिखा है और आला अधिकारियों से कहा है कि उन्हें इस समस्या का हल निकालकर दिया जाए। अभी तक विभाग को 35 में से सिर्फ तीन सेंटरों की लिए जमीन अलॉट हुई है। जबकि अन्य सब सेंटर अभी भी लटके हैं।
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हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ
जिले भर में चल रहे पुराने स्वास्थ्य विभाग के सब सेंटर अधिकतर किराये की जमीन पर चल रहे हैं। इसे देखते हुए यह सब सेंटर अपनी जमीन पर बनाने के लिए निर्देश जारी हुए थे। सभी सब सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में ही बनाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों मरीज ऐसे हैं जो सब सेंटर न होने के कारण सीएचसी और नागरिक अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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प्रत्येक सब सेंटर के लिए लाखों का बजट
35 सब सेंटर के लिए 45 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक का बजट जारी किया है। यहां पर गर्भवतियों की जांच की सुविधा, प्राथमिक उपचार, चोटिल होने पर मरहम पट्टी और छोटी मोटी बीमारियों के लिए दवा की सुविधा मिलेगी। किराये के भवन में होने के कारण अधिकतर सब सेंटर की हालात खस्ता है। किसी सब सेंटर की दीवारें टूटी तो किसी सेंटर में शौचालय की व्यवस्था ठीक नहीं है।
यहां पर बनने हैं नए सब सेंटर
अंबाला के ठरवा, काठगढ़, जफ्फरपुर, उगाला, तहहेड़ी, रांगना, मुलाना, खेड़ा, तलहेड़ी, संभालखा, नन्हेड़ा, बसंत ओर कालड़ सहित 35 जगह नए सब सेंटर बनाने की मंजूरी मिली है। जनसंख्या के आधार पर ही सब सेंटर का निर्माण किया जाता है। पांच हजार की जनसंख्या वाले क्षेत्र में एक सब सेंटर खोला जाता है। इससे मरीजों को पीएचसी और सीएचसी तक न जाना पड़े। इन सेंटर में स्वास्थ्य से जुड़ी सभी मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही अलग से चिकित्सक और अन्य स्टाफ की भी नियुक्ति होगी।
जिला परिषद के सीईओ गगनदीप ने बताया कि हमारी ओर से एक बार बैठक हो चुकी है। ग्राम पंचायतें जमीन की निशानदेही करवाती हैं। इसके साथ ही सब सेंटर के आधार पर एंबुलेंस के आने जाने के रास्ते को देखते हुए ही जमीन का चुनाव होता है। फिलहाल हमारी ओर से 16 जगहों का चुनाव किया जा चुका है। दो सब सेंटर का निर्माण कार्य जारी है। अन्य 14 जगहों के लिए ग्राम पंचायतें जगह की पहचान के लिए जुटी हुई है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण का कार्य हो जाएगा। हमारी तरफ से कोई समस्या होगी तो उसका भी हल किया जाएगा।
वर्जन
निदेशालय की ओर से पत्र के बाद अब निर्देश आए हैं कि जिला परिषद के साथ मिलकर जमीन अधिग्रहण का हल निकाला जाए। अब बैठक में ही जमीन अधिग्रहण पर फैसला लिया जाएगा। इसके बाद सब सेंटर का निर्माण कार्य शुरू होगा।
-डॉ. संजीव सिंगला, नोडल अधिकारी बिल्डिंग ब्रांच, स्वास्थ्य विभाग, अंबाला।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक कर इसका हल किया जाएगा। चेयरमैन पद के मामले के कारण ही काम में देरी हो रही है।
- गगनदीप सिंह, सीईओ, जिला परिषद