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रंजीत नगर में कुत्ते ने जकड़ा था बच्ची का मुंह, गुस्साई भीड़ ने पीट-पीटकर कुत्ते को उतारा मौत के घाट
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अंबाला सिटी। ट्विन सिटी में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रविवार को ही सिटी के अलग-अलग क्षेत्रों में 10 डॉग बाइट के केस सामने आए। जिसमें रणजीत नगर की बच्ची के मुंह को कुत्ते ने अपने जबड़े से दबोच लिया। बच्ची को बचाने के लिए आई भीड़ ने कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला। मासूम बच्ची का अभी दो दिन पहले ही जन्मदिन भी परिजनों ने मनाया था।
सिटी सिविल अस्पताल में मरीजों को प्राथमिक इलाज दिया गया है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे घायल एवं परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उनका कहना था कि लगातार स्ट्रीट डॉग्स की संख्या गली मोहल्लों में बढ़ती जा रही है। मगर इनपर लगाम लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। बता दें कि शहर के नागरिक अस्पताल में रोज दो से तीन केस डॉग बाइट के आ रहे हैं। औसतन शहर नागरिक अस्पताल में 13 केस कुत्ते काटने के आते हैं। इसी तरह के हालात छावनी नागरिक अस्पताल के भी हैं। हालांकि यहां रोजाना एंटी रेबीज के टीके 56 से 60 लोगों को लगते हैं। लेकिन इनमें नए 25-26 केस ही आते हैं।
बेटी के चीखने की आवाज सुन दौड़ी मीना
रणजीत नगर में रहने वाली चार वर्षीय बच्ची लक्ष्मी की मां मीना ने बताया कि रोजाना लक्ष्मी सुबह 8 बजे उठती थी लेकिन रविवार को वह सात बजे उठ गई। उठते ही वह घर के बाहर खेलने लगी। उस समय वह अपने पति के लिए चाय बना रही थी। इसी दौरान उसने अपनी बेटी के चीखने की आवाज सुनी। बच्ची को कुत्ते ने जकड़ा था। जब तक आसपास के लोग एकजुट होते कुत्ते ने बच्ची के मुंह और होंठ का काफी मांस काट लिया। इसके बाद उसे वह अपने देवर के साथ जिला नागरिक अस्पताल लेकर पहुंची। जहां उसे एंटी रेबीज के टीके लगाए गए। लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पीजीआई रेफर कर दिया।
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बलदेव नगर में भी एक दिन में पागल कुत्ते ने छह लोगों को काटा
शहर के बलदेव नगर निवासी दर्शन ने कहा कि उनका 11 वर्षीय बेटा अमर सुबह जब घर के बाहर खेल रहा था इस दौरान गली में एक पागल कुत्ते ने उसकी टांग पर काट लिया। जिसे उपचार के लिए शहर नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उसका घाव गहरा होने पर उसे पीजीआई रेफर कर दिया। दर्शन ने बताया कि उनकी गली में इस पागल कुत्ते ने रविवार को एक ही दिन में 5 अन्य लोगों को भी काटा। हालांकि उनमें से सिर्फ अमर को ही सिविल अस्पताल लाया गया।
परिजनों ने जताई नाराजग
अमर के पिता दर्शन ने कहा कि अस्पताल पहुंचे तो यहां डॉक्टर ने गहरे घाव के इलाज के लिए इंजेक्शन न होने की बात कह कर रेफर करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अस्पताल में पूरा इलाज नहीं मिलने से अगर पीजीआई ले जाते समय मरीज को कुछ हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
इन्हें भी बनाया कुत्तों ने शिकार
इसके अलावा कुत्तों ने शहर के रेलवे स्टेशन निवासी 24 वर्षीय रानी, बलदेव नगर निवासी 42 वर्षीय बाला रानी और शहर निवासी 60 वर्षीय कुलभूषण को भी कुत्तों ने काट लिया। इन्हें भी शहर नागरिक अस्पताल लाया गया, लेकिन घाव गहरा न होने के चलते प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
क्यों नहीं है गंभीर घाव का इलाज
ऐसा पहला मामला नहीं है कि कुत्ते के काटने पर किसी मरीज को पीजीआई रेफर किया जाए, इससे पहले भी कई मरीजों को रेफर किया जा चुका है। इसकी मुख्य वजह यहां सीरम (टीके) का न होना है। डॉक्टरों ने बताया कि अगर किसी को कुत्ता काटे और घाव ज्यादा न हो तो इसका इलाज जिला अस्पताल में है, लेकिन अगर घाव गहरा हो तो उस मरीज को सीरम एंटी बॉडी लगाया जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि यह सीरम चंडीगढ़ सेक्टर-16, 19, 32 और पीजीआई में ही उपलब्ध है।
वजन के हिसाब से बढ़ती है कीमत
सिविल अस्पताल के डॉक्टर संजय ने बताया कि इस टीके को मरीज के वजन के अनुसार ही लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस सीरम की कीमत 7 हजार से करीब 25 हजार रुपये तक होती है और जिस मरीज का जितना वजन होगा उसी के अनुसार टीके की मात्रा भी इस्तेमाल में लाई जाएगी। वहीं जितनी मात्रा में सीरम लगाया जाएगा उसी के अनुसार इसकी कीमत भी तय होगी। डॉक्टरों ने बताया कि इसका जिला अस्पताल में ज्यादा इस्तेमाल न होने के कारण हरियाणा सरकार की ओर से इसकी सप्लाई नहीं की जाती। वहीं जिला नागरिक अस्पताल में एंटी रेबीज के टीके के लिए बीपीएल धार के लिए निशुल्क व अन्य को प्रति टीका 100 रुपये अदा करने होते हैं।
कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए विचार चल रहा है। जल्द ही आयुक्त साहब से बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा। साधु राम नैन, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर
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सिटी सिविल अस्पताल में मरीजों को प्राथमिक इलाज दिया गया है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे घायल एवं परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उनका कहना था कि लगातार स्ट्रीट डॉग्स की संख्या गली मोहल्लों में बढ़ती जा रही है। मगर इनपर लगाम लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। बता दें कि शहर के नागरिक अस्पताल में रोज दो से तीन केस डॉग बाइट के आ रहे हैं। औसतन शहर नागरिक अस्पताल में 13 केस कुत्ते काटने के आते हैं। इसी तरह के हालात छावनी नागरिक अस्पताल के भी हैं। हालांकि यहां रोजाना एंटी रेबीज के टीके 56 से 60 लोगों को लगते हैं। लेकिन इनमें नए 25-26 केस ही आते हैं।
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बेटी के चीखने की आवाज सुन दौड़ी मीना
रणजीत नगर में रहने वाली चार वर्षीय बच्ची लक्ष्मी की मां मीना ने बताया कि रोजाना लक्ष्मी सुबह 8 बजे उठती थी लेकिन रविवार को वह सात बजे उठ गई। उठते ही वह घर के बाहर खेलने लगी। उस समय वह अपने पति के लिए चाय बना रही थी। इसी दौरान उसने अपनी बेटी के चीखने की आवाज सुनी। बच्ची को कुत्ते ने जकड़ा था। जब तक आसपास के लोग एकजुट होते कुत्ते ने बच्ची के मुंह और होंठ का काफी मांस काट लिया। इसके बाद उसे वह अपने देवर के साथ जिला नागरिक अस्पताल लेकर पहुंची। जहां उसे एंटी रेबीज के टीके लगाए गए। लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पीजीआई रेफर कर दिया।
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बलदेव नगर में भी एक दिन में पागल कुत्ते ने छह लोगों को काटा
शहर के बलदेव नगर निवासी दर्शन ने कहा कि उनका 11 वर्षीय बेटा अमर सुबह जब घर के बाहर खेल रहा था इस दौरान गली में एक पागल कुत्ते ने उसकी टांग पर काट लिया। जिसे उपचार के लिए शहर नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उसका घाव गहरा होने पर उसे पीजीआई रेफर कर दिया। दर्शन ने बताया कि उनकी गली में इस पागल कुत्ते ने रविवार को एक ही दिन में 5 अन्य लोगों को भी काटा। हालांकि उनमें से सिर्फ अमर को ही सिविल अस्पताल लाया गया।
परिजनों ने जताई नाराजग
अमर के पिता दर्शन ने कहा कि अस्पताल पहुंचे तो यहां डॉक्टर ने गहरे घाव के इलाज के लिए इंजेक्शन न होने की बात कह कर रेफर करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अस्पताल में पूरा इलाज नहीं मिलने से अगर पीजीआई ले जाते समय मरीज को कुछ हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
इन्हें भी बनाया कुत्तों ने शिकार
इसके अलावा कुत्तों ने शहर के रेलवे स्टेशन निवासी 24 वर्षीय रानी, बलदेव नगर निवासी 42 वर्षीय बाला रानी और शहर निवासी 60 वर्षीय कुलभूषण को भी कुत्तों ने काट लिया। इन्हें भी शहर नागरिक अस्पताल लाया गया, लेकिन घाव गहरा न होने के चलते प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
क्यों नहीं है गंभीर घाव का इलाज
ऐसा पहला मामला नहीं है कि कुत्ते के काटने पर किसी मरीज को पीजीआई रेफर किया जाए, इससे पहले भी कई मरीजों को रेफर किया जा चुका है। इसकी मुख्य वजह यहां सीरम (टीके) का न होना है। डॉक्टरों ने बताया कि अगर किसी को कुत्ता काटे और घाव ज्यादा न हो तो इसका इलाज जिला अस्पताल में है, लेकिन अगर घाव गहरा हो तो उस मरीज को सीरम एंटी बॉडी लगाया जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि यह सीरम चंडीगढ़ सेक्टर-16, 19, 32 और पीजीआई में ही उपलब्ध है।
वजन के हिसाब से बढ़ती है कीमत
सिविल अस्पताल के डॉक्टर संजय ने बताया कि इस टीके को मरीज के वजन के अनुसार ही लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस सीरम की कीमत 7 हजार से करीब 25 हजार रुपये तक होती है और जिस मरीज का जितना वजन होगा उसी के अनुसार टीके की मात्रा भी इस्तेमाल में लाई जाएगी। वहीं जितनी मात्रा में सीरम लगाया जाएगा उसी के अनुसार इसकी कीमत भी तय होगी। डॉक्टरों ने बताया कि इसका जिला अस्पताल में ज्यादा इस्तेमाल न होने के कारण हरियाणा सरकार की ओर से इसकी सप्लाई नहीं की जाती। वहीं जिला नागरिक अस्पताल में एंटी रेबीज के टीके के लिए बीपीएल धार के लिए निशुल्क व अन्य को प्रति टीका 100 रुपये अदा करने होते हैं।
कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए विचार चल रहा है। जल्द ही आयुक्त साहब से बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा। साधु राम नैन, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर