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Ambala News: नहीं मानी हार, बच्चों को दिया मुकाम

Sun, 12 May 2024 04:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Sun, 12 May 2024 04:24 AM IST
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Didn't accept defeat, gave place to children
संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। पति ने 60 साल तक साथ निभाया और परिवार का बेहद सुंदर व सुसज्जित ढंग से भरण-पोषण किया, लेकिन अचानक उनकी हत्या हो गई। ऐसे में अंबाला छावनी की प्रीतनगर निवासी शकुंतला देवी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस दौरान सबसे बड़ी समस्या तीन बेटों की परवरिश, उनकी देखभाल की थी जोकि नित नए उतार-चढ़ाव के बीच शकुंतला देवी ने बखूबी निभाई।
आज शकुंतला देवी 103 साल की हो गई हैं, बावजूद इसके उनमें आज भी वो जोश व उत्साह है जो समाज को एक नई दिशा दिखा रहा है कि विधवा का दंश झेलने के बाद भी उन्होंने वो शिक्षा अपने बच्चों को दी जोकि एक मिसाल बन गई। शकुंतला देवी की लग्न व मेहनत ने तीन बेटों को कामयाबी के शिखर पर पहुंचाया। एक बेटे इंजीनियर,दूसरा सीए और तीसरा बेटा पंजाब के कृषि विभाग में तैनात रहा। हालांकि अब तीनों बेटे सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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शकुंतला देवी ने बताया वो पाकिस्तान के जिला कमालिया में रहते थे। 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद वो अंबाला शहर आए। यहां मेरे ससुर रामचंद्र आर्य रेलवे रोड स्थित आर्य समाज संचालक थे। वह एक शिक्षक भी थे ओर जगाधरी गेट स्थित आर्य स्कूल में प्राचार्य भी रहे। इसके बाद उन्होंने यह जगह आर्य समाज को दे दी और खुद किराये के मकान में रहने लगे।
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वहीं उनके बेटे धर्मवीर आर्य और मेरे पति पेशे से डाॅक्टर थे जोकि करनाल में तैनात थे और पानीपत में मेरे साथ रहते थे। कुछ समय बाद वो स्वास्थ्य विभाग में उपनिदेशक के पद पर भी रहे। उस समय हरियाणा, पंजाब ओर हिमाचल एक सीमा थी। लेकिन 1964 में डाॅ धर्मवीर की करनाल में हत्या कर दी गई। उस समय परिवार की पूरी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई थी।
शकुंतला देवी ने बताया कि उन्होंने बीए की पढाई की हुई थी और इस मुश्किल की घड़ी में शिक्षा ही उनका सहारा बनी। पति की मृत्यु के समय बड़ा बेटा विक्रमजीत धमीजा नाैवीं कक्षा में, दूसरा विश्वजीत धमीजा सातवीं कक्षा में और तीसरा अरुणजीत धमीजा चौथी कक्षा में पढ़ रहा था। उसने नौकरी पाने के लिए काफी दौड़भाग की तो पटियाला में शिक्षक की नौकरी मिल गई।
नौकरी के अलावा उसने घर पर ही बच्चों का ट्यूशन भी दी और आगे की पढ़ाई भी जारी रखी। इस दौरान बच्चों की शिक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया।इस दौरान वो पटियाला में ही आर्य समाज की प्रधान भी रही। वहीं बड़ा बेटा विक्रमजीत इंजीनियर बन गया जोकि पंजाब के बठिंडा से इंजीनियर इन चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुआ।

विश्वजीत धमीजा सीए थे और वो फगवाडा के जेसीटी मिल से सेवानिवृत हुए। मौजूदा समय में उनका देहांत हो चुका है। इसी के साथ अरुणजीत ने वकालत की और चंडीगढ़ में पंजाब कृषि विभाग से सेवानिवृत्त हुए। मौजूदा समय में शकुंतला देवी अपने बेटे अरुणजीत के साथ प्रीत नगर में रह रही हैं।
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