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डेंगू से कैंट के कारोबारी की मौत
अंबाला
Updated Tue, 19 Nov 2013 04:49 PM IST
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अंबाला छावनी के पालम विहार डी में डेंगू से एक कारोबारी की मौत हो गई। मरीज को अंबाला कैंट के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत देखते हुए जीएमसीएच सेक्टर 32 स्थित अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन वहां भी हालत बिगड़ने पर परिजनों ने मरीज को वहीं एक निजी अस्पताल ले गए, जहां मरीज की मौत हो गई।
अंबाला में डेंगू से मौत के पहले भी मामले आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसे नकार रहा है। जिले में अब तक डेंगू के करीब 25 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि निजी चिकित्सकों के अनुसार ऐसे केसों की भरमार है।
जानकारी के अनुसार कैंट के पालम विहार डी के रहने वाले गोविंद राम की कुछ दिनों पहले अचानक तबीयत खराब हो गई। एक स्थानीय चिकित्सक से इलाज कराया, जिसके बाद मरीज का बुखार तो उतर गया, लेकिन इसके बाद भी हालत बिगड़ती चली गई।
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इसके बाद मरीज को कैंट के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। यहां पर चिकित्सक ने मरीज के मेडिकल टेस्ट किए, जिसमें कार्ड टेस्ट के जरिये पता चला कि मरीज की प्लेटलेट्स 22000 के करीब हैं। निजी चिकित्सक ने भी डेंगू की आशंका जताते हुए मरीज को जीएमसीएच सेक्टर 32 चंडीगढ़ रेफर कर दिया।
गोविंदराम के बेटे यश ने बताया कि इस जीएमसीएच में पहुंचने के बाद और परेशानियां शुरू हो गई, जबकि काफी देर तक इलाज के लिए इंतजार करते रहे। शाम को चिकित्सकों ने कहा कि यदि परिजन चाहे, तो मरीज को निजी अस्पताल ले जा सकते हैं।
इसके बाद वे वहीं एक निजी अस्पताल ले गए, जहां मरीज को सीधे आईसीयू में दाखिल कर लिया गया। लेकिन यहां पर इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। यश का कहना है कि डेंगू के कारण ही उनके पिता की मौत हुई है।
सिर्फ इंतजार कर रहा है स्वास्थ्य विभाग
जिला स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने में कोई तेजी नहीं दिखाई है। अभी तक न तो फॉगिंग कार्रवाई की गई है, न ही निजी चिकित्सकों के साथ कोई बातचीत हुई है।
हां, स्वास्थ्य विभाग यह दावा तो कर रहा है कि निजी अस्पतालों व लेबोरेटरी संचालकों को निर्देश दिए हैं कि यदि डेंगू संदिग्ध मरीज आता है, तो सिविल अस्पताल शहर रेफर करें, जहां जांच व इलाज होगा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी कोई व्यवस्था तक नहीं बनाई, जिससे मरीजाें को राहत मिल सके।
लोगों में डेंगू का भय
इन दिनों जिस तरह से डेंगू के केस सामने आ रहे हैं, उससे लोगों में दहशत फैल रही है। निजी चिकित्सकों की मानें, तो जो मरीज उनके पास आ रहे हैं, उनकी प्लेटलेट्स काउंट काफी कम आती हैं। ऐसे में डेंगू को ध्यान में रखते हुए इलाज शुरू किया जाता है।
सिविल अस्पताल मरीज जाना नहीं चाहते और निजी अस्पताल में ही इलाज को प्राथमिकता देते हैं। इसी तरह कालोनियों में साफ सफाई न होने व गंदा पानी भरा होने के कारण लोगों में भय है कि कहीं डेंगू न हो जाए।
‘डेंगू के केसों को लेकर प्रशासन सतर्क है और इलाज की सारी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। डेंगू के कारणों के प्रति सतर्क किया जा रहा है, जबकि लोगों को भी सतर्क रहना होगा।’
- केवल बिंद्रा, प्रशासनिक प्रवक्ता
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अंबाला में डेंगू से मौत के पहले भी मामले आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसे नकार रहा है। जिले में अब तक डेंगू के करीब 25 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि निजी चिकित्सकों के अनुसार ऐसे केसों की भरमार है।
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जानकारी के अनुसार कैंट के पालम विहार डी के रहने वाले गोविंद राम की कुछ दिनों पहले अचानक तबीयत खराब हो गई। एक स्थानीय चिकित्सक से इलाज कराया, जिसके बाद मरीज का बुखार तो उतर गया, लेकिन इसके बाद भी हालत बिगड़ती चली गई।
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इसके बाद मरीज को कैंट के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। यहां पर चिकित्सक ने मरीज के मेडिकल टेस्ट किए, जिसमें कार्ड टेस्ट के जरिये पता चला कि मरीज की प्लेटलेट्स 22000 के करीब हैं। निजी चिकित्सक ने भी डेंगू की आशंका जताते हुए मरीज को जीएमसीएच सेक्टर 32 चंडीगढ़ रेफर कर दिया।
गोविंदराम के बेटे यश ने बताया कि इस जीएमसीएच में पहुंचने के बाद और परेशानियां शुरू हो गई, जबकि काफी देर तक इलाज के लिए इंतजार करते रहे। शाम को चिकित्सकों ने कहा कि यदि परिजन चाहे, तो मरीज को निजी अस्पताल ले जा सकते हैं।
इसके बाद वे वहीं एक निजी अस्पताल ले गए, जहां मरीज को सीधे आईसीयू में दाखिल कर लिया गया। लेकिन यहां पर इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। यश का कहना है कि डेंगू के कारण ही उनके पिता की मौत हुई है।
सिर्फ इंतजार कर रहा है स्वास्थ्य विभाग
जिला स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने में कोई तेजी नहीं दिखाई है। अभी तक न तो फॉगिंग कार्रवाई की गई है, न ही निजी चिकित्सकों के साथ कोई बातचीत हुई है।
हां, स्वास्थ्य विभाग यह दावा तो कर रहा है कि निजी अस्पतालों व लेबोरेटरी संचालकों को निर्देश दिए हैं कि यदि डेंगू संदिग्ध मरीज आता है, तो सिविल अस्पताल शहर रेफर करें, जहां जांच व इलाज होगा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी कोई व्यवस्था तक नहीं बनाई, जिससे मरीजाें को राहत मिल सके।
लोगों में डेंगू का भय
इन दिनों जिस तरह से डेंगू के केस सामने आ रहे हैं, उससे लोगों में दहशत फैल रही है। निजी चिकित्सकों की मानें, तो जो मरीज उनके पास आ रहे हैं, उनकी प्लेटलेट्स काउंट काफी कम आती हैं। ऐसे में डेंगू को ध्यान में रखते हुए इलाज शुरू किया जाता है।
सिविल अस्पताल मरीज जाना नहीं चाहते और निजी अस्पताल में ही इलाज को प्राथमिकता देते हैं। इसी तरह कालोनियों में साफ सफाई न होने व गंदा पानी भरा होने के कारण लोगों में भय है कि कहीं डेंगू न हो जाए।
‘डेंगू के केसों को लेकर प्रशासन सतर्क है और इलाज की सारी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। डेंगू के कारणों के प्रति सतर्क किया जा रहा है, जबकि लोगों को भी सतर्क रहना होगा।’
- केवल बिंद्रा, प्रशासनिक प्रवक्ता