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डेयरियों का कटेगा बिजली-पानी कनेक्शन

Mon, 14 Dec 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला Updated Mon, 14 Dec 2015 12:51 AM IST
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dairyies water & electricity connection will be cut in ambala

बारह बरस बीत गए आज तक अंबाला प्रशासन अंबाला सिटी और अंबाला कैंट दोनों शहरों को गोबर की समस्या से निजात नहीं दिलवा पाई है। लगातार रिहायशी इलाकों में डेयरियां खुलती जा रही है, वहां जानवरों का गोबर कालोनियों व मोहल्लों की नालियों में ही बहाया जा रहा है। जिससे अधिकतर नाले व नालियां जाम रहते हैं।

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इसी समस्या से निजात के लिए वर्ष 2003 में अंबाला प्रशासन ने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस परियोजना की जिम्मेदारी तत्कालीन नगर परिषद (अब म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला) के जिम्मे सौंपी गई थी। लेकिन इस परियोजना को बरसों गुजरने पर भी आज तक न तो डेयरियां शिफ्ट हुई और न ही आज तक लोगों की समस्या का समाधान हुआ। उल्टा ये समस्या बढ़ती चली गई। 

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अब जब इसी वजह से वार्डों की कालोनियों और मोहल्लों में गंदगी की समस्या ज्यादा बढने लगी है, तो पार्षदों ने भी हल्ला मचाना शुरू कर दिया है, जबकि वे लोग जिनकी कालोनियों व मोहल्लों में ये डेयरियां मौजूद है, वहां भी लोग गंदगी, मक्खी और बदबू से बहुत ज्यादा दुखी है। इस तमाम व्यवस्था में अंबाला प्रशासन और एमसीए अफसर बेबस हो चुके हैं।

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इसी बेबसी के चलते एमसीए अफसरों ने अब इन डेयरी संचालकों के खिलाफ सख्ती करने का मन बनाया है। एमसीए सदन की बैठक में इस मसले पर भी पार्षदों और अफसरों में चरचा हुई और ये फैसला लिया गया कि अब जो भी डेयरी संचालक प्लाट आबंटित होने के बावजूद शहर से बाहर नहीं जाएंगें, उनके बिजली व पानी के कनैक्शन काट लिए जाएंगें।


ये थी परियोजना

दरअसल, ये परियोजना चौटाला समय के कार्यकाल में तैयार की गई थी। वर्ष 2003 में डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट का खाका तैयार किया गया था। मकसद था रिहायशी इलाकों में डेवलप हो रही डेयरियों को शहर से बाहर करना, ताकि नालियों में जमने वाले गोबर, गंदगी, बदबू, मक्खियों की समस्या से निजात मिल सके। नालियों में गोबर की वजह से नाले व  नालियां जाम हो जाती है और बरसातों में यही गोबर जलभराव का कारण बनता है। इसलिए ये परियोजना तैयार की गई थी।



अंबाला सिटी में यू लटकी परियोजना

पहले इस प्रोजेक्ट की शुरूआत अंबाला सिटी से की गई थी। वर्ष 2001 में किए गए डेयरियों के सर्वे के मुताबिक सिटी में उस वक्त 237 डेयरियां थी। इसलिए वर्ष 2003 में इन्ही 237 डेयरियों को सिटी से बाहर ले जाने की योजना तैयार की गई।


अंबाला सिटी से इन डेयरियों को बाहर शिफ्ट करने के लिए एमसीए ने दो गांव खतौली में करीबन 17 एकड़ और गांव कांवला में करीबन 9 एकड़ जमीन खरीदी थी। खतौली और कांवला में 237 डेयरी वालों के लिए विभिन्न साइज के प्लाट काटे गए और फिर वर्ष 2004 में सिटी एमसीए कार्यालय में पार्षदों की मौजूदगी में प्लाटों का ड्रा किया गया। 

गांव खतौली में डेयरी वालों के लिए 148 प्लाट काटे गए, जबकि कांवला में 69 प्लाट कटे। आज स्थिति यह है कि खतौली में 103 डेयरी संचालकों ने शिफ्टिंग का दावा किया है, लेकिन वर्तमान में इनमें से अधिकतर की डेयरियां शहर के रिहायशी इलाकों में आज भी चल रही है। जबकि कुछेक डेयरी वाले तो खतौली में शिफ्ट हो गए। जबकि 45 प्लाट तो अभी तक खाली ही पड़े हैं।

इसी तरह  गांव  कांवला में 69 में से केवल 20 ही डेयरी संचालकों ने शिफ्ट करने का दावा किया है, लेकिन इनमें से भी अधिकतर की डेयरियां वर्तमान में सिटी में चल रही है। कुल मिलाकर आज तक न तो खतौली में और न ही कांवला में डेयरियां शिफ्ट हुई है।



अंबाला कैंट में यू अटकी परियोजना

सिटी की तरह अंबाला कैंट में भी वर्ष 2001 में किए गए डेयरियों के सर्वे के मुताबिक लगभग 200 डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए उगाड़ा-बाड़ा गांव में जमीन खरीदी गई। आज स्टेट्स ये है कि इस जमीन पर लगातार अवैध कब्जे होते जा रहे हैं। एमसीए अफसर सो रहे हैं, आज तक यहां कोई प्लाटिंग नहीं हुई है और न ही डेयरी वालों को यहां से बाहर भेजने की एक्सरसाइज शुरू हुई है। यूं कहें तो कैंट में डेयरी शिफ्टिंग परियोजना अपने शुरूआत दौर में ही लड़खड़ाई पड़ी है।



इस तरह फेल हुए प्रशासन के प्रयास

वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2015 तक कई डीसी अंबाला में आए और चले गए। सभी डीसी महोदय ने डेयरी शिफ्टिंग पर सख्ती दिखाने का प्रयास किया। लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। काफी बार तो इन डेयरियों के चालान किए गए। डेयरी  संचालक चालान भरकर फिर अपनी दिनचर्या में लग जाते हैं। उसके बाद अंबाला प्रशासन ने डेयरी संचालकों को उन्हे आबंटित किए गए प्लाटों को जब्त करने की धमकी दी गई। वो भी व्यर्थ साबित हुई। बाद में प्रशासन ने डेयरी संचालकों के खिलाफ केस दर्ज करवाने की धमकी दी, वो भी बेअसर रही। अब एमसीए सदन में एमसीए कमिश्नर और मेयर ने सभी पार्षदों की सहमति से डेयरी शिफ्ट न करने वाले डेयरी संचालकों के बिजली और पानी का कनेक्शन काटने का फैसला किया है।



रिहायशी इलाकों में डेयरियों की समस्या से लोग  बहुत ज्यादा परेशान है। बलदेव नगर में डेयरियों की वजह से अंबाला ड्रेन जाम पड़ी है। सारा गोबर नाले में बहाया जा रहा है, जिस वजह से नाला जाम पड़ा है। कई रसूखदार लोगों के श्रेय पर ही ये डेयरियां प्लाट आबंटित होने के बावजूद रिहायशी इलाकों में चल रही है। इसलिए प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी।

-सोनिया रानी, पार्षद, अंबाला सिटी


अंबाला कैंट में आज तक डेयरी शिफ्टिंग के लिए खरीदी गई जमीन यूं ही बेकार पड़ी है। उस पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि एमसीए अफसर सो रहे हैं और जमीन खाली पड़ी है। कालोनियों व मोहल्लों में डेयरियों की समस्या से लोग बहुत दुखी है। प्रशासन को अब  सख्ती दिखानी होगी।

-सुरेंद्र बिंद्रा डब्बू, पार्षद, अंबाला कैंट



एमसीए सदन में फैसला लिया गया है कि अब डेयरी संचालकों के बिजली व पानी के कनेक्शन काटने होंगे। डेयरी संचालक खुद ही अपनी डेयरियां शिफ्ट कर लें, वरना इस बार एमसीए पूरी सख्ती करेगा। कैंट में भी जमीन का स्टेट्स चैक करवाकर वहां परियोजना को जल्द आगे बढ़ाया जाएगा। कोशिश यही है कि जल्द ही ट्विनसिटी को गोबर की समस्या से निजात दिलवाई जाए।

-रमेश लाल मल, मेयर, एमसीए

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