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मरीजों पर भारी नोटबंदी, अस्पताल ने पुराने नोट लेने से किया इनकार
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:38 AM IST
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अंबाला कैंट/सिटी। नोटबंदी के बाद अब मरीज व उनके तीमारदार परेशान हो रहे हैं। पुरानी करेंसी को अस्पताल संचालक ले नहीं रहे हैं, जबकि नई करेंसी पूरी तरह से मिल नहीं रही और सौ-सौ अथवा इससे नीचे के नोटों की कमी है। हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग भी इन पर शिकंजा कस नहीं रहा है। जिला प्रशासन भी इन अस्पतालों को कोई सर्कुलर ही जारी नहीं कर रहा है।
मरीज को इनकार, दूसरी जगह करनी पड़ी मिन्नतें
कैंट के महेश नगर स्थित एक बच्चों के अस्पताल में विनोद कुमार अपनी बेटी की जांच कराने के लिए पहुंचे। यहां पर जब डाक्टर को पांच सौ रुपये का नोट थमाया गया तो उसने यह लेने से ही इनकार कर दिया। पिता ने डाक्टर की काफी मिन्नतें कीं, लेकिन डाक्टर नोटबंदी का हवाला देते हुए सौ रुपये या फिर नई करेंसी देने को कहा। इसी तरह एक अन्य अस्पताल में भी मरीज को इसलिए वापस भेजने की तैयारी कर ली, क्योंकि तीमारदारों ने पुरानी करेंसी अस्पताल को दी। इसके बाद मामला सीएमओ तक पहुंच, जिनके हस्तक्षेप के बाद मरीज का इलाज अस्पताल ने किया। उधर, गांव तेजा मोहड़ी के रहने वाले रामरतन काफी बीमार हैं और उनका कैंट स्थित बैंक में अकाउंट है। परिवार के सदस्य उनको बैंक लाए, जबकि बैंक स्टाफ ने उनकी हालत देखते हुए तुरंत ही नकद निकासी दे दी।
मानवीय आधार पर तो लें पुरानी करेंसी
कैंट के रहने वाले आनंद मोहन शुक्ला, स्नेहपाल धीमान, पंकज मल्होत्रा, दिनेश शर्मा, सौरभ वालिया, लक्ष्यवीर, पुष्कर का कहना है कि निजी चिकित्सकों व लैब संचालकों को कम से कम मानवीय आधार पर तो पुरानी करेंसी स्वीकार करनी चाहिए। सरकार भी कह चुकी है कि अस्पतालों और लैब में पुरानी करेंसी ली जा सकती है, जबकि डाक्टरों को चाहिए कि मरीजों की दिक्कत व मार्केट की स्थिति को देखते हुए कुछ तो एडजस्ट करें। वैसे भी तीस दिसंबर तक पुरानी करेंसी बैंकों में जमा करवाई जा सकती है।
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जिला प्रशासन करे निर्देश जारी
सीएमओ डॉ. विनोद गुप्ता ने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को इस समय जिला प्रशासन की ओर से ही निर्देश जारी किए जा सकते हैं। वैसे भी सरकार ने निजी अस्पतालों व लैब में पुरानी करेंसी ली जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अंडर यह नहीं आएगा, जबकि डीसी अंबाला इस बारे में सर्कुलर जारी कर सकते हैं।
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पैसे खपाने के लिए पॉलिसी बाजार की मांग
नोटबंदी को लेकर जहां आम जनता लाइनों में भटक रही है। वहीं बीमा पॉलिसी को लेकर भी एक दम मांग बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि इन दिनों नोटों को खपाने के लिए लोग बीमा पालिसी का सहारा ले रहे हैं और अपने घरों के सदस्यों के नाम पर पॉलिसियां करवाने में जुटे हुए हैं, जबकि बीमा एजेंट की ये मौका भुनाने के लिए लोगों के संपर्क कर उनके घरों से ही बीमा पॉलिसी की कंडीशन को पूरा कर रहे हैं। जो खर्च टैक्स निशुल्क हैं, उनमें पैसा खपाया जाए। इससे बैंकों में पैसा डालने की बजाय उसे बीमा पॉलिसी में इनवेस्ट किए जाए।
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रेवड़ी कारोबार बुरी तरह से प्रभावित
दरअसल, इस नोटबंदी का असर रेवड़ी कारोबार पर पड़ा है। जहां पहले इस मौसम में मूंगफली, रेवड़ी, गज्जक आदि की मांग आनी शुरू हो जाती थी। लेकिन अभी तक कारोबार ने गति नहीं पकड़ी है। गज्जक कारोबारी ओम प्रकाश शर्मा का कहना है कि मौसम में बदलाव को देखते हुए गज्जक बनाने वाले व्यापारियों ने पहले ही सामान ही खरीद लिया था। उन्हें अब गज्जक की मांग नहीं मिल रही है। यदि मार्केट में खुले पैसों की शार्टेज खत्म हो जाएगी तो उनका कारोबार शुरू होने की उम्मीद है।
डाक विभाग ने सब्जी मंडी में बांटे नोट
बाजारों में चल रही छोटे नोटों की कमी को देखते हुए डाक विभाग ने करेंसी एक्सचेंज भी चलाया, ताकि बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंचने वाली जनता को राहत मिल सके। इस दौरान डाक विभाग की ओर से शुरू की गई करेंसी एक्सचेंज मोबाइल वैन वीरवार को अंबाला कैंट सनातन धर्म मंदिर के निकट सब्जीमंडी में पहुंची। जहां बाजारों में पहुंची जनता के एक हजार रुपये के नोट बदले गए और उन्हें दस के नोट वितरित किए गए। पोस्ट आफिसर जेके गुलाटी ने बताया कि बाजारों में करीबन आठ लाख रुपये के एक्सचेंज किए गए थे। वहीं रोजाना ये फैन ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर नोट एक्सचेेंज करेंगी।
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नोट एक्सचेंज को लेकर दिक्कत
वीरवार को भी बैंकों में नोट एक्सचेंज को लेकर दिक्कत रही। कुछ बैंकों ने नोटिस लगा दिया कि नोट एक्सचेंज नहीं किए जाएंगे। बैंक अधिकारियों का कहना है कि नए नोट सीमित मिले हैं, जबकि छोटे नोट भी पर्याप्त नहीं मिल रहे हैं। इसी कारण से नई करेंसी को एक्सचेंज नहीं किया गया है।
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मरीज को इनकार, दूसरी जगह करनी पड़ी मिन्नतें
कैंट के महेश नगर स्थित एक बच्चों के अस्पताल में विनोद कुमार अपनी बेटी की जांच कराने के लिए पहुंचे। यहां पर जब डाक्टर को पांच सौ रुपये का नोट थमाया गया तो उसने यह लेने से ही इनकार कर दिया। पिता ने डाक्टर की काफी मिन्नतें कीं, लेकिन डाक्टर नोटबंदी का हवाला देते हुए सौ रुपये या फिर नई करेंसी देने को कहा। इसी तरह एक अन्य अस्पताल में भी मरीज को इसलिए वापस भेजने की तैयारी कर ली, क्योंकि तीमारदारों ने पुरानी करेंसी अस्पताल को दी। इसके बाद मामला सीएमओ तक पहुंच, जिनके हस्तक्षेप के बाद मरीज का इलाज अस्पताल ने किया। उधर, गांव तेजा मोहड़ी के रहने वाले रामरतन काफी बीमार हैं और उनका कैंट स्थित बैंक में अकाउंट है। परिवार के सदस्य उनको बैंक लाए, जबकि बैंक स्टाफ ने उनकी हालत देखते हुए तुरंत ही नकद निकासी दे दी।
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मानवीय आधार पर तो लें पुरानी करेंसी
कैंट के रहने वाले आनंद मोहन शुक्ला, स्नेहपाल धीमान, पंकज मल्होत्रा, दिनेश शर्मा, सौरभ वालिया, लक्ष्यवीर, पुष्कर का कहना है कि निजी चिकित्सकों व लैब संचालकों को कम से कम मानवीय आधार पर तो पुरानी करेंसी स्वीकार करनी चाहिए। सरकार भी कह चुकी है कि अस्पतालों और लैब में पुरानी करेंसी ली जा सकती है, जबकि डाक्टरों को चाहिए कि मरीजों की दिक्कत व मार्केट की स्थिति को देखते हुए कुछ तो एडजस्ट करें। वैसे भी तीस दिसंबर तक पुरानी करेंसी बैंकों में जमा करवाई जा सकती है।
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जिला प्रशासन करे निर्देश जारी
सीएमओ डॉ. विनोद गुप्ता ने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को इस समय जिला प्रशासन की ओर से ही निर्देश जारी किए जा सकते हैं। वैसे भी सरकार ने निजी अस्पतालों व लैब में पुरानी करेंसी ली जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अंडर यह नहीं आएगा, जबकि डीसी अंबाला इस बारे में सर्कुलर जारी कर सकते हैं।
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पैसे खपाने के लिए पॉलिसी बाजार की मांग
नोटबंदी को लेकर जहां आम जनता लाइनों में भटक रही है। वहीं बीमा पॉलिसी को लेकर भी एक दम मांग बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि इन दिनों नोटों को खपाने के लिए लोग बीमा पालिसी का सहारा ले रहे हैं और अपने घरों के सदस्यों के नाम पर पॉलिसियां करवाने में जुटे हुए हैं, जबकि बीमा एजेंट की ये मौका भुनाने के लिए लोगों के संपर्क कर उनके घरों से ही बीमा पॉलिसी की कंडीशन को पूरा कर रहे हैं। जो खर्च टैक्स निशुल्क हैं, उनमें पैसा खपाया जाए। इससे बैंकों में पैसा डालने की बजाय उसे बीमा पॉलिसी में इनवेस्ट किए जाए।
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रेवड़ी कारोबार बुरी तरह से प्रभावित
दरअसल, इस नोटबंदी का असर रेवड़ी कारोबार पर पड़ा है। जहां पहले इस मौसम में मूंगफली, रेवड़ी, गज्जक आदि की मांग आनी शुरू हो जाती थी। लेकिन अभी तक कारोबार ने गति नहीं पकड़ी है। गज्जक कारोबारी ओम प्रकाश शर्मा का कहना है कि मौसम में बदलाव को देखते हुए गज्जक बनाने वाले व्यापारियों ने पहले ही सामान ही खरीद लिया था। उन्हें अब गज्जक की मांग नहीं मिल रही है। यदि मार्केट में खुले पैसों की शार्टेज खत्म हो जाएगी तो उनका कारोबार शुरू होने की उम्मीद है।
डाक विभाग ने सब्जी मंडी में बांटे नोट
बाजारों में चल रही छोटे नोटों की कमी को देखते हुए डाक विभाग ने करेंसी एक्सचेंज भी चलाया, ताकि बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंचने वाली जनता को राहत मिल सके। इस दौरान डाक विभाग की ओर से शुरू की गई करेंसी एक्सचेंज मोबाइल वैन वीरवार को अंबाला कैंट सनातन धर्म मंदिर के निकट सब्जीमंडी में पहुंची। जहां बाजारों में पहुंची जनता के एक हजार रुपये के नोट बदले गए और उन्हें दस के नोट वितरित किए गए। पोस्ट आफिसर जेके गुलाटी ने बताया कि बाजारों में करीबन आठ लाख रुपये के एक्सचेंज किए गए थे। वहीं रोजाना ये फैन ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर नोट एक्सचेेंज करेंगी।
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नोट एक्सचेंज को लेकर दिक्कत
वीरवार को भी बैंकों में नोट एक्सचेंज को लेकर दिक्कत रही। कुछ बैंकों ने नोटिस लगा दिया कि नोट एक्सचेंज नहीं किए जाएंगे। बैंक अधिकारियों का कहना है कि नए नोट सीमित मिले हैं, जबकि छोटे नोट भी पर्याप्त नहीं मिल रहे हैं। इसी कारण से नई करेंसी को एक्सचेंज नहीं किया गया है।