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हेमकुंड साहिब जा रहे दो चचेरे भाइयों की हादसे में मौत
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नारायणढ़ (अंबाला)। नारायणगढ़-कालाअंब रोड (एनएच-72) पर लोटों चौक के पास सुबह करीब साढ़े सात बजे हिमालयन कॉलेज की बस ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मार दी, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। आमने-सामने हुए इस हादसे के बाद दोनों को नारायणगढ़ सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनों मृतक चचेरे भाई थे और पटियाला जिला के गांव कपुरी के रहने वाली थे। मृतकों की पहचान गुरदीप सिंह (22) और गुरमीत सिंह (25) के तौर पर हुई है। दोनों बाइक पर श्री हेमकुंड साहिब दर्शनों के लिए जा रहे थे। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद बस चालक बस को मौका पर छोड़ कर फरार हो गया। मामले में नारायणगढ़ थाने के जांच अधिकारी अमर सिंह ने बताया कि बस को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। चालक कुलदीप सिंह निवासी खैरी थाना कालाअंब (हिमाचल प्रदेश) के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। दोपहर बाद पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के सुपुर्द किए गए।
हर वर्ष जाते थे श्री हेमकुंड साहिब
चचेरे भाई गुरदीप सिंह और गुरमीत सिंह दोनों अपने अन्य दोस्तों के साथ हर वर्ष श्री हेमकुंड साहिब के दर्शनों के लिए जाते थे। इस बार वीरवार सुबह ही दोनों अपने अन्य साथियों के साथ चार बाइकों पर रवाना हुए थे। गुरमीत सिंह अविवाहित था जबकि गुरदीप सिंह की अभी चार माह पहले ही शादी हुई थी। दोनों के साथ जा रहे उनके दोस्तों ने बताया कि तीन बाइक पर दल के अन्य सदस्य आगे थे जबकि गुरमीत व गुरदीप पीछे थे। वह करीब दो किमी. आगे निकल गए थे। दोनों के नहीं आने पर वह सड़क पर ही रुक गए। फिर किसी वाहन चालक ने उन्हें नारायणगढ़ में हादसे की जानकारी दी, जिसके बाद वह वापस लौटे तो देखा कि हादसे में दोनों ने दम तोड़ दिया था।
गुरदीप सिंह के कंधों पर था घर का बोझ
गुरदीप सिंह अपने माता का इकलौता पुत्र था और खेती-बाड़ी करता था। उसके पिता की मौत के बाद घर की देखरेख उसके कंधों पर थी। अभी अप्रैल में ही उसकी शादी हुई हुई थी। दोनों चचेरे भाइयों की मौत से गांव में मातम छा गया।
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हर वर्ष जाते थे श्री हेमकुंड साहिब
चचेरे भाई गुरदीप सिंह और गुरमीत सिंह दोनों अपने अन्य दोस्तों के साथ हर वर्ष श्री हेमकुंड साहिब के दर्शनों के लिए जाते थे। इस बार वीरवार सुबह ही दोनों अपने अन्य साथियों के साथ चार बाइकों पर रवाना हुए थे। गुरमीत सिंह अविवाहित था जबकि गुरदीप सिंह की अभी चार माह पहले ही शादी हुई थी। दोनों के साथ जा रहे उनके दोस्तों ने बताया कि तीन बाइक पर दल के अन्य सदस्य आगे थे जबकि गुरमीत व गुरदीप पीछे थे। वह करीब दो किमी. आगे निकल गए थे। दोनों के नहीं आने पर वह सड़क पर ही रुक गए। फिर किसी वाहन चालक ने उन्हें नारायणगढ़ में हादसे की जानकारी दी, जिसके बाद वह वापस लौटे तो देखा कि हादसे में दोनों ने दम तोड़ दिया था।
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गुरदीप सिंह के कंधों पर था घर का बोझ
गुरदीप सिंह अपने माता का इकलौता पुत्र था और खेती-बाड़ी करता था। उसके पिता की मौत के बाद घर की देखरेख उसके कंधों पर थी। अभी अप्रैल में ही उसकी शादी हुई हुई थी। दोनों चचेरे भाइयों की मौत से गांव में मातम छा गया।
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