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Ambala News: सेना की जमीन पर जगह लेने के फेर में उलझा अटल कैंसर केयर केंद्र की धर्मशाला का निर्माण
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अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र अस्पताल में दूसरे राज्यों व शहरों से आने वाली मरीजों व तीमारदारों की महत्वाकांक्षी धर्मशाला की सुविधा ढाई साल बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। विभाग के अधिकारियों की भेंट चढ़ी इस सुविधा का बैठकों में तो हर साल व छह माह बाद जिक्र होता है लेकिन अभी तक इसे बनाने के लिए विभाग जगह ही चिन्हित नहीं कर पाया है। अस्पताल के ठीक पीछे पोस्टमार्टम रूम के साथ सेना की एक यूनिट की जगह पर बनाने का विचार चल रहा है। कई बार विभाग के आलाधिकारी सहित सेना के अधिकारी भी इस जगह को लेकर निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन हर बार मुख्यालय स्तर पर ही निर्णय लिए जाने की बात बोलकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऐसे में दूसरे राज्यों व शहरों से आकर उपचार करवाने वालों के लिए अंबाला आकर कई-कई दिन तक उपचार करवाना मुश्किल हो जाता है।
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धर्मशालाओं व निजी होटलों में रहकर तीमारदार गंवा रहे जमापूंजी
अटल कैंसर केयर केंद्र में हरियाणा के अलावा राजस्थान, हिमाचल व पंजाब, बिहार तक से कैंसर के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में मरीज तो अस्पताल में आकर उपचार शुरू करवा लेते हैं लेकिन उनके तीमारदारों के लिए इतने समय तक रहना मुश्किल हो जाता है। कुछ मरीजों को दाखिल न करवाकर केवल कीमो आदि से उपचार चलता है। ऐसे में उनके पास बिना उपचार वापस लौटने व धर्मशाला और निजी होटलों में रहने के बावजूद कोई चारा नहीं होता। यहां तक कि उपचार में करीब एक से दो माह तक का समय भी लग जाता है। कैंसर मरीजों के तीमारदारों की परेशानी को देखते हुए अस्पताल या उसके आसपास निशुल्क धर्मशाला के लिए बिल्डिंग तैयार करने की घोषणा हुई थी।
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12 से 15 घंटे तक चलने वाले हो चुके है ऑपरेशन
कैंट के अटल कैंसर केयर केंद्र में कान, नाक, मुंह के अलावा स्पाइन आदि के बड़े-बड़े व जटिल ऑपरेशन किए जाते हैं जो केवल चंडीगढ़ पीजीआई या फिर अंबाला के इस अस्पताल में हो रहे हैं। कई ऑपरेशन तो 12 से लेकर 15 घंटे तक भी चले हैं। ऐसे में मरीजों को चंडीगढ़ आदि दूसरे शहरों के चक्कर से भी छुटकारा मिलता है। इसलिए अंबाला में कैंसर मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। रोजाना अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या 500 तक पहुंच गई है।
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अटल कैंसर केयर केंद्र की धर्मशाला बनाई जानी है। सेना की जमीन को लेकर भी विचार चल रहा है। अभी तक वो फाइनल नहीं हो पाया है। जैसे ही अनुमति मिलती है तो धर्मशाला बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
डॉ. जतिंद्र चौहान, आरएमओ अंबाला कैंट नागरिक अस्पताल
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कैंसर मरीजों व तीमारदारों के लिए धर्मशाला का निर्माण किया जाएगा। जगह फाइनल होते ही यह जल्द से जल्द बनाई जाएगी। मुख्यालय स्तर पर इसका निर्णय लिया जाएगा।
डॉॅ. राकेश सहल, सिविल सर्जन अंबाला
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धर्मशालाओं व निजी होटलों में रहकर तीमारदार गंवा रहे जमापूंजी
अटल कैंसर केयर केंद्र में हरियाणा के अलावा राजस्थान, हिमाचल व पंजाब, बिहार तक से कैंसर के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में मरीज तो अस्पताल में आकर उपचार शुरू करवा लेते हैं लेकिन उनके तीमारदारों के लिए इतने समय तक रहना मुश्किल हो जाता है। कुछ मरीजों को दाखिल न करवाकर केवल कीमो आदि से उपचार चलता है। ऐसे में उनके पास बिना उपचार वापस लौटने व धर्मशाला और निजी होटलों में रहने के बावजूद कोई चारा नहीं होता। यहां तक कि उपचार में करीब एक से दो माह तक का समय भी लग जाता है। कैंसर मरीजों के तीमारदारों की परेशानी को देखते हुए अस्पताल या उसके आसपास निशुल्क धर्मशाला के लिए बिल्डिंग तैयार करने की घोषणा हुई थी।
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12 से 15 घंटे तक चलने वाले हो चुके है ऑपरेशन
कैंट के अटल कैंसर केयर केंद्र में कान, नाक, मुंह के अलावा स्पाइन आदि के बड़े-बड़े व जटिल ऑपरेशन किए जाते हैं जो केवल चंडीगढ़ पीजीआई या फिर अंबाला के इस अस्पताल में हो रहे हैं। कई ऑपरेशन तो 12 से लेकर 15 घंटे तक भी चले हैं। ऐसे में मरीजों को चंडीगढ़ आदि दूसरे शहरों के चक्कर से भी छुटकारा मिलता है। इसलिए अंबाला में कैंसर मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। रोजाना अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या 500 तक पहुंच गई है।
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अटल कैंसर केयर केंद्र की धर्मशाला बनाई जानी है। सेना की जमीन को लेकर भी विचार चल रहा है। अभी तक वो फाइनल नहीं हो पाया है। जैसे ही अनुमति मिलती है तो धर्मशाला बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
डॉ. जतिंद्र चौहान, आरएमओ अंबाला कैंट नागरिक अस्पताल
कैंसर मरीजों व तीमारदारों के लिए धर्मशाला का निर्माण किया जाएगा। जगह फाइनल होते ही यह जल्द से जल्द बनाई जाएगी। मुख्यालय स्तर पर इसका निर्णय लिया जाएगा।
डॉॅ. राकेश सहल, सिविल सर्जन अंबाला