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Ambala News: कांग्रेस ने मेयर पद पर प्रत्याशी उतारी, भाजपा का दिल्ली में मंथन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 02:13 AM IST
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Congress fields mayoral candidate, BJP brainstorms in Delhi
सिटी के कांग्रेस कार्यालय में महिला आरक्षण बिल पर जानकारी देते जिलाध्यक्ष पवन अग्रवाल मध्य में 
- दिल्ली में प्रदेश के आलाकमान के साथ हुई चर्चा, मेयर सहित अन्य प्रत्याशियों के नाम कर सकती है घोषित
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के मेयर पद पर प्रत्याशी मैदान में उतारने के बाद भाजपा ने भी चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। रविवार को भाजपा आलाकमान ने दिल्ली में प्रत्याशियों के चयन के लिए बैठक बुला ली। इस बैठक में सीएम नायब सैनी, पूर्व राज्य मंत्री असीम गोयल व भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमुख रूप से शामिल होने गए हैं। दावेदारों की कुंडली पर मंथन के बाद भाजपा सोमवार या मंगलवार तक अपने प्रत्याशियों के नामों को उजागर कर सकती है।
उम्मीद है कि पहली सूची में मेयर सहित 10 वार्डों में प्रत्याशियों के नाम की घोषणा पहले हो। इसके बाद दूसरी सूची में अन्य प्रत्याशियाें के नाम पर मोहर लगे। ऐसे में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा मेयर पद के लिए दिखाई दे रही है। भाजपा में आठ दावेदारों ने मेयर पद पर ताल ठोकी है। हालांकि, प्रदेश संगठन मंत्री की बैठक में दावेदारों को स्पष्ट कर दिया है कि टिकट में नाम घोषित होते ही अन्य दावेदारों को पार्टी प्रत्याशी की मदद करनी होगी।
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महिला आरक्षण बिल पर हो रहा भ्रामक प्रचार : पवन अग्रवाल
महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद से भाजपा लगातार इस मुद्दे पर विपक्ष को घेर रही है। नगर निगम चुनाव के प्रचार में भी भाजपा इस मुद्दे को भुना सकती है। इसी को लेकर रविवार को जिला कांग्रेस कमेटी शहर कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता बुलाई गई। इसमें कांग्रेस सिटी से जिलाध्यक्ष पवन अग्रवाल ने महिला आरक्षण बिल पर स्पष्टता दी। उन्हाेंने कहा कि भाजपा द्वारा यह गलत और भ्रामक प्रचार किया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी महिला विरोधी है और उसने महिला आरक्षण का विरोध किया है। सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक संसद में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, और कांग्रेस पार्टी शुरू से ही इसके पक्ष में रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि महिला आरक्षण को परिसीमन या सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ना न तो आवश्यक है और न ही न्यायसंगत है।
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