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Haryana: सीएम सैनी के गढ़ में उलझन, सीधे मुकाबले में फंसे प्रत्याशी, जानिए अंबाला के समीकरण
Fri, 27 Sep 2024 06:28 PM IST
भूपेंद्र सिंह
वैभव शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, अंबाला (हरियाणा)
वैभव शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, अंबाला (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 27 Sep 2024 06:28 PM IST
सार
भाजपा सातवीं बार मैदान में उतरे अनिल विज की जीत व नारायण में कमल खिलाने की कोशिश में है। कांग्रेस सभी सीटों पर कड़ी टक्कर दे रही है।
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अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र के गांव दुखेड़ी में चर्चा करते ग्रामीण
- फोटो : संवाद
विस्तार
कार्यकारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गृह जिले अंबाला में मतदान से एक सप्ताह पहले तक प्रत्याशियों की जीत को लेकर पार्टियों से लेकर मतदाता सब उलझन में है। यहां की चारों सीटों में से तीन अंबाला शहर, मुलाना व नारायणगढ़ में कांग्रेस व भाजपा में सीधी टक्कर है, जबकि चौथी सीट अंबाला कैंट में कांग्रेस से निष्कासित बागी चित्रा सरवारा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। उनके आने से पूर्व गृहमंत्री व छह बार के विधायक अनिल विज व कांग्रेस के परविंदर परी दोनों की राह मुश्किल हो गई है।
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इस सीट पर दस साल से कांग्रेस वर्सेज कांग्रेस का माहौल बनता जा रहा है। पिछली बार भी विज के सामने चित्रा सरवारा ने बागी होकर चुनाव लड़ा था और 36 प्रतिशत से अधिक वोट पाए थे। उस समय परी के बजाय वेणु अग्रवाल को टिकट दी गई थी और कांग्रेस वर्सेज कांग्रेस की लड़ाई में विज को जीत मिली थी।
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विज करोड़ों के विकास कार्यों कराने का दावा कर मैदान में हैं जबकि चित्रा व परी भ्रष्टाचार को मुद्दे बना रहे हैं। विज और परी दोनों पंजाबी समाज से आते हैं, जिससे उनका वोट बंट सकता है। चित्रा ही एकमात्र जाट उम्मीदवार हैं। अभी जाट फैक्टर दिखाई नहीं पड़ रहा। यहां कांग्रेस की फूट के बावजूद पूर्व गृहमंत्री अनिल विज की राह आसान नहीं है। उनकी हार व जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि कांग्रेस के वोट चित्रा और परविंदर परी में कितने विभाजित होते हैं। परविंदर परी इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।
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खास बात है कि चित्रा के पिता निर्मल सिंह कांग्रेस के टिकट पर अंबाला शहरी सीट से मैदान में हैं और भाजपा के मंत्री असीम गोयल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पिछली बार निर्मल सिंह कांग्रेस से बागी होकर मैदान में उतर गए थे और कांग्रेस ने जसबीर मलौर को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस बार कांग्रेस ने निर्मल को टिकट दिया तो मलौर मैदान में उतर आए लेकिन उनको मना लिया गया है। वे निर्मल के साथ प्रचार में भी खूब साथ दे रहे हैं।
दूसरी ओर मुलाना में पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना के परिवार से पहले वरुण तो अब वरुण चौधरी की पत्नी पूजा चौधरी मैदान में हैं। वरुण हाल ही में सांसद बने हैं। लोकसभा चुनाव में उनके हलके ने जीत में काफी भरोसा जताया था। पूजा चौधरी का यह पहला चुनाव है। उनके सामने पूर्व में मंत्री रहीं संतोष सारवान चुनावी मैदान में हैं। यहां संतोष सारवान की ग्रामीण इलाकों में पकड़ अधिक है तो वरुण अपने राजनीतिक अनुभवों और संबंधों से जोर आजमाइश कर रहे हैं।
वहीं, सीएम के गृह क्षेत्र नारायणगढ़ में कांग्रेस ने निवर्तमान विधायक शैली चौधरी पर दांव चला है। सीएम के लाडवा जाने और लाडवा से पवन सैनी के नारायणगढ़ आने के बाद लोगों को नाराजगी है। लोग पवन को बाहरी बता रहे हैं लेकिन सैनी समाज व सीएम के समर्थन के साथ वे अभी भी दौड़ में बने हुए।
नारायणगढ़ भाजपा की नाक का सवालदस साल तक सीएम सीट रहे करनाल की तरह ही नारायगढ़ जीतना भी भाजपा की नाक का सवाल बना हुआ है। हालांकि यहां कांग्रेस का वर्चस्व सबसे अधिक रहा है, लेकिन इस बार सीएम का गृहक्षेत्र होने के कारण भाजपा इसे हलके में नहीं ले रही। नारायणगढ़ में सैनी मतदाताओं की संख्या ज्यादा है।
इसी कारण कुरुक्षेत्र के रहने वाले पवन सैनी को लाडवा के बजाय यहां भेजा गया है। सीएम के छोटे कार्यकाल और नारायणगढ़ में विकास की कमी पर लोग अपनी राय रख रहे हैं। वहीं कांग्रेस की शैली चौधरी गुर्जर समाज से आती हैं और गुर्जर समाज के मतदाताओं की संख्या भी यहां ज्यादा है। बसपा-इनेलाे गठबंधन से हरबिलास रज्जूमाजरा अकेले जाट उम्मीदवार हैं।