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Ambala News: बैंक प्रबंधक के खिलाफ पीएम को दी शिकायत
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साहा। संभालखा गांव निवासी प्रीत सिंह ने साहा में स्थित एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक राहुल कुमार के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम लिखित शिकायत दी है। शिकायत में प्रार्थी और उसके पिता के साथ धोखाधड़ी करने, पूरी रकम लेकर भी खाता बंद न करने, एनओसी न देने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इसके बाद पुलिस ने कई धाराओं में बैंक प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज किया।
ये है मामला
शिकायत में शिकायतकर्ता प्रीत सिंह ने बताया कि साल 2015 में एचडीएफसी बैंक, शाखा साहा के प्रबन्धक और अन्य कर्मचारी उसके और उसके पिता के पास गांव में आए थे। जहां उन्हें बैंक की ओर से ऋण संबंधित सुविधाओं बारे बताने लगे और उनसे प्रार्थी व उसके पिता से कहा कि आप अपनी जमीन के हिसाब से सीसी लिमिट यानी फसल के लिए ऋण ले सकते हैं। मना करने पर शाखा प्रबंधक ने आश्वासन दिया कि आपको बैंक में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
इसके बाद उन्होंने बैंक में सीसी लिमिट का खाता खुलवाया और फसल के लिए ऋण भी लिया। मगर कुछ समय बाद ही खाता बंद कर दिया गया। जबकि सीसी लिमिट का खाता चलता रहा। खाता खुलवाने के समय कई कगजों पर हस्ताक्षर भी कराए और कई खाली चेक भी लिए थे। कुछ समय बाद ही बैंक कई प्रकार के खर्चे दिखाने लगी।
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वर्ष 2018 में बैंक ने नोटिस भी भिजवाया। जिसमें लिखा था कि शिकायतकर्ता की ओर से 13.60 लाख रुपये का चेक डिसओन हो गया। जबकि शिकायतकर्ता ने इस धनराशि का चेक दिया ही नहीं था।
इसके बाद जब शिकायतकर्ता बैंक गया तो उसे कहा गया कि एक मुश्त स्कीम में 10 लख 50 हजार रुपये भर दें तो खाता क्लीयर कर देंगे। वर्ष 2019 मई में यह धनराशि शिकायतकर्ता ने भर भी दी। इसके बावजूद बैंक ने न तो चेक का केस वापस लिया और न ही खाता बंद किया।
इसके बाद एक लाख रुपये में खाता बंद करने को कहा। शिकायतकर्ता ने जब अपने खाते की जांच की तो पाया कि खाते से छेड़छाड़ की गई है। कई बार धनराशि जमा की और निकाली गई है जबकि उन्होंने खाता चलाया ही नहीं। मामले की शिकायत कई बार की गई मगर हर बार निराशा ही हाथ लगी। अब पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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ये है मामला
शिकायत में शिकायतकर्ता प्रीत सिंह ने बताया कि साल 2015 में एचडीएफसी बैंक, शाखा साहा के प्रबन्धक और अन्य कर्मचारी उसके और उसके पिता के पास गांव में आए थे। जहां उन्हें बैंक की ओर से ऋण संबंधित सुविधाओं बारे बताने लगे और उनसे प्रार्थी व उसके पिता से कहा कि आप अपनी जमीन के हिसाब से सीसी लिमिट यानी फसल के लिए ऋण ले सकते हैं। मना करने पर शाखा प्रबंधक ने आश्वासन दिया कि आपको बैंक में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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इसके बाद उन्होंने बैंक में सीसी लिमिट का खाता खुलवाया और फसल के लिए ऋण भी लिया। मगर कुछ समय बाद ही खाता बंद कर दिया गया। जबकि सीसी लिमिट का खाता चलता रहा। खाता खुलवाने के समय कई कगजों पर हस्ताक्षर भी कराए और कई खाली चेक भी लिए थे। कुछ समय बाद ही बैंक कई प्रकार के खर्चे दिखाने लगी।
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वर्ष 2018 में बैंक ने नोटिस भी भिजवाया। जिसमें लिखा था कि शिकायतकर्ता की ओर से 13.60 लाख रुपये का चेक डिसओन हो गया। जबकि शिकायतकर्ता ने इस धनराशि का चेक दिया ही नहीं था।
इसके बाद जब शिकायतकर्ता बैंक गया तो उसे कहा गया कि एक मुश्त स्कीम में 10 लख 50 हजार रुपये भर दें तो खाता क्लीयर कर देंगे। वर्ष 2019 मई में यह धनराशि शिकायतकर्ता ने भर भी दी। इसके बावजूद बैंक ने न तो चेक का केस वापस लिया और न ही खाता बंद किया।
इसके बाद एक लाख रुपये में खाता बंद करने को कहा। शिकायतकर्ता ने जब अपने खाते की जांच की तो पाया कि खाते से छेड़छाड़ की गई है। कई बार धनराशि जमा की और निकाली गई है जबकि उन्होंने खाता चलाया ही नहीं। मामले की शिकायत कई बार की गई मगर हर बार निराशा ही हाथ लगी। अब पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।