{"_id":"690a5c45eafeab4b3e08799a","slug":"compared-to-last-year-the-arrival-of-paddy-has-decreased-due-to-waterlogging-the-loss-ambala-news-c-36-1-amb1002-152453-2025-11-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: पिछले वर्ष के मुकाबले धान की कम आई आवक, जलभराव से नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: पिछले वर्ष के मुकाबले धान की कम आई आवक, जलभराव से नुकसान
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। पिछले वर्ष के मुकाबले अबकी बार मंडियों में धान की 5.65 लाख मीट्रिक टन आवक आई है, जबकि पिछले वर्ष 6.06 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हुई थी। उपायुक्त ने बताया कि अजय सिंह ने बताया कि कम आवक का एक कारण भारी वर्षा के होने के चलते कुछ क्षेत्रों में जलभराव रहने के कारण फसलों का नुकसान होना है। उन्होंने बताया कि ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के तहत 51 हजार एकड़ क्षेत्र में फसल के नुकसान को दर्ज किया गया है, जिसका सत्यापन कर लिया गया है। जल्द ही संबंधित किसानों को उनकी फसलों से संबंधित मुआवजा सीधा उनके खाते में देने का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में पराली प्रबंधन के तहत नाम मात्र आगजनी की घटनाएं हुई हैं। सांख्यिकी आंकड़े में आगजनी की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है। यह श्रेय विभाग के साथ-साथ किसानों को जाता है, जिन्होंने पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों जिनमें हैप्पी सीडर, एक्स सी-2 इत्यादि शामिल है।
विज्ञापन
अंबाला सिटी। पिछले वर्ष के मुकाबले अबकी बार मंडियों में धान की 5.65 लाख मीट्रिक टन आवक आई है, जबकि पिछले वर्ष 6.06 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हुई थी। उपायुक्त ने बताया कि अजय सिंह ने बताया कि कम आवक का एक कारण भारी वर्षा के होने के चलते कुछ क्षेत्रों में जलभराव रहने के कारण फसलों का नुकसान होना है। उन्होंने बताया कि ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के तहत 51 हजार एकड़ क्षेत्र में फसल के नुकसान को दर्ज किया गया है, जिसका सत्यापन कर लिया गया है। जल्द ही संबंधित किसानों को उनकी फसलों से संबंधित मुआवजा सीधा उनके खाते में देने का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में पराली प्रबंधन के तहत नाम मात्र आगजनी की घटनाएं हुई हैं। सांख्यिकी आंकड़े में आगजनी की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है। यह श्रेय विभाग के साथ-साथ किसानों को जाता है, जिन्होंने पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों जिनमें हैप्पी सीडर, एक्स सी-2 इत्यादि शामिल है।