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कर्मभूमि एक्सप्रेस प्रकरण:-बच्चे बोले लुधियाना फैक्टरी में करना था काम, 12 हजार रुपये में तय हुआ था सौदा
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कर्मभूमि एक्सप्रेस से संरक्षण में लिए गए नाबालिगों ने काउंसलिंग के दौरान चौंकाने वाली जानकारी दी है। लगभग 10 बच्चों ने बताया कि वह लुधियाना की एक फैक्टरी में काम करने जा रहे थे। बच्चों ने बताया कि उनके पिता के पास एक व्यक्ति आया था। उसने लुधियाना की एक फैक्टरी में काम दिलाने का वादा किया था। कहा था कि प्रतिमाह काम के बदले बच्चे को 12 हजार रुपये मिलेंगे। कुछ बच्चों ने यह बताया कि उनका भाई, मामा व चाचा लुधियाना में काम करते हैं और वे उनके पास जा रहे हैं। कुछ ने मदरसे में पढ़ने वाले भाई की जानकारी दी तो कुछ ने बताया कि लॉकडाउन से पहले भी वह एक फैक्टरी में काम करते थे। फिर बीच में घर चले गए और अब फिर फैक्टरी में काम करने के लिए वापस लुधियाना जा रहे थे।
अधिकारी कर रहे फैक्टरी में काम करने से इनकार, 19 पेज की रिपोर्ट में लिखी सच्चाई
मामले में जब अधिकारियों के साथ बातचीत की तो उन्होंने फैक्टरी में किसी भी बच्चे से काम करवाए जाने की बात से पूरी तरह से इनकार कर दिया लेकिन काउंसलिंग की 19 पेज की रिपोर्ट में पूरी कहानी बयान की गई है। कुल 19 पेज की रिपोर्ट बनी है। एक बच्चे ने लुधियाना की सुदरना फैक्टरी का नाम भी बताया। एक बच्चे ने बताया कि मेरा बड़ा भाई हैदराबाद रहता है। माता-पिता बूढ़े हैं वह आठवीं में पढ़ता है और उनके लिए ही फैक्टरी में काम करने के लिए बुआ के लड़के के साथ जा रहा था। एक बच्चे ने बताया कि लुधियाना में चाचा के साथ पत्थर-टाइलें लगाने जा रहा था। एक ने बताया कि परिवार की गरीबी के कारण काम करने लुधियाना जा रहा था। इसी तरह की बात अन्य ने रिपोर्ट में कही है।
यह था पूरा मामला
बचपन बचाओ अभियान पंचकूला के सदस्य यादवदिंर सिंह को जानकारी मिली थी कि ट्रेन नंबर 2407 न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर में 25 से अधिक बच्चों को मानव तस्करी के तहत लुधियाना ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर ट्रेन में छापामारी के लिए 7 टीमों का गठन कर 80 कर्मचारियों की तैनाती की गई। टीम ने 7 अलग-अलग कोच में छापा मारकर लगभग 50 बच्चों को संरक्षण में लिया था। प्राथमिक पूछताछ और जांच के बाद 27 बच्चे ही नाबालिग मिले थे। इनमें 5 बच्चों के परिजन मौके पर ही मौजूद थे, जिन्हें कागजी कार्रवाई के बाद तुरंत बच्चों को सौंप दिया गया। अन्य 22 बच्चों की छावनी जीआरपी थाने में डीडीआर कटवाने के बाद ओपन शेल्टर होम भेज दिया गया था।
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22 बच्चों की वीरवार को काउंसलिंग की गई। 6-7 बच्चों को परिजनों के सुपुर्द किया गया है। कुछ बच्चों ने मदरसे में पढ़ने तो कुछ ने परिजनों के पास जाने की जानकारी दी थी। किसी ने भी फैक्टरी में काम करने बारे नहीं बताया। अगर फिर भी ऐसी कोई जानकारी मिलेगी तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
रेखा शर्मा, सदस्य सीडब्ल्यूसी
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अधिकारी कर रहे फैक्टरी में काम करने से इनकार, 19 पेज की रिपोर्ट में लिखी सच्चाई
मामले में जब अधिकारियों के साथ बातचीत की तो उन्होंने फैक्टरी में किसी भी बच्चे से काम करवाए जाने की बात से पूरी तरह से इनकार कर दिया लेकिन काउंसलिंग की 19 पेज की रिपोर्ट में पूरी कहानी बयान की गई है। कुल 19 पेज की रिपोर्ट बनी है। एक बच्चे ने लुधियाना की सुदरना फैक्टरी का नाम भी बताया। एक बच्चे ने बताया कि मेरा बड़ा भाई हैदराबाद रहता है। माता-पिता बूढ़े हैं वह आठवीं में पढ़ता है और उनके लिए ही फैक्टरी में काम करने के लिए बुआ के लड़के के साथ जा रहा था। एक बच्चे ने बताया कि लुधियाना में चाचा के साथ पत्थर-टाइलें लगाने जा रहा था। एक ने बताया कि परिवार की गरीबी के कारण काम करने लुधियाना जा रहा था। इसी तरह की बात अन्य ने रिपोर्ट में कही है।
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यह था पूरा मामला
बचपन बचाओ अभियान पंचकूला के सदस्य यादवदिंर सिंह को जानकारी मिली थी कि ट्रेन नंबर 2407 न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर में 25 से अधिक बच्चों को मानव तस्करी के तहत लुधियाना ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर ट्रेन में छापामारी के लिए 7 टीमों का गठन कर 80 कर्मचारियों की तैनाती की गई। टीम ने 7 अलग-अलग कोच में छापा मारकर लगभग 50 बच्चों को संरक्षण में लिया था। प्राथमिक पूछताछ और जांच के बाद 27 बच्चे ही नाबालिग मिले थे। इनमें 5 बच्चों के परिजन मौके पर ही मौजूद थे, जिन्हें कागजी कार्रवाई के बाद तुरंत बच्चों को सौंप दिया गया। अन्य 22 बच्चों की छावनी जीआरपी थाने में डीडीआर कटवाने के बाद ओपन शेल्टर होम भेज दिया गया था।
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22 बच्चों की वीरवार को काउंसलिंग की गई। 6-7 बच्चों को परिजनों के सुपुर्द किया गया है। कुछ बच्चों ने मदरसे में पढ़ने तो कुछ ने परिजनों के पास जाने की जानकारी दी थी। किसी ने भी फैक्टरी में काम करने बारे नहीं बताया। अगर फिर भी ऐसी कोई जानकारी मिलेगी तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
रेखा शर्मा, सदस्य सीडब्ल्यूसी