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आरक्षण पर जातिगत राजनीति हावी, असली हकदार दरकिनार
ब्यूरो /अमर उजाला, अंबाला
Updated Wed, 30 Mar 2016 01:00 AM IST
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नेशनल कमिशन ऑफ बैकवर्ड क्लास के चेयरमैन एवं पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट वी. ईश्वरीय ने कहा कि आज देश में आरक्षण पॉलिसी पर राजनीतिक सोच होवी हो चुकी है। जिस वजह से आरक्षण पॉलिसी का राजनीतिक फायदों के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। इसी वजह से आज देश में आरक्षण का असली हकदार दरकिनार खड़ा है और वे लोग आरक्षण का फायदा उठा रहे हैं, जो आर्थिक रूप से अच्छे खासे संपन्न हैं।
नेशनल कमिशन ऑफ बैकवर्ड क्लास के चेयरमैन एवं आंधप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस वी. ईश्वरीय अंबाला आए हुए थे और 'अमर उजाला' से मुखातिब थे। बातचीत में जहां बैकवर्ड क्लास कमिशन के चेयरमैन ने बेबाकी से अपनी बात रखी, वहीं उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इसी मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले हैं।
कास्ट सेन्सस सार्वजनिक करने की रखेंगे मांग
चेयरमैन वी. ईश्वरीय ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर देश में जातीय जनगणना को सार्वजनिक करने की मांग रखेंगे। उनके अनुसार इस जातीय जनगणना में वह पीएम से लोगों, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति व उनके व्यवसाय और रोजगार के साधनों का आंकड़ा सार्वजनिक किए जाने की मांग करेंगे। ये आंकड़ा जनगणना के दौरान एकत्रित किया जा चुका है, बस इसे सार्वजनिक किए जाने की जरूरत हैं।
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उनके अनुसार इससे सही ढंग से मालूम चल जाएगा कि आर्थिक रूप से कौन लोग कमजोर है? और किन आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सही मायनों में आरक्षण के लाभ की जरूरत है। इतना ही नहीं इन्ही आंकड़ों को हर दस साल में रिव्यू करने की भी जरूरत है। वी. ईश्वरीय के अनुसार वे इस बारे में लगातार काम कर रहे हैं और अब प्रधानमंत्री से मिलकर उनके सामने भी उक्त मांग प्रस्ताव के रूप में रखेंगे।
आरक्षण पर बंद हो जातिगत राजनीति
पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा कि बाबा भीम राव अंबेदकर का भी सपना था कि आरक्षण का लाभ उन्ही लोगों को मिले, जो इसके सही मायनों में इसके हकदार है। बाबा साहेब ने कभी जाति को प्रधान नहीं बताया, वे आर्थिक रूप से पिछड़े और कमजोर लोगों को आरक्षण का लाभ पहुंचाने के पक्षधर रहे। लिहाजा आज आरक्षण के नाम पर जातिगत राजनीति नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में जाट आरक्षण के मसले पर पूर्व चीफ जस्टिस ने सीधे टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा कि आरक्षण पॉलिसी के मुद्दे पर किसी भी राजनीतिक पार्टी को राजनीति नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार आरक्षण पॉलिसी को केवल संविधान के ही दायरे में रखकर इसका लाभ दिया जाए तो बेहतर होगा।
विचार थोपने की नहीं, राष्ट्रीय एकता की जरूरत
पूर्व चीफ जस्टिस ने देश में चल रहे दो बड़े मसले असहिष्णुता और भारत माता की जय बोलने पर छिड़े विवाद पर कहा कि आज देश में किसी भी व्यक्ति पर अपने विचार थोपने की जरूरत नहीं है। आज लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस भी व्यक्ति को अपने देश से प्यार होगा, वे उसका सम्मान अपने आप करेगा। चाहे वे किसी भी तरीके से करे। आज देश के सभी धर्मों के लोगों को राष्ट्रीय एकता के धागे में पिरोने की जरूरत है, उक्त तरह के विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगें और देशवासियों में प्यार और सौहार्द अपने आप बढ़ जाएगा।
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नेशनल कमिशन ऑफ बैकवर्ड क्लास के चेयरमैन एवं आंधप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस वी. ईश्वरीय अंबाला आए हुए थे और 'अमर उजाला' से मुखातिब थे। बातचीत में जहां बैकवर्ड क्लास कमिशन के चेयरमैन ने बेबाकी से अपनी बात रखी, वहीं उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इसी मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले हैं।
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कास्ट सेन्सस सार्वजनिक करने की रखेंगे मांग
चेयरमैन वी. ईश्वरीय ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर देश में जातीय जनगणना को सार्वजनिक करने की मांग रखेंगे। उनके अनुसार इस जातीय जनगणना में वह पीएम से लोगों, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति व उनके व्यवसाय और रोजगार के साधनों का आंकड़ा सार्वजनिक किए जाने की मांग करेंगे। ये आंकड़ा जनगणना के दौरान एकत्रित किया जा चुका है, बस इसे सार्वजनिक किए जाने की जरूरत हैं।
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उनके अनुसार इससे सही ढंग से मालूम चल जाएगा कि आर्थिक रूप से कौन लोग कमजोर है? और किन आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सही मायनों में आरक्षण के लाभ की जरूरत है। इतना ही नहीं इन्ही आंकड़ों को हर दस साल में रिव्यू करने की भी जरूरत है। वी. ईश्वरीय के अनुसार वे इस बारे में लगातार काम कर रहे हैं और अब प्रधानमंत्री से मिलकर उनके सामने भी उक्त मांग प्रस्ताव के रूप में रखेंगे।
आरक्षण पर बंद हो जातिगत राजनीति
पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा कि बाबा भीम राव अंबेदकर का भी सपना था कि आरक्षण का लाभ उन्ही लोगों को मिले, जो इसके सही मायनों में इसके हकदार है। बाबा साहेब ने कभी जाति को प्रधान नहीं बताया, वे आर्थिक रूप से पिछड़े और कमजोर लोगों को आरक्षण का लाभ पहुंचाने के पक्षधर रहे। लिहाजा आज आरक्षण के नाम पर जातिगत राजनीति नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में जाट आरक्षण के मसले पर पूर्व चीफ जस्टिस ने सीधे टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा कि आरक्षण पॉलिसी के मुद्दे पर किसी भी राजनीतिक पार्टी को राजनीति नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार आरक्षण पॉलिसी को केवल संविधान के ही दायरे में रखकर इसका लाभ दिया जाए तो बेहतर होगा।
विचार थोपने की नहीं, राष्ट्रीय एकता की जरूरत
पूर्व चीफ जस्टिस ने देश में चल रहे दो बड़े मसले असहिष्णुता और भारत माता की जय बोलने पर छिड़े विवाद पर कहा कि आज देश में किसी भी व्यक्ति पर अपने विचार थोपने की जरूरत नहीं है। आज लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस भी व्यक्ति को अपने देश से प्यार होगा, वे उसका सम्मान अपने आप करेगा। चाहे वे किसी भी तरीके से करे। आज देश के सभी धर्मों के लोगों को राष्ट्रीय एकता के धागे में पिरोने की जरूरत है, उक्त तरह के विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगें और देशवासियों में प्यार और सौहार्द अपने आप बढ़ जाएगा।