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Ambala News: जगतपिता भगवान को प्रसन्न करने से होते पितृ प्रसन्न,वेदांत सिद्धांति
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अंबाला। छावनी के श्री कुंजबिहारी गौडीय मठ में श्री भक्त बांधव समिति द्वारा कराई जा रही, श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन पूज्यपाद भक्ति वेदांत सिद्धांति महाराज ने बताया कि पितृपक्ष में भागवत सुनने का और करने का बहुत अधिक लाभ मिलता है। हमारे ऊपर पांच प्रकार के ऋण होते हैं, देवऋण, ऋषिऋण, राजऋण, प्राणियों का ऋण और पितरों का ऋण। पितृपक्ष में ब्राह्मणों को श्राद्ध में दक्षिणा एवं भोजन इत्यादि देने का विधान है। यदि हम भगवान को लगाया हुआ भोग, प्रसाद के रूप में पितरों को अर्पण करते हैं तो वह बहुत अधिक प्रसन्न होते हैं। यदि हम जगत पिता भगवान को प्रसन्न करते हैं, तो पितृ भी प्रसन्न हो जाते हैं।
इसके बाद उन्होंने सृष्टि के प्रारंभ के विषय में बताते हुए कहा कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि आरंभ की। उनकी संतान मनु एवं शतरूपा हुई एवं उनकी संतान देवहूती, प्रसूति एवं आकूति हुई। देवहूति का विवाह कर्दम ऋषि से हुआ। उनके यहां पर भगवान स्वयं कपिल देव के रूप में प्रकटित हुए। जिन्होंने सांख्य दर्शन लिखा। भागवत जी इस बात का प्रमाण है, कि पुत्र भी गुरु हो सकता है। जैसे कपिल देव ने अपनी माता देवहुती को उपदेश प्रदान किया और बताया कि भगवान की मंगलकारी कथाएं ही हृदय और कानों के लिए रसायन के समान है। जो हम कानों से श्रवण करते हैं, उसको हृदय से ग्रहण करते हैं। इसलिए हमें गीता, पुराण और भागवत आदि शास्त्रों के प्रमाण से यह समझना चाहिए कि भगवान स्वयं कह रहे हैं, तुम सभी प्रकार के धर्म को छोड़कर मेरी शरण को ग्रहण करो। सर्वधर्मान परितज्य माम एकम शरनम व्रज।
उन्होंने ऋषभदेव एवं उनके पुत्रों की कथा सुनाते हुए कहा कि गृहस्थ धर्म में प्रवेश से पहले संयमित जीवन का आचरण करना चाहिए। आज के दिन भक्तों ने एकादशी व्रत का पालन भी किया। महाराज ने एकादशी के व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि एकादशी को माधव तिथि भी कहा जाता है, माधव तिथि, भक्ति जननी है अर्थात भक्ति को जन्म देती है। आज के दिन हमें अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। एकादशी का वैज्ञानिक महत्व भी है, 15 दिन में एक बार व्रत करने से शरीर की शुद्धि हो जाती है। अंबरीश महाराज की तरह इस दिन अपनी सारी इंद्रियों को भगवान की सेवा में लगाकर उनके प्रेम की प्राप्ति की जा सकती है। एकादशी के दिन यदि कोई श्राद्ध आता है तो उस दिन हमें ब्राह्मणों को अन्न न देकर फलाहार से श्राद्ध करवाना चाहिए और अगले दिन अन्न के द्वारा करना चाहिए। वहीं सुंदर गोपाल दास के गाए हुए मधुर मधुर कीर्तन पर भक्तों ने झूम झूम कर नृत्य किया। इस अवसर स्थानीय भक्तों के अलावा फरीदाबाद, दिल्ली, कुराली, चंडीगढ़, जालंधर और जर्मनी के भक्त भी मौजूद रहे। संस्था के अध्यक्ष सुंदर गोपाल दास ने बताया की रविवार को कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा और विशेष रूप से भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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इसके बाद उन्होंने सृष्टि के प्रारंभ के विषय में बताते हुए कहा कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि आरंभ की। उनकी संतान मनु एवं शतरूपा हुई एवं उनकी संतान देवहूती, प्रसूति एवं आकूति हुई। देवहूति का विवाह कर्दम ऋषि से हुआ। उनके यहां पर भगवान स्वयं कपिल देव के रूप में प्रकटित हुए। जिन्होंने सांख्य दर्शन लिखा। भागवत जी इस बात का प्रमाण है, कि पुत्र भी गुरु हो सकता है। जैसे कपिल देव ने अपनी माता देवहुती को उपदेश प्रदान किया और बताया कि भगवान की मंगलकारी कथाएं ही हृदय और कानों के लिए रसायन के समान है। जो हम कानों से श्रवण करते हैं, उसको हृदय से ग्रहण करते हैं। इसलिए हमें गीता, पुराण और भागवत आदि शास्त्रों के प्रमाण से यह समझना चाहिए कि भगवान स्वयं कह रहे हैं, तुम सभी प्रकार के धर्म को छोड़कर मेरी शरण को ग्रहण करो। सर्वधर्मान परितज्य माम एकम शरनम व्रज।
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उन्होंने ऋषभदेव एवं उनके पुत्रों की कथा सुनाते हुए कहा कि गृहस्थ धर्म में प्रवेश से पहले संयमित जीवन का आचरण करना चाहिए। आज के दिन भक्तों ने एकादशी व्रत का पालन भी किया। महाराज ने एकादशी के व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि एकादशी को माधव तिथि भी कहा जाता है, माधव तिथि, भक्ति जननी है अर्थात भक्ति को जन्म देती है। आज के दिन हमें अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। एकादशी का वैज्ञानिक महत्व भी है, 15 दिन में एक बार व्रत करने से शरीर की शुद्धि हो जाती है। अंबरीश महाराज की तरह इस दिन अपनी सारी इंद्रियों को भगवान की सेवा में लगाकर उनके प्रेम की प्राप्ति की जा सकती है। एकादशी के दिन यदि कोई श्राद्ध आता है तो उस दिन हमें ब्राह्मणों को अन्न न देकर फलाहार से श्राद्ध करवाना चाहिए और अगले दिन अन्न के द्वारा करना चाहिए। वहीं सुंदर गोपाल दास के गाए हुए मधुर मधुर कीर्तन पर भक्तों ने झूम झूम कर नृत्य किया। इस अवसर स्थानीय भक्तों के अलावा फरीदाबाद, दिल्ली, कुराली, चंडीगढ़, जालंधर और जर्मनी के भक्त भी मौजूद रहे। संस्था के अध्यक्ष सुंदर गोपाल दास ने बताया की रविवार को कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा और विशेष रूप से भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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