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Ambala News: सरकार के मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल में सेंध
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धर्म सिंह
अंबाला सिटी। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल में लोग सेंध लगा रहे हैं। इसका खुलासा सीएससी सेंटरों पर साफ देखा जा सकता है। सेंटर संचालक किसानों का पंजीकृत मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी भेजते हैं तो सिस्टम बताता है कि यह जमीन किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर पंजीकृत है। किसानों द्वारा शिकायत करने पर भी कोई हल नहीं निकल पा रहा है।
इससे किसानों में रोष है। दर्जनों किसान ऐसे हैं जो इस प्रकार की समस्या से परेशान हैं। पंजीकरण की अंतिम तारीख को में पोर्टल भी व्यस्त रहता है, क्योंकि इस वर्ष बाढ़ के कारण किसानों की धान की फसल बर्बाद हो गई है। इसलिए इसी पोर्टल पर क्षतिपूर्ति पोर्टल भी चल रहा है। उधर कृषि विभाग ने पंजीकरण की तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 17 अगस्त कर दी है। संवाद
एफआईआर की धमकी दी तो हटाया नंबर
किसान डिंपल ने बताया कि वह अपनी नौ एकड़ जमीन पंजीकृत करवाने लगा तो उसके सभी नंबरों पर प्रीत कौर का नाम था। उसने उसे फोन किया तो स्विच ऑफ मिला। उसने उसे मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से लिखा कि मेरे नंबरों को डिलीट कर दो वरना मैं आपके खिलाफ एफआईआर करवा दूंगा। उन्होंने तुरंत अपने पोर्टल से नंबरों को डिलीट कर दिया। तब जाकर जमीन के नंबरों को अपने नाम पंजीकृत कराया।
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कमेटी का होना चाहिए गठन
किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि उसके पास मात्र दो एकड़ जमीन है। वह भी शिव शक्ति व गौतम नाम के व्यक्तियों ने अपने नाम पंजीकृत करवा ली थी। वह किसानों व अन्य व्यक्तियों को बताना चाहता है कि वो केवल अपने ही नंबर रजिस्टर्ड करवाएं, अन्य किसानों के नहीं। कृषि विभाग को इस प्रकार के मामलों को लेकर एक कमेटी गठित करनी चाहिए जो किसानों की ऐसी समस्याओं का निवारण किया जा सके।
झज्जर के किसान के नाम किया पंजीकरण
किसान अजैब सिंह ने बताया कि उसका किसी भी किसान के साथ मुस्तरखा खाता नहीं है। उसकी दो एकड़ जमीन झज्जर के किसान ने अपने नाम पंजीकृत करवा ली थी। उसका जिला, तहसील व गांव अलग है। उसने जैसे ही उसे फोन किया तो उसका मोबाइल बंद आया। फिर उसने दोबारा प्रयास किया। फोन पर जैसे ही बात हुई तो तुरंत उसने सहमति प्रकट करते हुए अजैब सिंह के नंबरों को अपने पोर्टल से हटवा दिया।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसानों का पंजीकरण जारी था, लेकिन पोर्टल की साइट व्यस्त रहने के कारण 17 अगस्त तक इसे बढ़ा दिया गया है। किसानों की शिकायत पर कार्रवाई होती है, लेकिन किसानों को कार्यालय में संपर्क करना होता है।
-श्यामलाल, तकनीकी अधिकारी, मेरी फसल-मेरा ब्योरा, पोर्टल
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अंबाला सिटी। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल में लोग सेंध लगा रहे हैं। इसका खुलासा सीएससी सेंटरों पर साफ देखा जा सकता है। सेंटर संचालक किसानों का पंजीकृत मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी भेजते हैं तो सिस्टम बताता है कि यह जमीन किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर पंजीकृत है। किसानों द्वारा शिकायत करने पर भी कोई हल नहीं निकल पा रहा है।
इससे किसानों में रोष है। दर्जनों किसान ऐसे हैं जो इस प्रकार की समस्या से परेशान हैं। पंजीकरण की अंतिम तारीख को में पोर्टल भी व्यस्त रहता है, क्योंकि इस वर्ष बाढ़ के कारण किसानों की धान की फसल बर्बाद हो गई है। इसलिए इसी पोर्टल पर क्षतिपूर्ति पोर्टल भी चल रहा है। उधर कृषि विभाग ने पंजीकरण की तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 17 अगस्त कर दी है। संवाद
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एफआईआर की धमकी दी तो हटाया नंबर
किसान डिंपल ने बताया कि वह अपनी नौ एकड़ जमीन पंजीकृत करवाने लगा तो उसके सभी नंबरों पर प्रीत कौर का नाम था। उसने उसे फोन किया तो स्विच ऑफ मिला। उसने उसे मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से लिखा कि मेरे नंबरों को डिलीट कर दो वरना मैं आपके खिलाफ एफआईआर करवा दूंगा। उन्होंने तुरंत अपने पोर्टल से नंबरों को डिलीट कर दिया। तब जाकर जमीन के नंबरों को अपने नाम पंजीकृत कराया।
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कमेटी का होना चाहिए गठन
किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि उसके पास मात्र दो एकड़ जमीन है। वह भी शिव शक्ति व गौतम नाम के व्यक्तियों ने अपने नाम पंजीकृत करवा ली थी। वह किसानों व अन्य व्यक्तियों को बताना चाहता है कि वो केवल अपने ही नंबर रजिस्टर्ड करवाएं, अन्य किसानों के नहीं। कृषि विभाग को इस प्रकार के मामलों को लेकर एक कमेटी गठित करनी चाहिए जो किसानों की ऐसी समस्याओं का निवारण किया जा सके।
झज्जर के किसान के नाम किया पंजीकरण
किसान अजैब सिंह ने बताया कि उसका किसी भी किसान के साथ मुस्तरखा खाता नहीं है। उसकी दो एकड़ जमीन झज्जर के किसान ने अपने नाम पंजीकृत करवा ली थी। उसका जिला, तहसील व गांव अलग है। उसने जैसे ही उसे फोन किया तो उसका मोबाइल बंद आया। फिर उसने दोबारा प्रयास किया। फोन पर जैसे ही बात हुई तो तुरंत उसने सहमति प्रकट करते हुए अजैब सिंह के नंबरों को अपने पोर्टल से हटवा दिया।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसानों का पंजीकरण जारी था, लेकिन पोर्टल की साइट व्यस्त रहने के कारण 17 अगस्त तक इसे बढ़ा दिया गया है। किसानों की शिकायत पर कार्रवाई होती है, लेकिन किसानों को कार्यालय में संपर्क करना होता है।
-श्यामलाल, तकनीकी अधिकारी, मेरी फसल-मेरा ब्योरा, पोर्टल