फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Best quality Ashwagandha and Aloe vera will be cultivated in Haryana

एग्रीकल्चर: अब अश्वगंधा और एलोवेरा की उत्तम किस्म देगा हरियाणा, हिमालय से दक्षिण भारत तक से एकत्र किए पौधे

Thu, 15 Dec 2022 08:00 AM IST
भूपेंद्र सिंह वैभव शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)
वैभव शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 15 Dec 2022 08:00 AM IST
सार

अश्वगंधा की उत्तम किस्म 13 वर्षों की मेहनत से खोजी गई है। देश के विभिन्न प्रदेशों से 150 पौधे एकत्रित किए गए। इस अश्वगंधा में 12 तत्व शामिल हैं, जो कैंसर के ईलाज में भी सहायक है। अश्वगंधा हरियाणा वन की नई किस्म 2023 में रिलीज होगी।

विज्ञापन
Best quality Ashwagandha and Aloe vera will be cultivated in Haryana
एचएयू द्वारा तैयार की गई एलोवेरा व अश्वगंधा की नई किस्म। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अब हरियाणा प्रदेश के किसान औषधीय पौधों की खेती कर देशभर को स्वस्थ रखने के साथ लाखों रुपये की आय कर सकेंगे। यही किसान जल्द अश्वगंधा की खेती करते भी नजर आएंगे। इसे हिसार का चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) सफल करेगा। 
विज्ञापन


दरअसल एचएयू के प्लांट ब्रीडिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने 13 वर्ष की मेहनत के बाद अश्वगंधा की उत्तम किस्म खोज ली है। यह खोज देश की सबसे उत्तम अश्वगंधा को पैदा करेगी। इसमें सभी प्रकार के औषधीय गुण होंगे। इसका नाम अश्वगंधा हरियाणा वन रहेगा, जिसके वर्ष 2023 के शुरुआती दिनों में रिलीज होगी।
विज्ञापन


इसी प्रकार एलोवेरा पर भी वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग विधि का इस्तेमाल कर बेहतर किस्म तैयार की है। इसको राष्ट्रीय स्तर पर टेस्टिंग के लिए भेजा है। कुछ समय बाद ये भी रिलीज होगी। अंबाला के कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को औषधीय पौधों की खेती में हाथ आजमाने के लिए प्रशिक्षण दिया। यहां वैज्ञानिकों ने इसकी जानकारी दी।   
विज्ञापन
विज्ञापन


औषधीय पौधों पर काम करने की क्यों आवश्यकता
एचएयू के प्लांट ब्रीडिंग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेश आर्य ने बताया कि औषधीय पौधों पर अधिक काम नहीं हुआ। हम वर्षों से इन जड़ी-बूटियों को चिकित्सा विधियों में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इनमें सबसे उत्तम किस्म कौन सी है, इसको लगाने की प्रैक्टिस क्या होनी चाहिए, इन्ही बातों को ध्याम में रखकर एचएयू के हर्बल पार्क में औषधीय पौधों पर शोध कर नई किस्म विकसित की जा रही हैं। 

हिमालय से लेकर दक्षिण भारत से एकत्रित की अश्वगंधा
अश्वगंधा का हरियाणा वन किस्म को खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने हिमालय से लेकर दक्षिण भारत तक के राज्यों से अलग-अलग किस्मों और प्रकार के अश्वगंधा के करीब 150 पौधे एकत्रित किए। इन पौधों में खूबियों को देखा। इनको अपने इस्तेमाल के लिए उगाया, फिर इनकी आपस में क्रासिंग कराई। इसके बाद एक हाईब्रिड किस्म तैयार हुई, फिर कुछ वर्षों तक इस हाईब्रिड किस्म की पैदावार ली। उसकी आगे पीढ़ियां बढ़ने का इंतजार किया गया, जिससे कि आगे जाकर अच्छे गुणों और अधिक उत्पादन वाली किस्म बने। 

देश के सभी किसानों को होगा फायदा
हरियाणा अश्वगंधा वन किस्म सभी किस्मों से अलग और अधिक गुणकारी होगी। खास बात है कि हरियाणा ही नहीं, बल्कि देशभर के किसी भी राज्य के किसान इस किस्म का प्रयोग कर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। इसी प्रकार एलोवेरा देश में होता तो कई स्थानों पर है मगर सबसे अच्छा कौन सा है इसको लेकर अधिक स्पष्टता नहीं है। इसी कारण से एलोवेरा के भी कई स्थानों से पौधे लाकर शोध किया गया, जो टेस्टिंग फेस में है।

अश्वगंधा की जड़ों से बनती हैं कई दवा
डा. राजेश आर्य ने बताया कि अश्वगंधा की जड़ें काफी गुणकारी होती हैं। इसका कई दवाओं में प्रयोग होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का कार्य करती है। हरियाणा अश्वगंधा वन में अन्य अश्वगंधा की किस्मों के मुकाबले 10 प्रतिशत दवाई के तत्व अधिक हैं। अश्वगंधा में कुछ एलक्ररोइड्स पाए जाते हैं। इसमें विदनाइड ए, 4 और 5 पाए जाते हैं। अश्वगंधा में 12 प्रकार के तत्व हैं यह सभी तत्व हरियाणा अश्वगंधा वन किस्म में मौजूद हैं। यह तत्व कैंसर में राहत देते हैं, श्वसन रोगों में मदद करते हैं सहित अन्य बीमारियों में सहायता करते हैं। आने वाले समय में  

किसानों को ये होगा लाभ
अश्वगंधा की मांग फार्मास्युटिकल कंपनियों से लेकर कई खाद्य पदार्थ बनाने वाली कंपनियों को रहती है। किसान इसकी खेती करेंगे तो वह अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। औषधीय पौधों की पैदावार तो खेत से ही कंपनियां ले जाती हैं। 


औषधीय पौधों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का विशेष ध्यान है। विश्वविद्यालय हर्बल गार्डन में ऐसी ही किस्मों को तैयार करने का काम कर रहा है। जिसमें से अश्वगंधा और एलोवेरा एक है। किसानों को औषधीय पौधों की खेती में आगे आना चाहिए। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इस संबंध में जागरूक भी कर रहा है। -डॉ. बीआर कांबोज, कुलपति, एचएयू
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed