{"_id":"66a49e6277bf24567a0f3b1a","slug":"before-match-in-paris-olympics-shooter-sarabjot-father-said-i-don-t-go-with-my-son-so-doesn-t-get-emotional-2024-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Paris Olympics: मैच से पहले शूटर सरबजोत के पिता बोले- बेटा भावुक न हो जाए इसलिए साथ नहीं जाते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Paris Olympics: मैच से पहले शूटर सरबजोत के पिता बोले- बेटा भावुक न हो जाए इसलिए साथ नहीं जाते
Sat, 27 Jul 2024 12:44 PM IST
नवीन दलाल
माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Sat, 27 Jul 2024 12:44 PM IST
सार
अमर उजाला से बात करते हुए पिता ने बताया कि शुरुआत के दिनों में वह फरीदाबाद व दिल्ली में बेटे को लेकर प्रतियोगिता दिलाने गए थे। यहां देखा कि उन्हें देखकर बेटा भावुक हो जाता है।
विज्ञापन
खिलाड़ी सरबजोत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अंबाला के मुलाना के छोटे से गांव धीन के रहने वाले शूटर सबजोत आज पेरिस ओलंपिक में अपने क्वालीफाइंग मुकाबले में उतरेंगे। दोपहर दो बजे होने वाले मुकाबले को लेकर सरबजोत पिछले कुछ दिनों से फ्रांस में पसीना बहा रहे थे। खास बात है कि कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियागिताओं में भारत का नाम ऊंचा करने वाले सरबजोत का यह पहला ओलंपिक मुकाबला है। मुकाबले में जाने से एक दिन पहले सरबजोत ने अपने माता पिता को धीन गांव में फोन किया।
विज्ञापन
उन्होंने पिता जतिंदर सिंह से एक मिनट बात की तो माता से दो मिनट बात कर कुशलक्षेम जाना। इसके साथ ही कहा कि वह मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार हैं और माता पिता का आशीर्वाद चाहते हैं। इसके बाद परिजनों ने आशीर्वाद दिया। पिता जतिंदर सिंह ने कहा कि बेटा फतह कर। खास बात है कि शूटर सरबजोत के पिता अक्सर उनके मुकाबलों को देखने के लिए नहीं जाते हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला से बात करते हुए पिता ने बताया कि शुरुआत के दिनों में वह फरीदाबाद व दिल्ली में बेटे को लेकर प्रतियोगिता दिलाने गए थे। यहां देखा कि उन्हें देखकर बेटा भावुक हो जाता है। ऐसे में बेटा की हिम्मत बनी रहे इसके लिए उन्होंने एक दिन फैसला लिया कि वह मैच खत्म होने के बाद ही परिणाम बेटे से सुनेंगे। अगर किसी कारण से बेटे के साथ जाना भी हुआ तो वह परिसर के बाहर बैठ जाते हैं।
विज्ञापन
यही कारण है कि सरबजोत के जीवन के सबसे बड़े मुकाबले में भी वह पेरिस नहीं गए। उन्होंने बताया कि वह दो बजे अपनी पत्नी व गांववालों के साथ मुकाबले को टीवी पर देखेंगे। मगर उनका लक्ष्य फाइनल मुकाबले को लेकर है। गौरतलब है कि सरबजोत काफी साधारण परिवार से हैं। उनके पिता कृषि का कार्य करते हैं। कृषि के कार्य से ही जीजान लगाकर उन्होंने सरबजोत को हर वह प्रशिक्षण दिलाने की कोशिश की जिससे कि वह इस मुकाम तक पहुंच सके।