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Ambala News: पिछले कार्यकाल में विकास की बाट जोहते रह गए बराड़ा वासी
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बराड़ा स्थित नगरपालिका का कार्यालय। संवाद
- फोटो : बराड़ा स्थित नगरपालिका का कार्यालय। संवाद
बराड़ा। प्रदेश में निकाय चुनाव की तैयारियों के चलते बराड़ा नगर पालिका चुनाव के लिए प्रशासन और उम्मीदवार एक्टिव मोड में दिखाई दे रहे हैं। जैसे ही प्रशासन की ओर से चुनाव की तैयारियां काे अंतिम रूप दिया है, वैैसे ही चेयरमैन और पार्षद पद के उम्मीदवार अपनी-अपनी दावेदारी पेश करने लगे हैं।
चेयरपर्सन पद के लिए ड्राॅ निकालने से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि यहां चेयरपर्सन पद एससी वर्ग आरक्षित घोषित हो सकता है। ऐसे में जो सामान्य अथवा अन्य वर्ग के लोग कई वर्ष से तैयारियां कर रहे थे, उनकी सांसें अटकी थी लेकिन जैसे ही बराड़ा चेयरपर्सन की सीट सामान्य वर्ग के लिए घोषित हुई तो इन उम्मीदवारों ने चेन की सांस ली और ये लोग दोबारा सेे पूरी एनर्जी के साथ एक्टिव हो गए। लोगों में चर्चा है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्ता में है जबकि स्थानीय विधायक कांग्रेस से हैं तो क्या ऐसे में नगरपालिका चुनाव पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा।
दो चेयरपर्सन और उम्मीदें अधूरी
उल्लेखनीय है कि बराड़ा को ग्राम पंचायत का दर्जा समाप्त कर इसे नगर पालिका का दर्जा दिया गया था। इससे लोगों को काफी उम्मीदें थी कि नगर पालिका बनने से बराड़ा का विकास होगा लेकिन लोगों की उम्मीदें धरी रह गईं। वर्ष 2017 में नगरपालिका का पहला चुनाव हुआ और रमा खेत्रपाल चेयरपर्सन चुनी गईं। कुछ समय बाद पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें पद से हटाया। इसके बाद रिचा पाहवा को चेयरपर्सन बनाया गया। लेकिन जो विकास बराड़ा का होना चाहिए था, वह दोनों ही चेयरपर्सन के कार्यकाल में नहीं हो पाया। सितंबर 2022 में नगरपालिका का कार्यकाल पूरा हुआ। पहले बराड़ा नगर पालिका में 15 वार्ड थे, लेकिन इस बार नई वार्डबंदी के तहत 16 वार्ड कर दिए गए हैं। हालांकि चर्चाएं हैं कि दोनों चेयरपर्सन द्वारा विकास ना कराए जाने का रोष जनता में है जो चुनाव में देखने को मिल सकता है।
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नहीं हो पाया विकास
लोगों का कहना है कि नगरपालिका बनाने को लेकर लोगों को बराड़ा के विकास के सपने दिखाए। लेकिन विकास बराड़ा से कोसों दूर रहा। सबसे ज्यादा बुरी हालत सफाई व्यवस्था की रही। सफाई के लिए लाखों के टेंडर हुए लेकिन सफाई व्यवस्था दुरूस्त नहीं हो पाई। हालांकि बाद में समाजसेवी द्वारा अपने स्तर पर कार्य करवाए गए। वह भी ज्यादा दिन नहीं हो पाया। डोर टू डोर सफाई व्यवस्था भी असफल हो गई। यही नहीं बराड़ा के पास अपना कोई डंपिंग जोन भी नहीं है। न ही यहां पानी निकासी का उचित प्रबंध है। हालांकि नगरपालिका बनने के बाद लोगों के पानी के बिल आना शुरू हुए हैं। स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी कैमरे को लेकर भी बुरा हाल रहा। बाजार में पार्किंग व्यवस्था, सुलभ शौचालय, सामुदायिक केंद्र सहित कई बड़ी समस्याएं हैं जो आजतक हल नहीं हो पाई। हालांकि कुछ लोग बराड़ा को दोबारा से ग्राम पंचायत का दर्जा देने की मांग भी करते नजर आए।
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चेयरपर्सन पद के लिए ड्राॅ निकालने से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि यहां चेयरपर्सन पद एससी वर्ग आरक्षित घोषित हो सकता है। ऐसे में जो सामान्य अथवा अन्य वर्ग के लोग कई वर्ष से तैयारियां कर रहे थे, उनकी सांसें अटकी थी लेकिन जैसे ही बराड़ा चेयरपर्सन की सीट सामान्य वर्ग के लिए घोषित हुई तो इन उम्मीदवारों ने चेन की सांस ली और ये लोग दोबारा सेे पूरी एनर्जी के साथ एक्टिव हो गए। लोगों में चर्चा है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्ता में है जबकि स्थानीय विधायक कांग्रेस से हैं तो क्या ऐसे में नगरपालिका चुनाव पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा।
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दो चेयरपर्सन और उम्मीदें अधूरी
उल्लेखनीय है कि बराड़ा को ग्राम पंचायत का दर्जा समाप्त कर इसे नगर पालिका का दर्जा दिया गया था। इससे लोगों को काफी उम्मीदें थी कि नगर पालिका बनने से बराड़ा का विकास होगा लेकिन लोगों की उम्मीदें धरी रह गईं। वर्ष 2017 में नगरपालिका का पहला चुनाव हुआ और रमा खेत्रपाल चेयरपर्सन चुनी गईं। कुछ समय बाद पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें पद से हटाया। इसके बाद रिचा पाहवा को चेयरपर्सन बनाया गया। लेकिन जो विकास बराड़ा का होना चाहिए था, वह दोनों ही चेयरपर्सन के कार्यकाल में नहीं हो पाया। सितंबर 2022 में नगरपालिका का कार्यकाल पूरा हुआ। पहले बराड़ा नगर पालिका में 15 वार्ड थे, लेकिन इस बार नई वार्डबंदी के तहत 16 वार्ड कर दिए गए हैं। हालांकि चर्चाएं हैं कि दोनों चेयरपर्सन द्वारा विकास ना कराए जाने का रोष जनता में है जो चुनाव में देखने को मिल सकता है।
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नहीं हो पाया विकास
लोगों का कहना है कि नगरपालिका बनाने को लेकर लोगों को बराड़ा के विकास के सपने दिखाए। लेकिन विकास बराड़ा से कोसों दूर रहा। सबसे ज्यादा बुरी हालत सफाई व्यवस्था की रही। सफाई के लिए लाखों के टेंडर हुए लेकिन सफाई व्यवस्था दुरूस्त नहीं हो पाई। हालांकि बाद में समाजसेवी द्वारा अपने स्तर पर कार्य करवाए गए। वह भी ज्यादा दिन नहीं हो पाया। डोर टू डोर सफाई व्यवस्था भी असफल हो गई। यही नहीं बराड़ा के पास अपना कोई डंपिंग जोन भी नहीं है। न ही यहां पानी निकासी का उचित प्रबंध है। हालांकि नगरपालिका बनने के बाद लोगों के पानी के बिल आना शुरू हुए हैं। स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी कैमरे को लेकर भी बुरा हाल रहा। बाजार में पार्किंग व्यवस्था, सुलभ शौचालय, सामुदायिक केंद्र सहित कई बड़ी समस्याएं हैं जो आजतक हल नहीं हो पाई। हालांकि कुछ लोग बराड़ा को दोबारा से ग्राम पंचायत का दर्जा देने की मांग भी करते नजर आए।