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Ambala News: दो नशा तस्करों की जमानत याचिका खारिज
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। मादक पदार्थ तस्करी के मामले में एनडीपीएस की विशेष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने 1.75 क्विंटल गांजे की बरामदगी के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बरामद नशीले पदार्थ की मात्रा बहुत अधिक है और आरोपियों पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। 26 अक्टूबर 2024 को पुलिस की गश्त टीम को सूचना मिली थी।
सूचना के आधार पर पुलिस ने साहा थाना क्षेत्र के मिट्ठापुर गांव के पास एक घर में दबिश दी। मौके पर पुलिस ने अर्जुन, सोनू और राजेश कुमार नाम के तीन युवकों को पकड़ा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामला बेहद गंभीर है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत के लिए दोहरी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। अदालत ने पाया कि फिलहाल ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह माना जा सके कि आरोपी निर्दोष हैं या वे भविष्य में दोबारा अपराध नहीं करेंगे। इन आधारों पर कोर्ट ने राजेश और सोनू की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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अंबाला सिटी। मादक पदार्थ तस्करी के मामले में एनडीपीएस की विशेष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने 1.75 क्विंटल गांजे की बरामदगी के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बरामद नशीले पदार्थ की मात्रा बहुत अधिक है और आरोपियों पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। 26 अक्टूबर 2024 को पुलिस की गश्त टीम को सूचना मिली थी।
सूचना के आधार पर पुलिस ने साहा थाना क्षेत्र के मिट्ठापुर गांव के पास एक घर में दबिश दी। मौके पर पुलिस ने अर्जुन, सोनू और राजेश कुमार नाम के तीन युवकों को पकड़ा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामला बेहद गंभीर है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत के लिए दोहरी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। अदालत ने पाया कि फिलहाल ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह माना जा सके कि आरोपी निर्दोष हैं या वे भविष्य में दोबारा अपराध नहीं करेंगे। इन आधारों पर कोर्ट ने राजेश और सोनू की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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