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Ambala News: यमुना के लिए आरोपी अजय वालिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:21 AM IST
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bail plea rejected
कोर्ट ने कहा— जांच प्रभावित हो सकती है, हरविलास हत्याकांड मामले में हुई सुनवाई
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। नारायणगढ़ के चर्चित बसपा नेता व वकील हरविलास हत्याकांड और विदेश में बैठे आरोपी वेंकट गर्ग को वित्तीय सहायता पहुंचाने के मामले में आरोपी अजय कुमार उर्फ अजय वालिया को अदालत से झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की अदालत ने आरोपी अजय वालिया की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण में आरोपी को जमानत देने से निष्पक्ष जांच बाधित हो सकती है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, नारायणगढ़ में हरविलास और अजय गर्ग के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। इस विवाद में नारायणगढ़ इलाके में गिरोह चलाने वाले आरोपी वेंकट गर्ग पर मध्यस्थता और समझौते के नाम पर 1.75 करोड़ रुपये लेने का आरोप है। जब समझौता सिरे नहीं चढ़ा, तो पैसे वापस करने के बहाने वेंकट गर्ग ने हरविलास को नारायणगढ़ के एक पार्क में बुलाया और किराए के शूटरों से उसकी हत्या करवाने का आरोप लगाया गया है। हत्या की वारदात (24 जनवरी 2025) के बाद आरोपी वेंकट गर्ग विदेश भाग गया और वहां से नारायणगढ़ के समृद्ध लोगों से रंगदारी मांगने लगा।
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खुलासे में सामने आया अजय वालिया का नाम
प्रत्यर्पण के जरिए भारत लाए जाने के बाद जब पुलिस ने वेंकट गर्ग से पूछताछ की, तो उसने खुलासा किया कि अजय वालिया और रजत सिंह उर्फ जांटी ने मोहित विग नाम के व्यक्ति से रंगदारी वसूलने में उसकी मदद की थी। इसके अलावा, अजय वालिया पर आरोपी वेंकट गर्ग को विदेश में रहने के दौरान अंकित उर्फ लकी के माध्यम से 5 लाख रुपये भेजने का भी आरोप है।
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अदालत में दी गई दलीलें

अजय वालिया के वकील ने तर्क दिया कि हरविलास की हत्या 24 जनवरी 2025 को हुई थी, जबकि रंगदारी की कथित घटना मार्च 2025 की है। दोनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध नहीं है। मोहित विग ने भी कभी पुलिस में रंगदारी की शिकायत दर्ज नहीं कराई। पुलिस द्वारा दाखिल सप्लीमेंट्री चालान में भी वालिया का नाम वांछित आरोपियों में नहीं था। सरकारी वकील आशीष शर्मा और शिकायतकर्ता के वकील ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी वेंकट गर्ग को विदेश में 5 लाख की वित्तीय सहायता देना, उसे शरण देने के समान है यदि आरोपी को अग्रिम जमानत मिलती है, तो पुलिस की निष्पक्ष जांच प्रभावित होगी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माना कि हालांकि हत्या और रंगदारी की घटनाएं अलग-अलग समय पर हुईं, लेकिन आरोपी वेंकट गर्ग को विदेश में पैसे भेजना उसे शरण देने का हिस्सा हो सकता है। न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल ने टिप्पणी की कि हत्या के षड्यंत्र और अन्य पहलुओं की जांच के लिए पुलिस को स्वतंत्र जांच का मौका मिलना चाहिए। आरोपी को अग्रिम जमानत देने से जारी जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है, इसलिए याचिका को खारिज किया जाता है
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