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Ambala News: बाबू राजेंद्र नाथ की दरियादिली वसीयत से थी गायब
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अंबाला सिटी। देश को मिक्सी की सौगात देने वाले बाबू राजेंद्र नाथ के दुनिया से जाने के बाद नया विवाद सामने आया। इस विवाद ने सीलाल इलेक्ट्रिकल्स के कर्मचारियों को आवाज उठाने पर मजबूर किया। एक दो दिन चले विवाद के बाद एक बार फिर बाबू राजेंद्र नाथ की छवि उभरकर सामने आई है। राजेंद्र नाथ ने दुनिया छोड़ने से पहले ही अपने कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित कर लिया था। ये खुलासा उनकी वसीयत से हुआ।
अक्सर होता है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों से काम लेने के बाद उन्हें भूल जाती हैं। मगर यह मामला उन सबसे अलग है। यहां कंपनी संस्थापक रहे राजेंद्र नाथ ने कर्मचारियों को अपने दुनिया छोड़ने से पहले उनकी मेहनत का ध्यान रखा। उन्होंने अपनी एक वसीयत बनाई, जिसमें वह अपने 10 वर्ष से अधिक कार्य कर चुके हर कर्मचारी को दो लाख रुपये बैंक खाते से देने की बात की। सिर्फ यही नहीं फर्श से अर्श तक की इस जीवन यात्रा में कदम से कदम पर साथ देने वाले कर्मचारियों का योगदान वे नहीं भूले। इसमें चमन वाटिका इंटरनेशनल स्कूल से सुनील को 10 लाख रुपये, राजकुमार राणा को 10 लाख, सूरज को 10 लाख, सेवादार छोटू को 10 लाख, परमार को पांच लाख, बरखाराम को पांच लाख रुपये देने की बात थी। मगर पारिवारिक विवाद के चलते उनकी इस मंशा को धूमिल करने की कोशिश है।
मामले में दो वसीयत, अधिवक्ता बोले- दो पेज गायब
हैरानी की बात यह है कि जब वसीयत के बारे में कर्मचारियों को पता लगा उन्होंने वसीयत निकालने के प्रयास किए। उन्हें अंबाला शहर की तहसील से एक वसीयत मिली, जिसमें जानकारी तो पूरी थी मगर जिन पेजों पर कर्मचारियों को रुपये देने की बात थी वही पेज गायब थे। उन्होंने जैसे-तैसे कर वसीयत की मूल कॉपी निकाली तो पता लगा कि बाबू राजेंद्र नाथ लाखों रुपये कर्मचारियों को देने की घोषणा कर गए हैं। इस मामले में जब वसीयत बनाने वाले अधिवक्ता आशीष सरीन से बात की। उन्होंने बताया कि गलती से वसीयत से कागज मिस हो गए। वह कागज परिवार के एक सदस्य के पास हैं। उनसे कई बार दस्तावेज देने की अपील की गई, मगर नहीं दिए। अगर वह दस्तावेज नहीं देते हैं तो अदालत के माध्यम से कर्मचारियों को राजेंद्र नाथ की मंशा के तहत उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।
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करीब 58 वर्ष पुरानी हैं कंपनी
सीलाल इलेक्ट्रिकल्स कंपनी करीब 58 वर्ष पुरानी है। कर्मचारी बताते हैं कि सीलाल इलेक्ट्रिकल्स और मेकेनिकल्स के संचालक राजेंद्र नाथ का 18 नवंबर 2022 को देहांत हो गया था। कंपनी मिक्सी के साथ, जूसर मिक्सर, हीटर और प्रेस बनाती है। इनका सामान विदेशों में भी एक्सपोर्ट होने के बाद आर्मी कैंटीन जैसे स्थानों पर भी काफी प्रचलित था। कई बड़ी कंपनियों भी इनसे उत्पाद लेती हैं। इसके साथ ही गोपी नाम से इनका खुद का ब्रांड भी है। संचालक राजेंद्र नाथ के देहांत के बाद कंपनी की बागडोर उत्तराधिकारी दोनों बेटियों के पास आ गई। कर्मचारियों की मानें तो इसके बाद से ही आपसी विवाद के कारण कंपनी का नाम भी बदला जा रहा है और कर्मचारियों को भी नई कंपनी में लगाया जाएगा। मगर कर्मचारियों की मांग है कि पुरानी कंपनी का पहले फंड उन्हें दिया जाए इसके बाद नए सिरे से नई कंपनी में भर्ती किया जाए।
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अक्सर होता है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों से काम लेने के बाद उन्हें भूल जाती हैं। मगर यह मामला उन सबसे अलग है। यहां कंपनी संस्थापक रहे राजेंद्र नाथ ने कर्मचारियों को अपने दुनिया छोड़ने से पहले उनकी मेहनत का ध्यान रखा। उन्होंने अपनी एक वसीयत बनाई, जिसमें वह अपने 10 वर्ष से अधिक कार्य कर चुके हर कर्मचारी को दो लाख रुपये बैंक खाते से देने की बात की। सिर्फ यही नहीं फर्श से अर्श तक की इस जीवन यात्रा में कदम से कदम पर साथ देने वाले कर्मचारियों का योगदान वे नहीं भूले। इसमें चमन वाटिका इंटरनेशनल स्कूल से सुनील को 10 लाख रुपये, राजकुमार राणा को 10 लाख, सूरज को 10 लाख, सेवादार छोटू को 10 लाख, परमार को पांच लाख, बरखाराम को पांच लाख रुपये देने की बात थी। मगर पारिवारिक विवाद के चलते उनकी इस मंशा को धूमिल करने की कोशिश है।
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मामले में दो वसीयत, अधिवक्ता बोले- दो पेज गायब
हैरानी की बात यह है कि जब वसीयत के बारे में कर्मचारियों को पता लगा उन्होंने वसीयत निकालने के प्रयास किए। उन्हें अंबाला शहर की तहसील से एक वसीयत मिली, जिसमें जानकारी तो पूरी थी मगर जिन पेजों पर कर्मचारियों को रुपये देने की बात थी वही पेज गायब थे। उन्होंने जैसे-तैसे कर वसीयत की मूल कॉपी निकाली तो पता लगा कि बाबू राजेंद्र नाथ लाखों रुपये कर्मचारियों को देने की घोषणा कर गए हैं। इस मामले में जब वसीयत बनाने वाले अधिवक्ता आशीष सरीन से बात की। उन्होंने बताया कि गलती से वसीयत से कागज मिस हो गए। वह कागज परिवार के एक सदस्य के पास हैं। उनसे कई बार दस्तावेज देने की अपील की गई, मगर नहीं दिए। अगर वह दस्तावेज नहीं देते हैं तो अदालत के माध्यम से कर्मचारियों को राजेंद्र नाथ की मंशा के तहत उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।
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करीब 58 वर्ष पुरानी हैं कंपनी
सीलाल इलेक्ट्रिकल्स कंपनी करीब 58 वर्ष पुरानी है। कर्मचारी बताते हैं कि सीलाल इलेक्ट्रिकल्स और मेकेनिकल्स के संचालक राजेंद्र नाथ का 18 नवंबर 2022 को देहांत हो गया था। कंपनी मिक्सी के साथ, जूसर मिक्सर, हीटर और प्रेस बनाती है। इनका सामान विदेशों में भी एक्सपोर्ट होने के बाद आर्मी कैंटीन जैसे स्थानों पर भी काफी प्रचलित था। कई बड़ी कंपनियों भी इनसे उत्पाद लेती हैं। इसके साथ ही गोपी नाम से इनका खुद का ब्रांड भी है। संचालक राजेंद्र नाथ के देहांत के बाद कंपनी की बागडोर उत्तराधिकारी दोनों बेटियों के पास आ गई। कर्मचारियों की मानें तो इसके बाद से ही आपसी विवाद के कारण कंपनी का नाम भी बदला जा रहा है और कर्मचारियों को भी नई कंपनी में लगाया जाएगा। मगर कर्मचारियों की मांग है कि पुरानी कंपनी का पहले फंड उन्हें दिया जाए इसके बाद नए सिरे से नई कंपनी में भर्ती किया जाए।