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Ambala News: संकेत बोर्ड पर कलाकारी, झाड़ूमाजरा गांव बना दिया झंडुमाजरा
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हाईवे पर धनौरा के बोर्ड अंकित गलत नाम धनौड़ा । संवाद
रमाकांत अत्रि
मुलाना। मुलाना क्षेत्र से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 344 सहित राज्य हाईवे साढौरा शाहाबाद पर लगे संकेत बोर्ड स्थानीय गांवों के नामों की पहचान को बिगाड़ रहे हैं। साइनबोर्ड पर गांवों के नाम गलत लिखे हैं, जिससे कि न केवल ग्रामीणों की भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि वाहन चालकों भटकना भी पड़ रहा है।
दोसड़का के पास धनौरा गांव का नाम धनौड़ा लिखा है। जबकि जहां बोर्ड लगा है वहां धनौरा गांव है ही नहीं। धनौरा गांव उस जगह से करीब छह किलोमीटर दूर है। इसी प्रकार मुलाना की सर्विस लेन पर लगे बोर्ड पर झाडूमाजरा गांव के नाम की जगह झंडुमाजरा लिखा है। जोकि गांव के नाम को बिगाड़ रहा है।
ऐसा ही कुछ होली अड्डे पर लगे बोर्ड पर भी है। यहां बुडियों गांव का नाम बुधियां लिखा है। जोकि सही नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि कोई गांव का नाम अनजाने में भी बिगाड़ता है तो गुस्सा आता है।
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ग्रामीण जता रहे रोष
ग्रामीण सचिन, रमेश, रोहन, विशाल का कहना है कि ये गलतियां गांवों के नामों की पहचान को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका कहना है कि बोर्ड हाईवे पर लगे है। इन्हें आम जनता के साथ साथ अधिकारी भी देखते है। इसके बावजूद लंबे समय से बोर्डों पर ये नाम गलत ही अंकित है। जोकि सरासर अनदेखी है। उन्होंने कहा कि गांवों और स्थानों के नाम सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि वहां के इतिहास और संस्कृति का प्रतीक होते हैं। इन नामों को सही लिखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
भ्रमित हो रहे वाहन चालक
यात्रा कर रहे लोग भी इन गलत संकेतकों से भ्रमित हो रहे हैं। गलत नाम की वजह से वाहन चालकों को बार-बार रुककर स्थानीय लोगों से रास्ता पूछना पड़ता है। कई बार तो वाहन चालक अपने गंतव्य से गलत रास्ते पर भी चले जाते हैं। इसमें समय की बर्बादी के साथ साथ बहुत ज्यादा परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।
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मुलाना। मुलाना क्षेत्र से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 344 सहित राज्य हाईवे साढौरा शाहाबाद पर लगे संकेत बोर्ड स्थानीय गांवों के नामों की पहचान को बिगाड़ रहे हैं। साइनबोर्ड पर गांवों के नाम गलत लिखे हैं, जिससे कि न केवल ग्रामीणों की भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि वाहन चालकों भटकना भी पड़ रहा है।
दोसड़का के पास धनौरा गांव का नाम धनौड़ा लिखा है। जबकि जहां बोर्ड लगा है वहां धनौरा गांव है ही नहीं। धनौरा गांव उस जगह से करीब छह किलोमीटर दूर है। इसी प्रकार मुलाना की सर्विस लेन पर लगे बोर्ड पर झाडूमाजरा गांव के नाम की जगह झंडुमाजरा लिखा है। जोकि गांव के नाम को बिगाड़ रहा है।
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ऐसा ही कुछ होली अड्डे पर लगे बोर्ड पर भी है। यहां बुडियों गांव का नाम बुधियां लिखा है। जोकि सही नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि कोई गांव का नाम अनजाने में भी बिगाड़ता है तो गुस्सा आता है।
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ग्रामीण जता रहे रोष
ग्रामीण सचिन, रमेश, रोहन, विशाल का कहना है कि ये गलतियां गांवों के नामों की पहचान को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका कहना है कि बोर्ड हाईवे पर लगे है। इन्हें आम जनता के साथ साथ अधिकारी भी देखते है। इसके बावजूद लंबे समय से बोर्डों पर ये नाम गलत ही अंकित है। जोकि सरासर अनदेखी है। उन्होंने कहा कि गांवों और स्थानों के नाम सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि वहां के इतिहास और संस्कृति का प्रतीक होते हैं। इन नामों को सही लिखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
भ्रमित हो रहे वाहन चालक
यात्रा कर रहे लोग भी इन गलत संकेतकों से भ्रमित हो रहे हैं। गलत नाम की वजह से वाहन चालकों को बार-बार रुककर स्थानीय लोगों से रास्ता पूछना पड़ता है। कई बार तो वाहन चालक अपने गंतव्य से गलत रास्ते पर भी चले जाते हैं। इसमें समय की बर्बादी के साथ साथ बहुत ज्यादा परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।

हाईवे पर धनौरा के बोर्ड अंकित गलत नाम धनौड़ा । संवाद