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शरीर पर रेंग रहे थे कीड़े: कमरे में कैद सिसकियां..दरवाजे पर पहरा देता अंधविश्वास, प्रिंस हार गया जिंदगी की जंग

Sat, 27 Dec 2025 11:21 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अंबाला सिटी
अमर उजाला नेटवर्क, अंबाला सिटी Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 27 Dec 2025 11:21 AM IST
सार

अंबाला में अंधविश्वास ने युवक की जान ले ली। युवक तीन साल तक जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा था। पड़ोसियों की मदद ठुकराने और डॉक्टर से दूरी बनाने वाले परिजनों की जिद ने आखिर प्रिंस को मौत की नींद के आगोश में सुला दिया।

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Ambala Tragedy Superstition Locked a Young Man in a Room for Years, 24-Year-Old Prince Loses Battle for Life
अंधविश्वास ने ली जान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अंबाला के नदी मोहल्ला में एक बंद कमरे में तीन साल तक मौत और जिंदगी के बीच जद्दोजहद चलती रही लेकिन बाहर पहरा दे रहे अंधविश्वास ने जिंदगी का रास्ता रोक दिया। कपड़ा मार्केट में काम करने वाले प्रिंस (24) की बीमारी को जब परिजनों ने ऊपरी साया मान लिया तो वहीं से उसकी मौत का काउंट डाउन शुरू हो चुका था। 
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पड़ोसियों की मदद ठुकराने और डॉक्टर से दूरी बनाने वाले परिजनों की जिद ने आखिर प्रिंस को मौत की नींद के आगोश में सुला दिया। जब शरीर सूखकर कांटा हो गया और हड्डियां जवाब दे गईं, तब जाकर यह खौफनाक दास्तां दुनिया के सामने आई।
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तीन साल पहले अचानक से प्रिंस की तबीयत खराब रहने लगी। परिजनों ने कुछ खास ध्यान नहीं दिया। बाद में जब हाथ-पैर चलना बंद हो गए तो उसे झाड़ फूंक के माध्यम से ही ठीक कराने में लगे रहे। लेकिन तब तक प्रिंस के शरीर की हालत और खराब हो गई और वह बेड पर ही आ गया। 
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प्रिंस को अलग-थलग कमरे में ही छोड़ दिया
करीब दो वर्ष पहले परिजनों ने डॉक्टर को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद से बेटे प्रिंस को अलग-थलग कमरे में ही छोड़ दिया। आसपास के लोग बताते हैं कि अगर कोई मदद करने भी जाता तो प्रिंस के परिजन उसे घर में घुसने नहीं देते थे।

कोई इलाज के लिए कहता तो कहते थे कि झाड़-फूंक से ही सही हो जाएगा। मगर दिन-प्रतिदिन हालात बिगड़ते गए और वीरवार को प्रिंस ने आखिरकार दम तोड़ दिया।

लोगों ने सूचना दी पहुंचा वंदे मातरम दल
वंदे मातरम दल के संस्थापक सदस्य भरत ने बताया कि बुधवार को एक व्यक्ति ने उनकी ओर से किए गए रेस्क्यू का वीडियो देख उनसे संपर्क किया। इसके बाद वह जब प्रिंस के घर गए तो परिजनों ने बात करने से ही मना कर दिया। इसके बाद जैसे-तैसे वह घर में दाखिल हुए तो हालात देखकर दंग रह गए। कमरे में प्रिंस काफी कमजोर हालत में पड़ा था और आसपास दो ट्राॅली भरकर कपड़े पड़े थे।

लोगों ने बताया कि प्रिंस के पिता कपड़ा मार्केट में एक दुकान में काम करते हैं और माता घरों में कपड़े साफ करती हैं। दोनों मिलकर 40 से 45 हजार रुपये कमाते हैं। भरत ने बताया कि प्रिंस की हालत देखकर लगता था कि उसे खाने को भी नहीं मिलता था। वह आठवीं कक्षा के बाद ही काम पर जाने लगा था।

शरीर पर रेंग रहे थे कीड़े
दल के सदस्यों ने बताया कि युवक के नाखून काफी बड़े हो चुके थे और बालों में कीड़े व जूं रेंग रहीं थी। शुक्रवार सुबह टीम ने रेस्क्यू करना था, मगर वीरवार रात ही युवक की मौत हो गई। परिवार के सदस्य घर में खाना भी कम ही बनाते थे। वह ज्यादातर बाहर ही खाना खाते थे, हालांकि इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। युवक के शव का शुक्रवार को पोस्टमार्टम करवाया गया।
 

घर में फैली थी गंदगी, नहीं थी साफ-सफाई
दल संस्थापक भरत सिंह ने बताया कि जिस बेड पर युवक लेटा हुआ था। उस बेड पर काफी गंदगी थी। लोगों को भी बाहर बदबू आती थी। छत पर भी गंदे कपड़ों का ढेर लगा था। परिजनों ने बताया कि करीब दो साल पहले डाॅक्टर से चेक करवाया था। उसके बाद से ही युवक बेड पर था। बेड पर प्रिंस की ऐसी हालत हो गई थी कि उसके शरीर पर सिर्फ हड्डियों का ही ढांचा बचा था। लंबे समय से वह सही तरीके से खाना भी नहीं खा पा रहा था।

जिला नागरिक अस्पताल में करवाया पोस्टमार्टम
शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शुक्रवार को प्रिंस का संस्कार कर दिया। चौकी प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि परिवार से कोई शिकायत नहीं मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही माैत के कारणों का पता चल पाएगा। इसके बाद आगामी कार्रवाई करवाई जाएगी। शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। वहीं, जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टर पीयूष ने बताया कि युवक के फेफड़ों में दिक्कत थी।
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