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Ambala News: कवि सम्मेलन में कविताओं का अंबालावासियों ने उठाया आनंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2024 10:28 PM IST
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Ambala residents enjoyed the poems in the kavi sammelan
अंबाला। अंबाला के ग्रेस पैलेस में प्रिंसिपल नंद लाल शर्मा ट्रस्ट अंबाला द्वारा प्रिंसिपल नंद लाल शर्मा की याद में अखिल भारतीय त्रिभाषीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें भारत भर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि और शायर शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता एसपी ओबरॉय ने की।
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इसके साथ साथ विशिष्ठ अतिथि के रूप में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी फरीदकोट के पूर्व वाइस चांसलर डाॅ. राज बहादुर, रिटायर्ड एयर मार्शल डाॅ़ आरके रान्याल ने भी शिरकत की। इनके अलावा विशेष अतिथि डाॅ़ जगमोहन ओबेरॉय, सैयद आसिफ रजा जाफरी भी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ पोएट्री जंक्शन के अध्यक्ष प्रो सतीश चंद्र ने आयोजक कमेटी और अतिथियों के सहयोग से की। इनके साथ साथ प्रिंसिपल नंद लाल शर्मा के एक विद्यार्थी कृष्ण मालिक ने अपने प्रधानाचार्य के योगदान को बताया। इसके बाद सतीश चंद्र ने कार्यक्रम का कार्यभार मुशायरे के नाजिम (संचालक) हम्जा बिलाल को सौंप दिया। सम्मेलन में हिंदी पंजाबी और उर्दू के शायर एवं कवियों ने अपनी शायरी और कविता से माहौल बना दिया।
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अंबाला के शायर रविंद्र शर्मा रवि ने पढ़ा सूफियाना मिजाज रखते हैं अपनी ठोकर पे ताज रखते हैं। वहीं अंबाला के ही पंजाबी कवि गुरचरण जोगी बोले : एस विषे ते गल नी होई, तां ही मुश्किल हल नी होई, रीझां नाल सुनाई सी जो, खुशी ओहना तों झल नी होई। इसके बाद निजामत कर रहे हम्जा बिलाल ने भी शेर पढ़े भरोसा भाइयों पर कर रहा हूं, वसीयत तक जुबानी चल रही है, लुटा दी जान हमने दोस्तों पर, रवायत खानदानी चल रही है।

पंजाबी शायर त्रिलोचन लोची ने अपना कलाम सुनाया सलीका, सूझ है उस दी बदौलत ते दित्ते सच्चे ने अलफाज मैनू रहे वसदी मेरे खाबां दी धरती के जिसने बख़शी है परवाज मैनू। पटियाला से आए परविंदर शोख ने पढ़ा कि ये मत पूछो कि सब कुछ पा के भी आखिर कमी क्या है, नहीं है जिंदगी में वो अगर तो जिंदगी क्या है। इसके बाद भोपाल से आईं कवियत्री अनु सपन ने अपनी कविताओं से समा बांधा। जलती है शम्मा जैसे तिल तिल पिघल पिघल के, काटी है रात हम ने करवट बदल-बदल के सुनाया।
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