{"_id":"66648d3ff600ff70140c21cd","slug":"ambala-mp-will-again-sit-on-the-opposition-bench-after-26-years-ambala-news-c-36-1-amb1002-124279-2024-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: अंबाला से सांसद 26 वर्ष बाद फिर बैठेंगे विपक्ष की बेंच पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: अंबाला से सांसद 26 वर्ष बाद फिर बैठेंगे विपक्ष की बेंच पर
विज्ञापन
अंबाला सिटी। 18वीं लोकसभा आम चुनाव में हुए मतदान की मतगणना के नतीजों में अंबाला (एससी आरक्षित) लोकसभा सीट से पूरे 15 वर्षों के बाद कांग्रेस पार्टी की जीत हुई है। इससे पूर्व वर्ष 2009 में अंबाला लोस सीट से कांग्रेस की कुमारी सैलजा सांसद बनी थीं।
इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार वरुण चौधरी ने जीत हासिल की है। अब तक के हालातों को देखते हुए लगता है कि उन्हें विपक्ष की बेंच पर बैठना होगा। 26 वर्ष बाद ऐसा हो रहा है कि अंबाला की जनता ने जिसको चुना उसकी पार्टी की सरकार केंद्र में नहीं होगी। चूंकि भाजपा ने स्वयं 240 लोकसभा सीटें ही जीती हैं जो लोकसभा में 272 के बहुमत के आंकड़े से 32 कम हैं। इसलिए इस बार मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार का गठन हो रहा है, जिसका शपथ ग्रहण नौ जून को होगा।
अंबाला ने जो दिया सांसद उसकी केंद्र में बनी सरकार
अधिवक्ता हेमंत कुमार बताते हैं कि 26 वर्षों बाद एक बार फिर ऐसा होगा कि अंबाला लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद भारतीय संसद में विपक्षी बेंचों पर बैठेंगे। गत पांच लोकसभा आम चुनावों (वर्ष 1999 से 2019 तक) में अंबाला लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद की ही पार्टी की केंद्र में सरकार बनी थी। वर्ष 1999 में जब भाजपा से रतन लाल कटारिया पहली बार अंबाला से लोकसभा सांसद बने तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन-राजग (एनडीए) की दूसरी सरकार बनी थी। इसी प्रकार वर्ष 2004 और 2009 में लगातार दो बार कांग्रेस से कुमारी सैलजा अंबाला सीट से सांसद बनी, तब केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन-प्रथम एवं द्वितीय सत्तासीन रहा। सैलजा 10 वर्षों तक केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं थी। उसके बाद वर्ष 2014 और 2019 में जब रतन लाल कटारिया निरंतर दो बार अंबाला से सांसद बने, तो केंद्र में मोदी सरकार सत्ता में आई। गत 72 वर्षो में यानी 17वीं लोकसभा आम चुनाव तक केवल पांच बार ऐसा हुआ जब अंबाला लोकसभा सीट से उस राजनीतिक पार्टी का सांसद निर्वाचित हुआ, जिसकी पार्टी की केंद्र में सरकार नहीं बन पाई थी।
विज्ञापन
ये हैं वे पांच बार के पूर्व सांसद, जो विपक्ष में बैठे
-वर्ष 1967 में जब चौथी लोकसभा आम चुनाव हुए, तब अंबाला लोकसभा सीट से भारतीय जन संघ के उम्मीदवार सूरजभान ने कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी पी. वती को करीब नौ हजार वोटों के अंतर से हराकर पहली बार इस सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। तब लोकसभा आम चुनाव के बाद देश में हालांकि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी थी।
-वर्ष 1980 में सातवीं लोकसभा आम चुनाव में भी अंबाला संसदीय सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार सूरजभान ने कांग्रेस के प्रत्याशी सोमनाथ को दो हजार वोटों के अंतर से हराकर दूसरी बार इस सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। उस समय भी केंद्र में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार ही बनी थी।
-वर्ष 1989 में नौवीं लोकसभा आम चुनाव अंबाला लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रामप्रकाश ने भाजपा के सूरजभान को करीब 23 हजार वोटों के अंतर से हराकर तीसरी बार इस सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। उस समय भी केंद्र में वीपी सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा-वाम मोर्चा की सरकार बनी थी, जिसे भाजपा के बाहर से समर्थन दिया था।
-चौथी बार वर्ष 1996 लोकसभा आम चुनाव में जब अंबाला सीट से भाजपा के सूरजभान कांग्रेस के शेर सिंह को 87 हजार वोटों से हराकर चौथी बार सांसद निर्वाचित हुए तो वैसे तो केंद्र में अटल बिहार वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में पहली बार भाजपा सत्ता में आई परंतु वह सरकार केवल 13 दिन ही चल पाई थी। जून, 1996 में पहले एचडी देवेगौड़ा और फिर अप्रैल, 1997 में इंद्रकुमार गुजराल के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा की सरकार केंद्र में बनी।
- पांचवीं बार वर्ष 1998 में हुए बारहवीं लोकसभा आम चुनाव में बसपा के अमन कुमार नागरा भाजपा के सूरजभान को मात्र 2864 वोटों से पराजित कर पहली बार अंबाला लोकसभा सीट सांसद बने थे हालांकि उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में और भाजपा की अगुवाई में पहली राजग (एनडीए) सरकार बनी थी जो केवल 13 महीने ही चल सकी थी।
विज्ञापन
इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार वरुण चौधरी ने जीत हासिल की है। अब तक के हालातों को देखते हुए लगता है कि उन्हें विपक्ष की बेंच पर बैठना होगा। 26 वर्ष बाद ऐसा हो रहा है कि अंबाला की जनता ने जिसको चुना उसकी पार्टी की सरकार केंद्र में नहीं होगी। चूंकि भाजपा ने स्वयं 240 लोकसभा सीटें ही जीती हैं जो लोकसभा में 272 के बहुमत के आंकड़े से 32 कम हैं। इसलिए इस बार मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार का गठन हो रहा है, जिसका शपथ ग्रहण नौ जून को होगा।
विज्ञापन
अंबाला ने जो दिया सांसद उसकी केंद्र में बनी सरकार
अधिवक्ता हेमंत कुमार बताते हैं कि 26 वर्षों बाद एक बार फिर ऐसा होगा कि अंबाला लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद भारतीय संसद में विपक्षी बेंचों पर बैठेंगे। गत पांच लोकसभा आम चुनावों (वर्ष 1999 से 2019 तक) में अंबाला लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद की ही पार्टी की केंद्र में सरकार बनी थी। वर्ष 1999 में जब भाजपा से रतन लाल कटारिया पहली बार अंबाला से लोकसभा सांसद बने तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन-राजग (एनडीए) की दूसरी सरकार बनी थी। इसी प्रकार वर्ष 2004 और 2009 में लगातार दो बार कांग्रेस से कुमारी सैलजा अंबाला सीट से सांसद बनी, तब केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन-प्रथम एवं द्वितीय सत्तासीन रहा। सैलजा 10 वर्षों तक केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं थी। उसके बाद वर्ष 2014 और 2019 में जब रतन लाल कटारिया निरंतर दो बार अंबाला से सांसद बने, तो केंद्र में मोदी सरकार सत्ता में आई। गत 72 वर्षो में यानी 17वीं लोकसभा आम चुनाव तक केवल पांच बार ऐसा हुआ जब अंबाला लोकसभा सीट से उस राजनीतिक पार्टी का सांसद निर्वाचित हुआ, जिसकी पार्टी की केंद्र में सरकार नहीं बन पाई थी।
विज्ञापन
ये हैं वे पांच बार के पूर्व सांसद, जो विपक्ष में बैठे
-वर्ष 1967 में जब चौथी लोकसभा आम चुनाव हुए, तब अंबाला लोकसभा सीट से भारतीय जन संघ के उम्मीदवार सूरजभान ने कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी पी. वती को करीब नौ हजार वोटों के अंतर से हराकर पहली बार इस सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। तब लोकसभा आम चुनाव के बाद देश में हालांकि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी थी।
-वर्ष 1980 में सातवीं लोकसभा आम चुनाव में भी अंबाला संसदीय सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार सूरजभान ने कांग्रेस के प्रत्याशी सोमनाथ को दो हजार वोटों के अंतर से हराकर दूसरी बार इस सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। उस समय भी केंद्र में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार ही बनी थी।
-वर्ष 1989 में नौवीं लोकसभा आम चुनाव अंबाला लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रामप्रकाश ने भाजपा के सूरजभान को करीब 23 हजार वोटों के अंतर से हराकर तीसरी बार इस सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। उस समय भी केंद्र में वीपी सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा-वाम मोर्चा की सरकार बनी थी, जिसे भाजपा के बाहर से समर्थन दिया था।
-चौथी बार वर्ष 1996 लोकसभा आम चुनाव में जब अंबाला सीट से भाजपा के सूरजभान कांग्रेस के शेर सिंह को 87 हजार वोटों से हराकर चौथी बार सांसद निर्वाचित हुए तो वैसे तो केंद्र में अटल बिहार वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में पहली बार भाजपा सत्ता में आई परंतु वह सरकार केवल 13 दिन ही चल पाई थी। जून, 1996 में पहले एचडी देवेगौड़ा और फिर अप्रैल, 1997 में इंद्रकुमार गुजराल के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा की सरकार केंद्र में बनी।
- पांचवीं बार वर्ष 1998 में हुए बारहवीं लोकसभा आम चुनाव में बसपा के अमन कुमार नागरा भाजपा के सूरजभान को मात्र 2864 वोटों से पराजित कर पहली बार अंबाला लोकसभा सीट सांसद बने थे हालांकि उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में और भाजपा की अगुवाई में पहली राजग (एनडीए) सरकार बनी थी जो केवल 13 महीने ही चल सकी थी।