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Ambala News: तीन साल के विवाद के बाद क्षत्रिय सभा की नई कार्यकारिणी ने संभाला कार्यभार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 02:46 AM IST
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After a three-year dispute, the new executive committee of the Kshatriya Sabha has assumed charge.
कुरुक्षेत्र। प्रमाण-पत्र दिखाते नवनियुक्त प्रधान मोहन सिंह राणा। संवाद
कुरुक्षेत्र। लंबे समय से कानूनी विवादों में फंसे क्षत्रिय सभा कुरुक्षेत्र के चुनाव को लेकर सोमवार को नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के छह जुलाई के आदेश के बाद प्रशासन ने 23 जून को घोषित चुनाव परिणामों को प्रभावी मानते हुए सभी निर्वाचित पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों को निर्वाचन प्रमाणपत्र जारी कर दिए। प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद नवगठित कार्यकारिणी ने विधिवत कार्यभार संभाल लिया।
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क्षत्रिय सभा के चुनाव नौ अप्रैल 2023 को संपन्न हुए थे, लेकिन सदस्यता विवाद के चलते मतगणना प्रक्रिया पर अदालत ने रोक लगा दी थी। करीब तीन वर्ष तक चले कानूनी विवाद के बाद 23 जून को प्रशासन ने मतगणना कर परिणाम घोषित किए थे, जिसमें मोहन सिंह राणा को प्रधान निर्वाचित किया गया था। हालांकि कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उस समय निर्वाचित उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र जारी नहीं किए गए थे।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से सभी निर्वाचित पदाधिकारियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। प्रमाणपत्र प्राप्त करने वालों में प्रधान मोहन सिंह राणा, सचिव सुगमपाल राणा, उपप्रधान नरेश चौहान, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र राणा और सहसचिव मोहकम मुढाढ़ शामिल हैं। इसके अलावा कार्यकारिणी के सदस्यों को भी निर्वाचन प्रमाणपत्र दिए गए।
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प्रमाणपत्र मिलने के बाद नई कार्यकारिणी ने सेक्टर-सात स्थित महाराणा प्रताप स्कूल परिसर में पहुंचकर कार्यभार संभाला। प्रधान मोहन सिंह राणा ने कहा कि समाज ने जिस विश्वास के साथ जिम्मेदारी सौंपी है, उसका पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निर्वहन किया जाएगा। उन्होंने समाज की संस्कृति, संस्कार, शिक्षा और सामाजिक एकता को मजबूत करने को प्राथमिकता बताया।



सदस्यता विवाद से शुरू हुआ था मामला
क्षत्रिय सभा का विवाद वर्ष 2013 के बाद सदस्यता प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ था। नए सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां उठाई गई। वर्ष 2021 में सदस्यता के लिए 1325 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी जांच के बाद प्रशासन ने 845 सदस्यों की मतदाता सूची तैयार की। इसी सूची के आधार पर नौ अप्रैल 2023 को चुनाव हुए थे। बाद में सदस्यता और चुनाव प्रक्रिया को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। 24 अप्रैल के आदेश के तहत नियुक्त अधिकृत प्राधिकारी ने 19 जून को 845 सदस्यों की वैधता को स्वीकार करते हुए चुनाव प्रक्रिया को सही माना। इसके बाद 23 जून को परिणाम घोषित किए गए। हालांकि चुनाव और सदस्यता विवाद से जुड़ी मूल याचिकाओं पर हाईकोर्ट में अंतिम निर्णय अभी लंबित है। अदालत ने प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को अंतिम फैसले के अधीन रखा है।
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