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Ambala News: टांगरी पर कब्जा रोकने के लिए मुख्यालय पर अटकी धारा 45 की कार्रवाई

Fri, 21 Aug 2026 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Fri, 21 Aug 2026 02:17 AM IST
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Action under Section 45 stalled at headquarters, delaying measures to prevent encroachment on the Tangri.
माई सिटी रिपोर्टर
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अंबाला। कैंट क्षेत्र में टांगरी नदी अब लगभग हर साल यहां 40 कॉलोनियों में रहने वाले 20 हजार से अधिक लोगों को प्रभावित कर रही है। 20 साल पहले यह नदी काफी चौड़ी थी और पानी के वेग को झेल सकती थी। तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन यह नदी हजारों लोगों के लिए नुकसान की बड़ी वजह बन जाएगी। वर्ष 2023 और 2025 में बाढ़ जैसे हालात के बाद यह एक बड़ी समस्या बन गई है। इसके लिए हाल ही में नहरी विभाग ने एक सख्त कदम उठाया।
उन्होंने नदी में और कब्जे न हों और अवैध रूप से बने निर्माणों पर कार्रवाई के लिए हरियाणा कैनाल एवं ड्रेनेज एक्ट की धारा 45 की मंजूरी के लिए अपने मुख्यालय को लिखा। अभी तक यह फाइल मुख्यालय और सरकार के स्तर पर पिछले कुछ महीनों से अटकी हुई है। अब यहां संपत्तियों की रजिस्ट्रियां तो नहीं हो रहीं मगर निर्माण धड़ल्ले से चल रहे हैं। यह हालात तब हैं जब कैबिनेट मंत्री अनिल विज मुख्य सचिव को यहां के हालात बयां कर चुके हैं।
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प्रॉपर्टी डीलरों ने 35 साल पहले बेचे थे प्लॉट
जानकार बताते हैं कि लगभग 35 साल पहले टांगरी नदी काफी चौड़ी होती थी। तब प्रॉपर्टी डीलरों की नजर पड़ी और उन्होंने यहां पर प्लॉटिंग शुरू कर दी। उन्होंने ऐसे तबके को चिह्नित किया जो मध्यमवर्गीय या उससे कम आर्थिक स्थिति वाले थे।
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ऐसे लोगों को 2 हजार रुपये से तीन हजार रुपये गज में जमीन बेच दी। तहसील के अधिकारियों के अनुसार, पॉवर ऑफ अटॉर्नी का पेंच फंसाकर हिमाचल प्रदेश के बद्दी से रजिस्ट्री करा दी। कईयों ने तो बिना रजिस्ट्री के ही यहां पर कॉलोनियां बना लीं। मौजूदा समय में यहां लगभग 40 छोटी बड़ी कॉलोनियां हैं। यह सभी नदी की जद में ही बनी हैं। लोगों ने इसलिए भी विश्वास कर लिया क्योंकि वर्ष 1995 में ही यहां अधिक पानी आया था। इसके बाद सीधा वर्ष 2009-10 में पानी आया।

विभागों ने अवैध इलाके में ही दे दी बिजली पानी की सुविधा
अंबाला कैंट तहसील में टांगरी नदी के आसपास का इलाका हमेशा से ही अधिसूचित था। यहां सिर्फ खेती की और सरकारी नदी की जमीन थी। जब कॉलोनियां बसती गईं तो विभाग ने लोगों को बिजली पानी और अन्य सुविधाएं देनी शुरू कर दीं। विकास भी यहां तेजी से दौड़ने लगा। ऐसे में एक बड़ा वोट बैंक भी यहां तैयार हो गया, जिस पर राजनीतिक दलों की नजर भी रही।

वर्ष 2023 ने विभागों की नींद तोड़ी
वर्ष 2023 से पहले टांगरी नदी हमेशा से ही बारिश में बहती थी मगर जलस्तर कम होता था। ऐसे में लोग निश्चिंत थे। फिर वर्ष 2023 में अंबाला की नदियों में ऐसी बाढ़ आई कि प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए। सेना को मदद के लिए आना पड़ा। सैकड़ों लोग सड़कों पर आ गए। लाखों का नुकसान हो गया। तब जाकर प्रशासन को समझ में आया कि यह एक बड़ी समस्या बन गया है। इसके बाद ही सिंचाई विभाग, खनन विभाग आदि ने तमाम मंजूरियों के बाद नदी के तल की खोदाई कराई। जिससे नदी और गहरी हो सके। मगर 2025 में फिर से नदी ने रौद्र रूप दिखाया और आसपास के क्षेत्र को जलमग्न कर दिया। पास के ही इंडस्ट्रियल एरिया में कारोबारियों को दो बार में करीब एक हजार करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद इस साल दो बार नदी का पानी कॉलोनियों में घुसा है।

वर्तमान में धड़ल्ले से हो रहा निर्माण
लगातार बाढ़ जैसे हालात बनने के बावजूद प्रशासनिक तालमेल इतना कमजोर है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नहरी विभाग ने इस बार बचाव के लिए तटबंध बनाया, मगर वह अस्थायी समाधान है। इसका प्रतिफल यह हुआ कि इंडस्ट्रियल एरिया, रामपुरसरसेहड़ी की तरफ तो पानी नहीं गया मगर बांध के दूसरी तरफ महेश नगर का क्षेत्र खतरे में आ गया। यह स्थिति तब है जब वर्ष 2023 और 2025 जितना जलस्तर नहीं हुआ है। इतने नुकसान के बावजूद टांगरी की जद में बने प्लॉटों व भवनों पर निर्माण चल रहा है। कमर्शियल प्रतिष्ठान बनते जा रहे हैं। कुछ समय पहले नहरी विभाग ने इस क्षेत्र को धारा 45 के तहत लाने के लिए फाइल मुख्यालय में भेजी थी जो अभी तक अटकी पड़ी है।

क्या कहती है धारा 45
हरियाणा नहर एवं जल निकासी अधिनियम की धारा 45 के तहत नदी के बहाव को सुचारू रखने और बाढ़ के खतरे को रोकने के लिए नदी के आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माण व अतिक्रमण पर रोक लगाई जाती है।

वर्जन---------
टांगरी में रहने वाले लोगों को बार-बार सचेत किया गया है। यहां अवैध निर्माण को लेकर धारा 45 के तहत कार्रवाई के लिए फाइल मुख्यालय में लंबित है। इस मंजूरी के मिलने के बाद ही कार्रवाई हो सकेगी।--------मनीष भारद्वाज, एसई, सिंचाई एवं नहरी विभाग

यह क्षेत्र अवैध है। हम यहां पर रजिस्ट्री नहीं करते हैं। कुछ लोगों ने पूर्व में पॉवर ऑफ अटॉर्नी पर हिमाचल प्रदेश के बद्दी से रजिस्ट्री कराई हैं। हमारे यहां इस क्षेत्र की कोई रजिस्ट्री नहीं हो रही है।----------आशीष, नायब तहसीलदार, अंबाला कैंट


पहले यह जमीन जमींदारों की मिल्कियत की थीं। इसके बाद प्रॉपर्टी डीलरों ने जमीन खरीद ली। जमीन के टुकड़े कर प्लॉट बनाकर आगे बिकती रहीं। यहां कई लोगों के पास रजिस्ट्रियां भी हैं। सरकार ने यहां लोगों को बसाने में काफी सुविधाएं दीं। यहां संपत्तियां अवैध नहीं हैं। कैंट तहसील से ही लोगों की रजिस्ट्री और इंतकाल तक हुए हैं।----------ओंकार नाथी, प्रधान,
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