{"_id":"53-62619","slug":"Ambala-62619-53","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार हजार स्ट्रीट लाइटों के साथ दो सौ सफाईकर्मी भी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार हजार स्ट्रीट लाइटों के साथ दो सौ सफाईकर्मी भी
Ambala
Updated Thu, 27 Feb 2014 05:31 AM IST
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अंबाला सिटी। म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला की सदन की बैठक में जहां एजेंडे को तो अगली बैठक के लिए पेंडिंग रख लिया गया, मगर स्ट्रीट लाइट और सफाई के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों की यही शिकायत थी कि शहर और छावनी में स्ट्रीट लाइटों और गंदगी के बुरे हालात है, जिस वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी को लेकर पार्षदों ने सदन में खासा हंगामा किया। इस हंगामे के बीच दो प्रस्ताव पारित किए, जिसमें 20 वार्डों के लिए चार हजार स्ट्रीट लाइटों और 10-10 सफाई कर्मियों की 20 और टीमें गठित करने की बात कही।
हर वार्ड को मिलेंगे 200 स्ट्रीटें
दरअसल, सिटी के पार्षद दलजीत सीटू भाटिया, दिलीप बिट्टू, हिम्मत सिंह, पुष्पेंद्र हरीश ने स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसी के चलते डीसी अंबाला और मेयर ने सभी पार्षदों की सहमति से ये प्रस्ताव पारित किया कि 20 वार्डों में 4000 स्ट्रीट लाइटें खरीदी जाएंगी। लेकिन तभी स्ट्रीट लाइटों की खरीद पर बहसबाजी शुरू हो गई। पार्षद अफसरों पर खरीद में लापरवाही करने का आरोप लगाते रहे और कुछ पार्षद तो आपस में ही इसी मुद्दे के लिए उलझ गए। पार्षद दलजीत सीटू ने बताया कि उन्होंने पहले ही स्ट्रीट लाइट घोटाले की शिकायत पूर्व डीसी को दो जनवरी को दी थी, जिस पर अभी तक जांच पेंडिंग है। उसमें उन्होंने कहा था कि एमसीए अफसरों ने मिलीभगत के चलते दोगुने दामों पर स्ट्रीट लाइटें खरीद ली है। उनके इस आपत्ति उठाने पर एमसीए को 75 हजार रुपये का फायदा भी हुआ। लेकिन यदि इसकी विजिलेंस जांच कराई जाए तो ये बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। डीसी डॉ. साकेत कुमार ने उन्हें आस्वश्त किया कि उनकी पहली शिकायत की जांच चल रही है और आगे जो स्ट्रीट लाइटें खरीदी जाएंगी, उसमें पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी।
मशीनों से होंगे नाले साफ
सफाई के मुद्दे पर पार्षद सुरेंद्र बिंद्रा डब्बू, ललिता प्रसाद, डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल, दर्शना मेहता, सोनिया रानी, स्वर्ण कौर, परविंद्र सिंह और चित्रा सरवारा ने ऐतराज जताया। पार्षदों का कहना था कि सफाई कर्मी संतोषजनक काम नहीं कर रहे हैं और अफसरों को सफाई के झूठे आंकड़े पेश कर रहे हैं। इसी बात को लेकर सदन में काफी हंगामा हुआ। डीसी ने सफाई करवाए जाने की कर्मचारी रिपोर्ट की क्रास चेकिंग वार्ड पार्षदों से पूछकर की। पार्षदों ने बताया कि उनके वार्ड में सफाई कर्मी कितने हैं, मालूम ही नहीं, सफाई कर्मी न उनकी बात सुनते हैं, जबकि नाले और नालियों की सफाई केवल ऊपर-ऊपर करके चले जाते हैं और गाद नीचे जमी रह जाती है। इस हंगामे के बाद यह तय किया कि जितने भी कैंट और सिटी के बड़े नाले हैं, उसकी सफाई मशीनों से कराई जाएगी, जबकि हर वार्ड में 10-10 सफाईकर्मी की 20 टीमें पार्षद की निगरानी में सफाई करवाएगी। पार्षद सुरेंद्र बिंद्रा डब्बू ने बीडी फ्लोर मील के पीछे अभी तक बरसाती पानी में डूबी 35 कॉलोनियों का मुद्दा उठाया। डीसी ने सचिव को वहां नियमित रूप से पंप लगाकर पानी निकलवाने के निर्देश दिए।
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कैंट सचिव के खिलाफ पार्षदों में गुस्सा
पार्षदों ने बैठक में कैंट के सचिव केके यादव के खिलाफ भी मोर्चा खोलते हुए सिटी सचिव एसके यादव को कैंट में शिफ्ट करने की मांग की। इसी मुद्दे पर डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल की डीसी से बहस तक हो गई। डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल, ललिता प्रसाद और दिलीप बिट्टू ने डीसी के समक्ष सचिव केके यादव के व्यवहार को जनविरोधी बताया। उन्होंने साफ कहा कि उनके व्यवहार से जनप्रतिनिधि ही नहीं, जनता भी बहुत ज्यादा दुखी है, क्योंकि वे किसी भी बात का संतोषजनक उत्तर देना तो दूर, मुद्दे पर बात ही नहीं करते। लोग व जनप्रतिनिधि कोई समस्या उनके समक्ष रखते हैं तो वे उसे टरकाने का प्रयास करते हैं। कैंट सचिव की बात पर डीसी अंबाला ने पार्षदों को आश्वस्त करते हुए कैंट सचिव को बैठक में ही अपने व्यवहार में सुधार लाने की हिदायत दी। उधर, केके यादव ने कहा कि वह सभी को संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं और वह अपने व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करेंगे।
बिना रिश्वत नहीं होता काम!
पार्षद दलजीत सिंह सीटू ने एमसीए की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े करते हुए सदन में साफ कह दिया कि यहां एमसीए में बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता। म्यूटेशन, नक्शों से लेकर अब एनओसी जारी करने तक कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं हो रहा है। एमसीए में जो कांट्रेक्ट पर कर्मचारी रखे हैं, उनके माध्यम से एमसीए अफसर और कर्मचारी लोगों से काम की एवज में मोटी रिश्वत ले रहे हैं। पार्षद ने डीसी से मांग की कि वह एमसीए में ऐसे बोर्ड लगाएं, जिस पर लिखा जाए कि यदि कोई कर्मचारी लोगों से रिश्वत मांगता है, तो उसकी शिकायत डीसी या विजिलेंस अफसरों से की जाए। डीसी ने पार्षद की बात को पूरी गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया।
फिर लगा दी लालबत्ती
सुप्रीम कोर्ट ने लालबत्ती व नीलीबत्ती के संबंध में दिए आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए दिलीप चावला ने मेयर रमेश लाल मल की गाड़ी पर लालबत्ती लगा दी। सदन के भीतर भी इस बात को उठाया, मगर डीसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया, मगर बिट्टू ने सदन से बाहर आकर लालबत्ती मेयर की गाड़ी के अंदर से निकालकर गाड़ी के ऊपर लगा दी। तर्क ये दिया कि अभी तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अधिसूचना अंबाला नहीं पहुंची है। जबकि मेयर ने आदेश जारी होते ही सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए अपनी लालबत्ती उतार दी थी।
बिना पूछे बनाई सबकमेटी, एजेंडा पेंडिंग
पार्षदों ने गठित की सब कमेटियों पर भी ऐतराज जताते हुए कहा कि एमसीए की ओर से जो आठ सब कमेटियां बनाई गई है, उस पर पार्षदों से चरचा ही नहीं की गई, इसलिए उन्हें इस पर कड़ा ऐतराज है। इसी ऐतराज के चलते सब कमेटियां का एजेंडा फिलहाल सदन में बहस के लिए पेंडिंग रख लिया है।
सुसाइड नोट झूठा, एनआरआई पति बरी
ट्रेन के आगे पत्नी ने कूदकर की थी आत्महत्या
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अदालत ने एनआरआई पति को राहत दी है। अदालत में तमाम गवाहियों और जिरह के बाद ये साबित हो गया कि पत्नी का सुसाइड नोट झूठा था। ये साबित नहीं हो पाया कि जो सुसाइड नोट अदालत में पेश किया वह कब और किसने लिखा? इसी आधार पर अदालत ने एनआईआई पति को बरी कर दिया है।
जानकारी देते हुए एडवोकेट दिलबाग सिंह दानीपुर ने बताया कि जून 2013 में बलटाना में महिला ने पारिवारिक कारणों के चलते ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। इस मामले में सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। जिसमें पति सहित परिवार के देवर, सास, ससुर का नाम भी लिखा हुआ था। आरोपी पक्ष के वकील दिलबाग सिंह दानीपुर ने बताया कि मृतक महिला के भाई की तरफ से शिकायत दी गई थी। जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से 28 के करीब गवाहियां हुई और आरोपी पक्ष की ओर से चार गवाहियां हुई। लेकिन सात महीने तक चले केस सुसाइड नोट को अदालत ने नहीं माना और पति सहित अन्य परिवार के सदस्यों को बरी कर दिया।
यह था मामला
मृतक महिला का एनआरआई पति दुबई में रहता था और वह पत्नी लखविंद्र कौर के पास सोने के आभूषणों सहित पैसे भी भेजता था। लेकिन मृतक महिला सोना अपनी बहन को दे देती थी। जिस कारण पारिवारिक झगड़े के चलते पत्नी ने आत्महत्या कर ली। लेकिन अब इस मामले में एनआरआई पति दर्शन व अन्य परिवार के सदस्यों को बरी कर दिया है।
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हर वार्ड को मिलेंगे 200 स्ट्रीटें
दरअसल, सिटी के पार्षद दलजीत सीटू भाटिया, दिलीप बिट्टू, हिम्मत सिंह, पुष्पेंद्र हरीश ने स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसी के चलते डीसी अंबाला और मेयर ने सभी पार्षदों की सहमति से ये प्रस्ताव पारित किया कि 20 वार्डों में 4000 स्ट्रीट लाइटें खरीदी जाएंगी। लेकिन तभी स्ट्रीट लाइटों की खरीद पर बहसबाजी शुरू हो गई। पार्षद अफसरों पर खरीद में लापरवाही करने का आरोप लगाते रहे और कुछ पार्षद तो आपस में ही इसी मुद्दे के लिए उलझ गए। पार्षद दलजीत सीटू ने बताया कि उन्होंने पहले ही स्ट्रीट लाइट घोटाले की शिकायत पूर्व डीसी को दो जनवरी को दी थी, जिस पर अभी तक जांच पेंडिंग है। उसमें उन्होंने कहा था कि एमसीए अफसरों ने मिलीभगत के चलते दोगुने दामों पर स्ट्रीट लाइटें खरीद ली है। उनके इस आपत्ति उठाने पर एमसीए को 75 हजार रुपये का फायदा भी हुआ। लेकिन यदि इसकी विजिलेंस जांच कराई जाए तो ये बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। डीसी डॉ. साकेत कुमार ने उन्हें आस्वश्त किया कि उनकी पहली शिकायत की जांच चल रही है और आगे जो स्ट्रीट लाइटें खरीदी जाएंगी, उसमें पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी।
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मशीनों से होंगे नाले साफ
सफाई के मुद्दे पर पार्षद सुरेंद्र बिंद्रा डब्बू, ललिता प्रसाद, डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल, दर्शना मेहता, सोनिया रानी, स्वर्ण कौर, परविंद्र सिंह और चित्रा सरवारा ने ऐतराज जताया। पार्षदों का कहना था कि सफाई कर्मी संतोषजनक काम नहीं कर रहे हैं और अफसरों को सफाई के झूठे आंकड़े पेश कर रहे हैं। इसी बात को लेकर सदन में काफी हंगामा हुआ। डीसी ने सफाई करवाए जाने की कर्मचारी रिपोर्ट की क्रास चेकिंग वार्ड पार्षदों से पूछकर की। पार्षदों ने बताया कि उनके वार्ड में सफाई कर्मी कितने हैं, मालूम ही नहीं, सफाई कर्मी न उनकी बात सुनते हैं, जबकि नाले और नालियों की सफाई केवल ऊपर-ऊपर करके चले जाते हैं और गाद नीचे जमी रह जाती है। इस हंगामे के बाद यह तय किया कि जितने भी कैंट और सिटी के बड़े नाले हैं, उसकी सफाई मशीनों से कराई जाएगी, जबकि हर वार्ड में 10-10 सफाईकर्मी की 20 टीमें पार्षद की निगरानी में सफाई करवाएगी। पार्षद सुरेंद्र बिंद्रा डब्बू ने बीडी फ्लोर मील के पीछे अभी तक बरसाती पानी में डूबी 35 कॉलोनियों का मुद्दा उठाया। डीसी ने सचिव को वहां नियमित रूप से पंप लगाकर पानी निकलवाने के निर्देश दिए।
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कैंट सचिव के खिलाफ पार्षदों में गुस्सा
पार्षदों ने बैठक में कैंट के सचिव केके यादव के खिलाफ भी मोर्चा खोलते हुए सिटी सचिव एसके यादव को कैंट में शिफ्ट करने की मांग की। इसी मुद्दे पर डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल की डीसी से बहस तक हो गई। डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल, ललिता प्रसाद और दिलीप बिट्टू ने डीसी के समक्ष सचिव केके यादव के व्यवहार को जनविरोधी बताया। उन्होंने साफ कहा कि उनके व्यवहार से जनप्रतिनिधि ही नहीं, जनता भी बहुत ज्यादा दुखी है, क्योंकि वे किसी भी बात का संतोषजनक उत्तर देना तो दूर, मुद्दे पर बात ही नहीं करते। लोग व जनप्रतिनिधि कोई समस्या उनके समक्ष रखते हैं तो वे उसे टरकाने का प्रयास करते हैं। कैंट सचिव की बात पर डीसी अंबाला ने पार्षदों को आश्वस्त करते हुए कैंट सचिव को बैठक में ही अपने व्यवहार में सुधार लाने की हिदायत दी। उधर, केके यादव ने कहा कि वह सभी को संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं और वह अपने व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करेंगे।
बिना रिश्वत नहीं होता काम!
पार्षद दलजीत सिंह सीटू ने एमसीए की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े करते हुए सदन में साफ कह दिया कि यहां एमसीए में बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता। म्यूटेशन, नक्शों से लेकर अब एनओसी जारी करने तक कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं हो रहा है। एमसीए में जो कांट्रेक्ट पर कर्मचारी रखे हैं, उनके माध्यम से एमसीए अफसर और कर्मचारी लोगों से काम की एवज में मोटी रिश्वत ले रहे हैं। पार्षद ने डीसी से मांग की कि वह एमसीए में ऐसे बोर्ड लगाएं, जिस पर लिखा जाए कि यदि कोई कर्मचारी लोगों से रिश्वत मांगता है, तो उसकी शिकायत डीसी या विजिलेंस अफसरों से की जाए। डीसी ने पार्षद की बात को पूरी गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया।
फिर लगा दी लालबत्ती
सुप्रीम कोर्ट ने लालबत्ती व नीलीबत्ती के संबंध में दिए आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए दिलीप चावला ने मेयर रमेश लाल मल की गाड़ी पर लालबत्ती लगा दी। सदन के भीतर भी इस बात को उठाया, मगर डीसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया, मगर बिट्टू ने सदन से बाहर आकर लालबत्ती मेयर की गाड़ी के अंदर से निकालकर गाड़ी के ऊपर लगा दी। तर्क ये दिया कि अभी तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अधिसूचना अंबाला नहीं पहुंची है। जबकि मेयर ने आदेश जारी होते ही सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए अपनी लालबत्ती उतार दी थी।
बिना पूछे बनाई सबकमेटी, एजेंडा पेंडिंग
पार्षदों ने गठित की सब कमेटियों पर भी ऐतराज जताते हुए कहा कि एमसीए की ओर से जो आठ सब कमेटियां बनाई गई है, उस पर पार्षदों से चरचा ही नहीं की गई, इसलिए उन्हें इस पर कड़ा ऐतराज है। इसी ऐतराज के चलते सब कमेटियां का एजेंडा फिलहाल सदन में बहस के लिए पेंडिंग रख लिया है।
सुसाइड नोट झूठा, एनआरआई पति बरी
ट्रेन के आगे पत्नी ने कूदकर की थी आत्महत्या
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अदालत ने एनआरआई पति को राहत दी है। अदालत में तमाम गवाहियों और जिरह के बाद ये साबित हो गया कि पत्नी का सुसाइड नोट झूठा था। ये साबित नहीं हो पाया कि जो सुसाइड नोट अदालत में पेश किया वह कब और किसने लिखा? इसी आधार पर अदालत ने एनआईआई पति को बरी कर दिया है।
जानकारी देते हुए एडवोकेट दिलबाग सिंह दानीपुर ने बताया कि जून 2013 में बलटाना में महिला ने पारिवारिक कारणों के चलते ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। इस मामले में सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। जिसमें पति सहित परिवार के देवर, सास, ससुर का नाम भी लिखा हुआ था। आरोपी पक्ष के वकील दिलबाग सिंह दानीपुर ने बताया कि मृतक महिला के भाई की तरफ से शिकायत दी गई थी। जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से 28 के करीब गवाहियां हुई और आरोपी पक्ष की ओर से चार गवाहियां हुई। लेकिन सात महीने तक चले केस सुसाइड नोट को अदालत ने नहीं माना और पति सहित अन्य परिवार के सदस्यों को बरी कर दिया।
यह था मामला
मृतक महिला का एनआरआई पति दुबई में रहता था और वह पत्नी लखविंद्र कौर के पास सोने के आभूषणों सहित पैसे भी भेजता था। लेकिन मृतक महिला सोना अपनी बहन को दे देती थी। जिस कारण पारिवारिक झगड़े के चलते पत्नी ने आत्महत्या कर ली। लेकिन अब इस मामले में एनआरआई पति दर्शन व अन्य परिवार के सदस्यों को बरी कर दिया है।