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अंबाला की साइंस इंडस्ट्री पर ड्रैगन का खतरा!
Ambala
Updated Thu, 16 May 2013 05:31 AM IST
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अंबाला। देश की सबसे बड़ी साइंस सिटी को अब चीन से खतरा सताने लगा है। चीन के उद्यमियों ने अंबाला साइंस इंडस्ट्री के विदेशी मार्केट पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। पिछले साल चीन ने अंबाला साइंस इंडस्ट्री से बड़ा विदेशी आर्डर छीनकर करोड़ों को झटका दिया है। साइंस उद्यमी भी अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं, लेकिन चीन की चुनौतियों से पार पाना साइंस इंडस्ट्री के लिए थोड़ा मुश्किल रहेगा।
इस तरह है साइंस सिटी को खतरा
चीन ने अब विभिन्न आइटमों के साथ-साथ साइंस संबंधित शैक्षणिक उपकरणों का निर्माण भी बड़े पैमाने पर बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कई दशक पहले ये शैक्षणिक उपकरण चीन में भी अंबाला से ही सप्लाई किए जाते थे। लेकिन अब पिछले कुछ सालों से चीन ने भी इस काम में अपनी जोर आजमाइश शुरू की और विगत वर्ष अंबाला की साइंस सिटी को जबरदस्त झटका देते हुए 100 करोड़ के विदेशी आर्डर अंबाला साइंस इंडस्ट्री से छीन लिए। इसके लिए चीन की मजबूत मार्केटिंग और सामुदायिक मैन्युफैक्चरिंग से घटी लागत एक बड़ी वजह रही। छीनने वाले येे आर्डर मिडिल एशिया और अरब देशों के थे।
अंबाला साइंस सिटी के प्रयास
चीन की चुनौतियों से लड़ने के लिए अंबाला साइंस सिटी भी इस वक्त पूरी तरह से जूझ रही है। अंबाला में साइंस उद्यमियों की अंबाला साइंस इंस्ट्रूमेंटस मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन और दि साइंस अपरेट्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन दोनों ही अपने-अपने तरीकों से ये प्रयास कर रही है कि किस तरह से साइंस सिटी पर चीन के खतरे को कम किया जाए। इसके लिए उद्यमी ये कोशिश कर रहे हैं कि यहां एक बड़ा कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया जाए, जहां अंबाला के शैक्षणिक उपकरणों की क्वालिटी को बढ़ाया जाए और उसकी लागत को कम करने का प्रयास किया जाए।
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‘बिखराव’ भी चिंता का विषय
चीन से प्रतियोगिता करने के लिए अंबाला के साइंस उद्यमियों को यह तो समझ में आ गया है कि जब तक साइंस उद्यमी मिलकर काम सुनियोजित ढंग से नेशनल और इंटरनेशनल साइंस मार्केट के मिजाज को समझते हुए काम नहीं करेंगे, तब तक इस उद्योग में चीन से लड़ पाना मुश्किल होगा और चीन इस मार्केट को भी आने वाले कुछ सालों में खत्म कर देगा। ---
चीन से साइंस सिटी को एक बड़ा खतरा है, लेकिन इसके लिए प्रयास किया जा रहा है कि सभी उद्यमियों से मंथन कर इस स्पर्धा से लड़ा जाए। इसके लिए मैं खुद चीन विजिट करके आया हूं। चीन की मार्केटिंग और मैन्युफैक्चरिंग का तरीका बहुत स्ट्रांग है। कोशिश की जा रही है साइंस सिटी चीन के मुकाबले में स्ट्रांग बने
-राजीव अग्रवाल, सचिव, दि साइंस अपरेट्स मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन
---
एसोसिएशन कोशिश कर रही है कि चीन की चुनौतियों को देखते हुए साइंस उद्यमियों को भी इस लिहाज से तैयार किया जाए। बैठकों का दौर चल रहा है। इस बात पर रोजाना मंथन भी हो रहा है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर इसके लिए एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
-अश्वनी गोयल, पूर्व प्रधान, अंबाला साइंस इंस्ट्रूमेंटस मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन
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इस तरह है साइंस सिटी को खतरा
चीन ने अब विभिन्न आइटमों के साथ-साथ साइंस संबंधित शैक्षणिक उपकरणों का निर्माण भी बड़े पैमाने पर बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कई दशक पहले ये शैक्षणिक उपकरण चीन में भी अंबाला से ही सप्लाई किए जाते थे। लेकिन अब पिछले कुछ सालों से चीन ने भी इस काम में अपनी जोर आजमाइश शुरू की और विगत वर्ष अंबाला की साइंस सिटी को जबरदस्त झटका देते हुए 100 करोड़ के विदेशी आर्डर अंबाला साइंस इंडस्ट्री से छीन लिए। इसके लिए चीन की मजबूत मार्केटिंग और सामुदायिक मैन्युफैक्चरिंग से घटी लागत एक बड़ी वजह रही। छीनने वाले येे आर्डर मिडिल एशिया और अरब देशों के थे।
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अंबाला साइंस सिटी के प्रयास
चीन की चुनौतियों से लड़ने के लिए अंबाला साइंस सिटी भी इस वक्त पूरी तरह से जूझ रही है। अंबाला में साइंस उद्यमियों की अंबाला साइंस इंस्ट्रूमेंटस मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन और दि साइंस अपरेट्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन दोनों ही अपने-अपने तरीकों से ये प्रयास कर रही है कि किस तरह से साइंस सिटी पर चीन के खतरे को कम किया जाए। इसके लिए उद्यमी ये कोशिश कर रहे हैं कि यहां एक बड़ा कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया जाए, जहां अंबाला के शैक्षणिक उपकरणों की क्वालिटी को बढ़ाया जाए और उसकी लागत को कम करने का प्रयास किया जाए।
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‘बिखराव’ भी चिंता का विषय
चीन से प्रतियोगिता करने के लिए अंबाला के साइंस उद्यमियों को यह तो समझ में आ गया है कि जब तक साइंस उद्यमी मिलकर काम सुनियोजित ढंग से नेशनल और इंटरनेशनल साइंस मार्केट के मिजाज को समझते हुए काम नहीं करेंगे, तब तक इस उद्योग में चीन से लड़ पाना मुश्किल होगा और चीन इस मार्केट को भी आने वाले कुछ सालों में खत्म कर देगा। ---
चीन से साइंस सिटी को एक बड़ा खतरा है, लेकिन इसके लिए प्रयास किया जा रहा है कि सभी उद्यमियों से मंथन कर इस स्पर्धा से लड़ा जाए। इसके लिए मैं खुद चीन विजिट करके आया हूं। चीन की मार्केटिंग और मैन्युफैक्चरिंग का तरीका बहुत स्ट्रांग है। कोशिश की जा रही है साइंस सिटी चीन के मुकाबले में स्ट्रांग बने
-राजीव अग्रवाल, सचिव, दि साइंस अपरेट्स मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन
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एसोसिएशन कोशिश कर रही है कि चीन की चुनौतियों को देखते हुए साइंस उद्यमियों को भी इस लिहाज से तैयार किया जाए। बैठकों का दौर चल रहा है। इस बात पर रोजाना मंथन भी हो रहा है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर इसके लिए एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
-अश्वनी गोयल, पूर्व प्रधान, अंबाला साइंस इंस्ट्रूमेंटस मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन