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- पिछले दो सालों में लगाई 14 डेयरियां
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:20 AM IST
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देसी गाय की डेयरी खोलने पर 50 फीसदी अनुदान
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
देसी गाय के दूध को पौष्टिक और गुणकारी माना जाता है। किसान भी अब देसी गाय पालने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं सरकार की स्कीम के अंतर्गत किसान 50 प्रतिशत सब्सिडी पर डेयरी की स्थापना कर सकता है। विभाग की ओर से भी पिछले दो सालों में 14 डेयरी की स्थापना कराई जा चुकी है। साल 2015-16 में गांव छपरा में एक, गांव पंजोखरा में तीन और अंबाला सिटी में एक तो 2016-17 में गांव बढौली में दो, कुराली, भोलापुर, पंजोखरा और गांव चोरमस्तपुर, नाहन हाउस, समलेहड़ी में एक-एक डेयरी की स्थापना की गई है।
जिले भर में लिए सरकार की ओर से किसानों को इस पर पचास प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य पशुपालन के लिए भी सरकार द्वारा स्कीम लाई गई है।
जिला निदेशक पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि 2014 के बाद देसी गायों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लाई गई ताकि सभी को अच्छी गुणवत्ता का दूध मिल सके और किसानों को भी दूध से अधिक मुनाफा हो सके क्योंकि बाजार में देसी गायों के दूध की कीमत विदेशी नस्ल की गायों के दूध से अधिक है। जो कि किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
देसी गाय के दूध को पौष्टिक और गुणकारी माना जाता है। किसान भी अब देसी गाय पालने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं सरकार की स्कीम के अंतर्गत किसान 50 प्रतिशत सब्सिडी पर डेयरी की स्थापना कर सकता है। विभाग की ओर से भी पिछले दो सालों में 14 डेयरी की स्थापना कराई जा चुकी है। साल 2015-16 में गांव छपरा में एक, गांव पंजोखरा में तीन और अंबाला सिटी में एक तो 2016-17 में गांव बढौली में दो, कुराली, भोलापुर, पंजोखरा और गांव चोरमस्तपुर, नाहन हाउस, समलेहड़ी में एक-एक डेयरी की स्थापना की गई है।
जिले भर में लिए सरकार की ओर से किसानों को इस पर पचास प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य पशुपालन के लिए भी सरकार द्वारा स्कीम लाई गई है।
जिला निदेशक पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि 2014 के बाद देसी गायों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लाई गई ताकि सभी को अच्छी गुणवत्ता का दूध मिल सके और किसानों को भी दूध से अधिक मुनाफा हो सके क्योंकि बाजार में देसी गायों के दूध की कीमत विदेशी नस्ल की गायों के दूध से अधिक है। जो कि किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी।
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