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नागा बाबा के दर्शनों को एयरफोर्स स्टेशन में उमड़ा आस्था का सैलाब
Updated Mon, 12 Feb 2018 12:49 AM IST
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पुलिस, एयरफोर्स, सेना और इंटेलीजेंस की निगरानी में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
एयरफोर्स स्टेशन स्थित नागा पीर बाबा की दरगाह पर रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। साल में एक बार लगने वाले धार्मिक मेले के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पुलिस, एयरफोर्स, सेना और इंटेलीजेंस की निगरानी में बाबा के दर्शन किए। सुबह करीब पांच बजे एयरफोर्स स्टेशन का गेट खोला गया जो और शाम तक खुला रहा। हालांकि कुछ दिन पहले तक एयरफोर्स स्टेशन के गेट खोले जाने पर असमंजस बना हुआ था परंतु रक्षा मंत्रालय की हरी झंडी के बाद गेट खोले गए और श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
जहां दरगाह वह अतिसंवेदनशील क्षेत्र
सालाना मेले को लेकर कई दिन पहले ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। पुलिस, एयरफोर्स, सेना, इंटेलीजेंस समेत सभी सुरक्षा एजेंसियां हाईअलर्ट पर थीं। चप्पे चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। बताया जाता है कि एयरफोर्स स्टेशन में जिस जगह नागा पीर बाबा की दरगाह है वह काफी अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। इस कारण मेले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी हाईअलर्ट पर रहती हैं। हरियाणा के अलावा दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और पंजाब से भी श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए पहुंचे। एयरफोर्स स्टेशन के साथ लगते गांव धूलकोट की सीमा के नजदीक नागा पीर बाबा की दरगाह है। दरगाह में जाने के लिए साल में एक बार एयरफोर्स स्टेशन का गेट खोला जाता है।
सूखे कुएं में भर दिया था पानी
धूलकोट के रहने वाले मनोज सैनी ने बताया कि बुजुर्ग लोग बताते हैं कि पुरातन काल में गांव में एक फकीर बाबा आए थे और उनके साथ एक काले रंग का कुत्ता भी था। बाबा ने गांव में सूखे पड़े कुएं को पानी से भरकर चमत्कार कर दिया था। ये भी बताया जाता है कि बाबा पहले जिस गांव को छोड़कर आए थे, उनके आने के बाद वहां भयंकर आपदा आ गई थी। यहां आने के कुछ समय बाद बाबा ने यहीं देह त्याग दी थी। लोग बाबा की देह दफना रहे थे, इसी दौरान उनके साथ रहने वाले कुत्ते ने भी उसी गड्ढे में छलांग लगाकर जान दे दी थी। गांव के लोगों ने यहां बाबा की दरगाह के साथ ही कुत्ते की भी एक दरगाह यहां बना दी।
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1965 में पाक ने किया हमला तो हवाई पट्टी पर नहीं गिरा एक भी बम
यहां आने वाले लोगों की मान्यता है कि नागा बाबा एयरफोर्स स्टेशन के भी रक्षक हैं। वायुसेना भी बाबा की आध्यात्मिक शक्ति को खूब मानती है। साल 1965 में जब पाकिस्तान ने हमला किया था, तो पाकिस्तानी वायुसेना ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन की हवाई पट्टी को उड़ाने के लिए यहां बमबारी की थी। लेकिन एक भी बम पट्टी पर न गिरकर यहां से कुछ दूरी पर गिर गया था। तब से आज तक एयरफोर्स के अधिकारी भी बाबा की शक्ति के सामने नतमस्तक है।
लोगों के हुजूम को देखते हुए पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां भी बड़ी संख्या में तैनात रहीं। चप्पे चप्पे पर पुलिस लगी थी। सादे कपड़ों में भी सुरक्षाकर्मी हर आने जाने वाले पर नजर रखे हुए थे। पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी के चलते मेले का आयोजन काफी सफल तरीके से संपन्न हुआ। - अजैब सिंह, महेश नगर थाना प्रभारी
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
एयरफोर्स स्टेशन स्थित नागा पीर बाबा की दरगाह पर रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। साल में एक बार लगने वाले धार्मिक मेले के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पुलिस, एयरफोर्स, सेना और इंटेलीजेंस की निगरानी में बाबा के दर्शन किए। सुबह करीब पांच बजे एयरफोर्स स्टेशन का गेट खोला गया जो और शाम तक खुला रहा। हालांकि कुछ दिन पहले तक एयरफोर्स स्टेशन के गेट खोले जाने पर असमंजस बना हुआ था परंतु रक्षा मंत्रालय की हरी झंडी के बाद गेट खोले गए और श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
जहां दरगाह वह अतिसंवेदनशील क्षेत्र
सालाना मेले को लेकर कई दिन पहले ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। पुलिस, एयरफोर्स, सेना, इंटेलीजेंस समेत सभी सुरक्षा एजेंसियां हाईअलर्ट पर थीं। चप्पे चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। बताया जाता है कि एयरफोर्स स्टेशन में जिस जगह नागा पीर बाबा की दरगाह है वह काफी अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। इस कारण मेले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी हाईअलर्ट पर रहती हैं। हरियाणा के अलावा दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और पंजाब से भी श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए पहुंचे। एयरफोर्स स्टेशन के साथ लगते गांव धूलकोट की सीमा के नजदीक नागा पीर बाबा की दरगाह है। दरगाह में जाने के लिए साल में एक बार एयरफोर्स स्टेशन का गेट खोला जाता है।
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सूखे कुएं में भर दिया था पानी
धूलकोट के रहने वाले मनोज सैनी ने बताया कि बुजुर्ग लोग बताते हैं कि पुरातन काल में गांव में एक फकीर बाबा आए थे और उनके साथ एक काले रंग का कुत्ता भी था। बाबा ने गांव में सूखे पड़े कुएं को पानी से भरकर चमत्कार कर दिया था। ये भी बताया जाता है कि बाबा पहले जिस गांव को छोड़कर आए थे, उनके आने के बाद वहां भयंकर आपदा आ गई थी। यहां आने के कुछ समय बाद बाबा ने यहीं देह त्याग दी थी। लोग बाबा की देह दफना रहे थे, इसी दौरान उनके साथ रहने वाले कुत्ते ने भी उसी गड्ढे में छलांग लगाकर जान दे दी थी। गांव के लोगों ने यहां बाबा की दरगाह के साथ ही कुत्ते की भी एक दरगाह यहां बना दी।
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1965 में पाक ने किया हमला तो हवाई पट्टी पर नहीं गिरा एक भी बम
यहां आने वाले लोगों की मान्यता है कि नागा बाबा एयरफोर्स स्टेशन के भी रक्षक हैं। वायुसेना भी बाबा की आध्यात्मिक शक्ति को खूब मानती है। साल 1965 में जब पाकिस्तान ने हमला किया था, तो पाकिस्तानी वायुसेना ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन की हवाई पट्टी को उड़ाने के लिए यहां बमबारी की थी। लेकिन एक भी बम पट्टी पर न गिरकर यहां से कुछ दूरी पर गिर गया था। तब से आज तक एयरफोर्स के अधिकारी भी बाबा की शक्ति के सामने नतमस्तक है।
लोगों के हुजूम को देखते हुए पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां भी बड़ी संख्या में तैनात रहीं। चप्पे चप्पे पर पुलिस लगी थी। सादे कपड़ों में भी सुरक्षाकर्मी हर आने जाने वाले पर नजर रखे हुए थे। पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी के चलते मेले का आयोजन काफी सफल तरीके से संपन्न हुआ। - अजैब सिंह, महेश नगर थाना प्रभारी