{"_id":"67ca051fc305eadb2c0e60bd","slug":"70-year-old-ex-soldier-won-10-medals-including-three-gold-medals-ambala-news-c-36-1-amb1001-138702-2025-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: 70 वर्षीय भूतपूर्व सैनिक ने जीते 10 पदक, तीन स्वर्ण पर भी कब्जा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: 70 वर्षीय भूतपूर्व सैनिक ने जीते 10 पदक, तीन स्वर्ण पर भी कब्जा
विज्ञापन
धर्म सिंह
जलबेहड़ा। जहां एक तरफ कई युवा नशे व फास्ट-फूड में फंस कर अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अंबाला शहर के भानोखेड़ी गांव निवासी 70 वर्षीय सोहन सिंह संधू वरिष्ठ नागरिक की विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। वो अभी तक 10 पदक जीत चुके हैं और इनमें से तीन स्वर्ण पदक भी उनके नाम हैं।
उनके इस जज्बे को देखकर गांव वाले भी उनके मुरीद हो गए हैं। गांव के हर चौक-चौराहों पर उनके ही चर्चे हैं। सोहन सिंह ने बताया कि इसके अलावा वह अपने गुरुद्वारे और गांव के एक स्कूल में बच्चों को निशुल्क शिक्षा भी प्रदान कर रहे हैं। जबकि साल में एक बार नवंबर में बच्चों की खेल प्रतियोगिता भी आयोजित करवाते हैं। इतनी उम्र के बावजूद भी वह अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं।
सोहन सिंह ने बताया कि बदलते माहौल को लेकर उन्हें भावी पीढ़ी की चिंता थी। इसके चलते उन्होंने स्वयं से ही इस प्रकार के कार्य करने शुरू किए। हाल ही में उन्होंने यमुनानगर में आयोजित 6वीं हरियाणा राज्य मास्टर्स गेम्स एथलेटिक्स में हिस्सा लिया और इसमें उन्होंने 70 वर्षीय 100 मीटर दौड़ में प्रथम, लंबी कूद में प्रथम व शॉर्ट-पुट में भी प्रथम पुरस्कार हासिल किया। वर्तमान में उनके गांव के बच्चे शिक्षा के साथ खेलों में भी माहिर हो रहे हैं। उनके इस कार्य की गांव में हर जगह सराहना हो रही है।
विज्ञापन
गांव में तैयार किया खेल का मैदान
सोहन सिंह फौज से सेवानिवृत हैं। उनका हौंसला इस कदर बढ़ रहा है कि बच्चों के शारीरिक विकास के लिए उन्होंने गांव में ही खेल का मैदान भी तैयार कर दिया है। यहां बच्चे विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के जरिए अपना स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यहां पर हर साल खेल प्रतियोगिताएं भी करवाई जाती हैं।
1971 में लड़ी थी लड़ाई
सोहन सिंह ने बताया कि वो 1967 में फौज में भर्ती हुए। मात्र 87 रुपये में उन्होंने अपनी सेवा शुरू की थी। इस दौरान वर्ष 1971 भारत-पाक के बीच वैचारिक वैमनस्य के कारण युद्ध की भूमिका बन गई। इसके चलते उनकी बदली अंबाला छावनी से फिरोजपुर कर दी गई। उनके व साथियों के हौंसले के चलते भारत ने इस युद्ध में विजय हासिल की।
विज्ञापन
जलबेहड़ा। जहां एक तरफ कई युवा नशे व फास्ट-फूड में फंस कर अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अंबाला शहर के भानोखेड़ी गांव निवासी 70 वर्षीय सोहन सिंह संधू वरिष्ठ नागरिक की विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। वो अभी तक 10 पदक जीत चुके हैं और इनमें से तीन स्वर्ण पदक भी उनके नाम हैं।
उनके इस जज्बे को देखकर गांव वाले भी उनके मुरीद हो गए हैं। गांव के हर चौक-चौराहों पर उनके ही चर्चे हैं। सोहन सिंह ने बताया कि इसके अलावा वह अपने गुरुद्वारे और गांव के एक स्कूल में बच्चों को निशुल्क शिक्षा भी प्रदान कर रहे हैं। जबकि साल में एक बार नवंबर में बच्चों की खेल प्रतियोगिता भी आयोजित करवाते हैं। इतनी उम्र के बावजूद भी वह अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं।
विज्ञापन
सोहन सिंह ने बताया कि बदलते माहौल को लेकर उन्हें भावी पीढ़ी की चिंता थी। इसके चलते उन्होंने स्वयं से ही इस प्रकार के कार्य करने शुरू किए। हाल ही में उन्होंने यमुनानगर में आयोजित 6वीं हरियाणा राज्य मास्टर्स गेम्स एथलेटिक्स में हिस्सा लिया और इसमें उन्होंने 70 वर्षीय 100 मीटर दौड़ में प्रथम, लंबी कूद में प्रथम व शॉर्ट-पुट में भी प्रथम पुरस्कार हासिल किया। वर्तमान में उनके गांव के बच्चे शिक्षा के साथ खेलों में भी माहिर हो रहे हैं। उनके इस कार्य की गांव में हर जगह सराहना हो रही है।
विज्ञापन
गांव में तैयार किया खेल का मैदान
सोहन सिंह फौज से सेवानिवृत हैं। उनका हौंसला इस कदर बढ़ रहा है कि बच्चों के शारीरिक विकास के लिए उन्होंने गांव में ही खेल का मैदान भी तैयार कर दिया है। यहां बच्चे विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के जरिए अपना स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यहां पर हर साल खेल प्रतियोगिताएं भी करवाई जाती हैं।
1971 में लड़ी थी लड़ाई
सोहन सिंह ने बताया कि वो 1967 में फौज में भर्ती हुए। मात्र 87 रुपये में उन्होंने अपनी सेवा शुरू की थी। इस दौरान वर्ष 1971 भारत-पाक के बीच वैचारिक वैमनस्य के कारण युद्ध की भूमिका बन गई। इसके चलते उनकी बदली अंबाला छावनी से फिरोजपुर कर दी गई। उनके व साथियों के हौंसले के चलते भारत ने इस युद्ध में विजय हासिल की।