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घर से स्कूल तीन किलोमीटर दूर तो सरकार देगी परिवहन का खर्च
Updated Sat, 15 Sep 2018 01:02 AM IST
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घर से स्कूल तीन किलोमीटर दूर तो सरकार देगी परिवहन का खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। यदि किसी छात्रा का स्कूल घर से तीन किलोमीटर दूर है तो अब सरकार इन छात्राओं को परिवहन का खर्च अदा करेगी। यह खर्च उन छात्राओं को मिलेगा, जिनके गांव में आठवीं कक्षा से ऊपर स्तर का स्कूल नहीं है और यह स्कूल तीन किलोमीटर से अधिक दूरी पर है। प्रति किलोमीटर चार रुपये के अनुसार यह राशि दी जाएगी। सरकार का कहना है कि छात्राओं को स्कूल तक लाने के लिए यह योजना बनाई गई है ताकि वे स्कूल में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं और आगे पढ़ें।
यह है योजना
जिस छात्रा के गांव में आठवीं कक्षा से अधिक स्तर का स्कूल नहीं है, उक्त छात्रा को छात्रा परिवहन सुरक्षा योजना का लाभ मिलेगा। बशर्ते कि आठवीं से ऊपरी स्तर का स्कूल छात्रा के घर से तीन किलोमीटर की दूरी पर हो। जिन छात्राओं को साइकिल योजना के तहत लाभ दिया गया है, वे इसकी पात्र नहीं होंगी। इसके लिए जरूरी है कि छात्रा की उपस्थिति स्कूल में 25 दिन की हो। एक वाहन में चार छात्राएं जा सकती हैं। ऐसे में 25 दिन की उपस्थिति को चार से गुणा करते हुए वाहन छात्राओं को चार रुपये प्रति किलोमीटर की दूरी के अनुसार चार सौ रुपये दिए जाएंगे। खास है कि वाहन मालिक अथवा प्रदाता को चार सवारियों के साथ एक अतिरिक्त छात्रा का खर्च भी दिया जाएगा। यह राशि स्कूल मुखिया द्वारा डिमांड के अनुसार सालाना बजट के रूप में दिया जाएगा, जबकि यह राशि स्कूल अथवा एसएमसी के खाते में या फिर सीधे छात्राओं के खातों में डाली जाएगी।
यह व्हीकल शिक्षा विभाग ने किए हैं मंजूर
शिक्षा विभाग ने इस योजना के तहत परिवहन सुविधा के लिए कुछ वाहनों को चिह्नित किया है, जिनमें छात्राएं स्कूल तक आना-जाना करेंगी। इनमें ऑटो रिक्शा, कार, वैन, जीप, सूमो, मैक्सी कैब, वैन, मिनी बस, टैंपो ट्रैवलर बस शामिल हैं।
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लोग उठा रहे सवाल
शिक्षा विभाग की इस योजना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या आठवीं से आगे छात्राएं स्कूल दूर होने के कारण पढ़ाई छोड़ रही हैं। कैंट के रहने वाले आनंद मोहन शुक्ला, राजेश नैनीवाल, हरविंदर सिंह, एडवोकेट रविंदर बख्शी का कहना है कि सरकार की योजना सही है, लेकिन इतनी देरी से क्यों शुरू की गई, जबकि इसे पहले ही शुरू कर दिया जाना चाहिए था। ऐसे में यह शंका भी उठ रही है कि क्या आठवीं कक्षा के बाद छात्राओं के शिक्षा ग्रहण करने की संख्या में कमी तो नहीं आ रही।
कोट्स
छात्रा परिवहन सुरक्षा योजना सरकार का एक बढ़िया कदम है। एक निश्चित दूरी के बाद छात्राओं को प्रति किलोमीटर के तहत राशि का भुगतान किया जाएगा। इससे छात्राओं का परिवहन भार सरकार उठाएगी। लड़कियों की शिक्षा के लिए यह कदम काफी महत्वपूर्ण है।
- सुधीर कालड़ा, बीईओ, अंबाला सिटी।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। यदि किसी छात्रा का स्कूल घर से तीन किलोमीटर दूर है तो अब सरकार इन छात्राओं को परिवहन का खर्च अदा करेगी। यह खर्च उन छात्राओं को मिलेगा, जिनके गांव में आठवीं कक्षा से ऊपर स्तर का स्कूल नहीं है और यह स्कूल तीन किलोमीटर से अधिक दूरी पर है। प्रति किलोमीटर चार रुपये के अनुसार यह राशि दी जाएगी। सरकार का कहना है कि छात्राओं को स्कूल तक लाने के लिए यह योजना बनाई गई है ताकि वे स्कूल में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं और आगे पढ़ें।
यह है योजना
जिस छात्रा के गांव में आठवीं कक्षा से अधिक स्तर का स्कूल नहीं है, उक्त छात्रा को छात्रा परिवहन सुरक्षा योजना का लाभ मिलेगा। बशर्ते कि आठवीं से ऊपरी स्तर का स्कूल छात्रा के घर से तीन किलोमीटर की दूरी पर हो। जिन छात्राओं को साइकिल योजना के तहत लाभ दिया गया है, वे इसकी पात्र नहीं होंगी। इसके लिए जरूरी है कि छात्रा की उपस्थिति स्कूल में 25 दिन की हो। एक वाहन में चार छात्राएं जा सकती हैं। ऐसे में 25 दिन की उपस्थिति को चार से गुणा करते हुए वाहन छात्राओं को चार रुपये प्रति किलोमीटर की दूरी के अनुसार चार सौ रुपये दिए जाएंगे। खास है कि वाहन मालिक अथवा प्रदाता को चार सवारियों के साथ एक अतिरिक्त छात्रा का खर्च भी दिया जाएगा। यह राशि स्कूल मुखिया द्वारा डिमांड के अनुसार सालाना बजट के रूप में दिया जाएगा, जबकि यह राशि स्कूल अथवा एसएमसी के खाते में या फिर सीधे छात्राओं के खातों में डाली जाएगी।
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यह व्हीकल शिक्षा विभाग ने किए हैं मंजूर
शिक्षा विभाग ने इस योजना के तहत परिवहन सुविधा के लिए कुछ वाहनों को चिह्नित किया है, जिनमें छात्राएं स्कूल तक आना-जाना करेंगी। इनमें ऑटो रिक्शा, कार, वैन, जीप, सूमो, मैक्सी कैब, वैन, मिनी बस, टैंपो ट्रैवलर बस शामिल हैं।
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लोग उठा रहे सवाल
शिक्षा विभाग की इस योजना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या आठवीं से आगे छात्राएं स्कूल दूर होने के कारण पढ़ाई छोड़ रही हैं। कैंट के रहने वाले आनंद मोहन शुक्ला, राजेश नैनीवाल, हरविंदर सिंह, एडवोकेट रविंदर बख्शी का कहना है कि सरकार की योजना सही है, लेकिन इतनी देरी से क्यों शुरू की गई, जबकि इसे पहले ही शुरू कर दिया जाना चाहिए था। ऐसे में यह शंका भी उठ रही है कि क्या आठवीं कक्षा के बाद छात्राओं के शिक्षा ग्रहण करने की संख्या में कमी तो नहीं आ रही।
कोट्स
छात्रा परिवहन सुरक्षा योजना सरकार का एक बढ़िया कदम है। एक निश्चित दूरी के बाद छात्राओं को प्रति किलोमीटर के तहत राशि का भुगतान किया जाएगा। इससे छात्राओं का परिवहन भार सरकार उठाएगी। लड़कियों की शिक्षा के लिए यह कदम काफी महत्वपूर्ण है।
- सुधीर कालड़ा, बीईओ, अंबाला सिटी।