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- गांव दुराना में कुश्ती दंगल में महिला पहलवानों ने की शिरकत
Updated Fri, 16 Feb 2018 12:38 AM IST
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दंगल में बेटियों का दम देख दंग रह गए दर्शक
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
बदलते समय के साथ अब महिलाएं भी घर के चूल्हा-चौका से निकलकर हर क्षेत्र में अपना दम दिखा रही हैं। प्रदेश की लड़कियां अब शिक्षा ही नहीं, हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। दंगल को पहले पुरुषों का खेल माना जाता था, मगर अब महिलाएं भी अपनी ताकत इसमें दिखा रही हैं। ऐसा ही नजारा देखने को मिला गांव दुराना में आयोजित दंगल में। महिला पहलवानों का दमखम देखकर वहां पर मौजूद दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। महिलाओं की कुश्ती देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
गांव दुराना में दंगल का आयोजन पिछले 132 साल से किया जा रहा है। दुराना के इस दंगल के इतिहास के पन्नों में इस साल का मुकाबला सुनहरे अक्षरों में लिख दिया गया है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब महिलाओं ने दंगल मुकाबलों में भाग लिया है। इसके अलावा पुरुषों के भी मुकाबले करवाए गए। दंगल में हरियाणा ही नहीं पंजाब व हिमाचल प्रदेश के पहलवानों ने भाग लेकर अपने दांव पेच से दर्शकों का मनोरंजन किया, लेकिन महिला पहलवानों के हुए मुकाबले आकर्षण के केंद्र रहे। कुश्ती में भाग लेकर महिलाओं ने साबित कर दिया कि वे घर की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं हैं। अब वह भी अन्य खेलों की भांति दंगल में भी अपना वर्चस्व बना सकती हैं। दंगल में शामिल महिला खिलाड़ियों का तालियां बजाकर दर्शकों ने हौसला बढ़ाया। मुकाबले में विजेता रहने वाली महिला खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
पुरुषों का ही खेल नहीं रहा दंगल : हर्पिता
रोहतक के गांव सुनारिया से आई महिला रेसलर हर्पिता ने कहा कि दंगल सिर्फ पुरुषों का खेल नहीं रहा। महिलाएं भी अपने दमखम के बूते पर इस खेल में पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज उनके गांव में कई महिला पहलवान हैं, जो अच्छा खेल रही हैं। उन्होंने महिला वर्ग में 3100 रुपये इनाम में जीते। इसी तरह कुरुक्षेत्र की महिला रेसलर रीना ने कहा कि महिलाओं ने सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। आने वाले समय में महिला रेसलर और बेहतर करेंगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
बदलते समय के साथ अब महिलाएं भी घर के चूल्हा-चौका से निकलकर हर क्षेत्र में अपना दम दिखा रही हैं। प्रदेश की लड़कियां अब शिक्षा ही नहीं, हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। दंगल को पहले पुरुषों का खेल माना जाता था, मगर अब महिलाएं भी अपनी ताकत इसमें दिखा रही हैं। ऐसा ही नजारा देखने को मिला गांव दुराना में आयोजित दंगल में। महिला पहलवानों का दमखम देखकर वहां पर मौजूद दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। महिलाओं की कुश्ती देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
गांव दुराना में दंगल का आयोजन पिछले 132 साल से किया जा रहा है। दुराना के इस दंगल के इतिहास के पन्नों में इस साल का मुकाबला सुनहरे अक्षरों में लिख दिया गया है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब महिलाओं ने दंगल मुकाबलों में भाग लिया है। इसके अलावा पुरुषों के भी मुकाबले करवाए गए। दंगल में हरियाणा ही नहीं पंजाब व हिमाचल प्रदेश के पहलवानों ने भाग लेकर अपने दांव पेच से दर्शकों का मनोरंजन किया, लेकिन महिला पहलवानों के हुए मुकाबले आकर्षण के केंद्र रहे। कुश्ती में भाग लेकर महिलाओं ने साबित कर दिया कि वे घर की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं हैं। अब वह भी अन्य खेलों की भांति दंगल में भी अपना वर्चस्व बना सकती हैं। दंगल में शामिल महिला खिलाड़ियों का तालियां बजाकर दर्शकों ने हौसला बढ़ाया। मुकाबले में विजेता रहने वाली महिला खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
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पुरुषों का ही खेल नहीं रहा दंगल : हर्पिता
रोहतक के गांव सुनारिया से आई महिला रेसलर हर्पिता ने कहा कि दंगल सिर्फ पुरुषों का खेल नहीं रहा। महिलाएं भी अपने दमखम के बूते पर इस खेल में पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज उनके गांव में कई महिला पहलवान हैं, जो अच्छा खेल रही हैं। उन्होंने महिला वर्ग में 3100 रुपये इनाम में जीते। इसी तरह कुरुक्षेत्र की महिला रेसलर रीना ने कहा कि महिलाओं ने सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। आने वाले समय में महिला रेसलर और बेहतर करेंगी।
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