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240 शिक्षकों को नेशनल बिल्डर अवार्ड से किया गया सम्मानित
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240 teachers honored with National Builder Award
- फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। रोटरी क्लब अंबाला सेंट्रल की ओर से बेहतर कार्य करने वाले 240 प्राचार्यों व शिक्षकों को नेशन बिल्डर अवार्ड सम्मानित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अंबाला रेंज की आईजी भारती अरोड़ा ने किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में डीएवी मैनेजमेंट के उपप्रधान राजिंदर नाथ, जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार मौजूद रहे।
सम्मानित किए शिक्षकों में लगभग 161 सरकारी स्कूलों के शिक्षक शामिल हुए। आईपीएस भारती अरोड़ा ने कहा कि शिक्षक समाज में भगवान श्री कृष्ण की तरह गुरुजन की भूमिका निभाते हुए समाज को उज्ज्वल और तरक्की की राह पर लेकर जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बचपन से ही बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले तो समाज को कई बड़े व्यक्तित्व भी मिलते हैं। इस मौके भारती अरोड़ा ने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों को ऐसी शिक्षा प्रदान करें कि बच्चों को जीवन का महत्व समझ आए। अगर ऐसा होगा तो भविष्य में अपराध पर अंकुश लगेगा। कार्यक्रम में आयोजकों द्वारा शिक्षकों को भगवत गीता भेंट की गई। राजिंद्र नाथ ने कहा कि समाज में शिक्षक से बढ़कर कोई नहीं होता, जिससे आने वाले दिनों में शिक्षक और अधिक ऊर्जा के साथ कार्य करेंगे और उसके और बेहतर परिणाम भी निकलेंगे।
कोरोना काल में बच्चों को पढ़ाना बहुत ही चुनौती पूर्ण था। लेकिन सभी शिक्षकों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ऑनलाइन माध्यम से प्रत्येक छात्र तक पहुंच बनाई और सभी को शिक्षा प्रदान की। इस नए माध्यम ने न केवल शिक्षकों और छात्रों को बल्कि प्राचार्यों को भी बहुत कुछ नया सिखाया है।
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- मंजीत कौर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बलाना।
कोरोना में सबसे बड़ी चुनौती प्रत्येक छात्र तक शिक्षा पहुंचाना था। इसके लिए सरकार की ओर से कई एप भी जारी किए गए थे। लेकिन एप को प्रत्येक छात्र के फोन तक पहुंचाकर उन्हें शिक्षा देने का प्रत्येक शिक्षक ने कार्य किया है। जिससे कि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो।
- कुसुम रानी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मॉडल टाउन।
अब तो छात्र स्कूल में पहुंचने लगे हैं। लेकिन कोरोना काल में छात्रों की पढ़ाई बहुत अधिक प्रभावित हुई है। इस समय सभी शिक्षकों का जोर छात्रों की कोरोना काल में छूूटी पढ़ाई को पूरा करवाना है, जिससे कि वह आगामी पढ़ाई को सही तरीके से समझ सकें।
-निर्मला भार्गव, प्रिंसिपल बलदेव नगर कन्या सीसे स्कूल
कोरोना ने बच्चों की शिक्षा पर बहुत अधिक प्रभाव डाला है। राजकीय स्कूलों में अधिकतर ऐसे छात्र आते हैं, जिनके पास कोरोना काल में मोबाइल फोन तक की सुविधा नहीं थी, तो अध्यापकों ने अपने स्तर पर प्रयास करते हुए छात्रों को घर-घर जाकर उनकी कापियां तक जांची है। इस व्यवस्था को बनाए रखना प्रत्येक प्राचार्य के लिए भी चुनौतीपूर्ण था।
-अर्श पुरी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, छपरा
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सम्मानित किए शिक्षकों में लगभग 161 सरकारी स्कूलों के शिक्षक शामिल हुए। आईपीएस भारती अरोड़ा ने कहा कि शिक्षक समाज में भगवान श्री कृष्ण की तरह गुरुजन की भूमिका निभाते हुए समाज को उज्ज्वल और तरक्की की राह पर लेकर जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बचपन से ही बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले तो समाज को कई बड़े व्यक्तित्व भी मिलते हैं। इस मौके भारती अरोड़ा ने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों को ऐसी शिक्षा प्रदान करें कि बच्चों को जीवन का महत्व समझ आए। अगर ऐसा होगा तो भविष्य में अपराध पर अंकुश लगेगा। कार्यक्रम में आयोजकों द्वारा शिक्षकों को भगवत गीता भेंट की गई। राजिंद्र नाथ ने कहा कि समाज में शिक्षक से बढ़कर कोई नहीं होता, जिससे आने वाले दिनों में शिक्षक और अधिक ऊर्जा के साथ कार्य करेंगे और उसके और बेहतर परिणाम भी निकलेंगे।
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कोरोना काल में बच्चों को पढ़ाना बहुत ही चुनौती पूर्ण था। लेकिन सभी शिक्षकों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ऑनलाइन माध्यम से प्रत्येक छात्र तक पहुंच बनाई और सभी को शिक्षा प्रदान की। इस नए माध्यम ने न केवल शिक्षकों और छात्रों को बल्कि प्राचार्यों को भी बहुत कुछ नया सिखाया है।
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- मंजीत कौर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बलाना।
कोरोना में सबसे बड़ी चुनौती प्रत्येक छात्र तक शिक्षा पहुंचाना था। इसके लिए सरकार की ओर से कई एप भी जारी किए गए थे। लेकिन एप को प्रत्येक छात्र के फोन तक पहुंचाकर उन्हें शिक्षा देने का प्रत्येक शिक्षक ने कार्य किया है। जिससे कि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो।
- कुसुम रानी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मॉडल टाउन।
अब तो छात्र स्कूल में पहुंचने लगे हैं। लेकिन कोरोना काल में छात्रों की पढ़ाई बहुत अधिक प्रभावित हुई है। इस समय सभी शिक्षकों का जोर छात्रों की कोरोना काल में छूूटी पढ़ाई को पूरा करवाना है, जिससे कि वह आगामी पढ़ाई को सही तरीके से समझ सकें।
-निर्मला भार्गव, प्रिंसिपल बलदेव नगर कन्या सीसे स्कूल
कोरोना ने बच्चों की शिक्षा पर बहुत अधिक प्रभाव डाला है। राजकीय स्कूलों में अधिकतर ऐसे छात्र आते हैं, जिनके पास कोरोना काल में मोबाइल फोन तक की सुविधा नहीं थी, तो अध्यापकों ने अपने स्तर पर प्रयास करते हुए छात्रों को घर-घर जाकर उनकी कापियां तक जांची है। इस व्यवस्था को बनाए रखना प्रत्येक प्राचार्य के लिए भी चुनौतीपूर्ण था।
-अर्श पुरी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, छपरा

240 teachers honored with National Builder Award- फोटो : Ambala