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Ambala News: छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का कठोर कारावास
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अंबाला। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की विशेष अदालत ने 9वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के दोषी नारायणगढ़ निवासी सचिन को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश एडीजे डॉ. मनपाल रमावत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
8 फरवरी 2024 को नारायणगढ़ निवासी एक महिला ने महिला पुलिस स्टेशन में इस संबंध में शिकायत दी थी। महिला ने बताया कि दिसम्बर 2023 में बेटी की तबियत खराब होने पर उसने उससे जानकारी ली तो उसने बताया कि जब वह राशन डिपो पर राशन लेने जाती थी तो दोषी उसे चॉकलेट का बहाना बनाकर पकड़ लेता था। एक बार दीपावली का उपहार देने के बहाने घर बुला लिया।
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वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। स्कूल जाते समय भी वह डरा धमकाकर अपने साथ ले जाता था। पीड़िता की मां ने जब जांच कराई तो बच्ची गर्भवती निकली।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोषी ने पीड़िता के 18 वर्ष से कम उम्र की होने पर बच्ची से दुराचार किया है जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हुई। इस मामले में डीएनए रिपोर्ट को आधार माना गया है। अदालत ने कहा की दोषी को इस मामले में पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया गया है, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। ब्यूरो
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विशेष न्यायाधीश एडीजे डॉ. मनपाल रमावत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
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8 फरवरी 2024 को नारायणगढ़ निवासी एक महिला ने महिला पुलिस स्टेशन में इस संबंध में शिकायत दी थी। महिला ने बताया कि दिसम्बर 2023 में बेटी की तबियत खराब होने पर उसने उससे जानकारी ली तो उसने बताया कि जब वह राशन डिपो पर राशन लेने जाती थी तो दोषी उसे चॉकलेट का बहाना बनाकर पकड़ लेता था। एक बार दीपावली का उपहार देने के बहाने घर बुला लिया।
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वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। स्कूल जाते समय भी वह डरा धमकाकर अपने साथ ले जाता था। पीड़िता की मां ने जब जांच कराई तो बच्ची गर्भवती निकली।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोषी ने पीड़िता के 18 वर्ष से कम उम्र की होने पर बच्ची से दुराचार किया है जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हुई। इस मामले में डीएनए रिपोर्ट को आधार माना गया है। अदालत ने कहा की दोषी को इस मामले में पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया गया है, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। ब्यूरो