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सात साल में जिले से 21 हजार परिवार हो गए %लापता’

Mon, 15 Oct 2018 12:36 AM IST
Updated Mon, 15 Oct 2018 12:36 AM IST
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सात साल में जिले से 21 हजार परिवार हो गए %लापता’
सात साल में जिले से 21 हजार परिवार हो गए ‘लापता’
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प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में वर्ष 2011 में किए गए एसईसीएस सर्वे में शामिल 67 हजार परिवारों को किया गया था शामिल
स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम के जांचने पर 21 हजार परिवार अपने पते पर नहीं मिले
जिले में अब तक 1663 परिवारों को गोल्डन ई-कार्ड जारी किए जा चुके
आलोक सिंह रघुवंशी
अंबाला कैंट। जिले के 67 हजार परिवारों को 23 सितंबर से शुरू हुई प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पांच लाख रुपये के बीमा का लाभ देने का दावा किया गया था। गरीब परिवारों को लाभान्वित करने के लिए योजना में वर्ष 2011 में किए गए एसईसीएस (सोशियो इक्नॉमी कॉस्ट सेंसर) सर्वे में शामिल परिवारों को लिया गया है। लेकिन, 2018 में जांचने पर इसमें से जिले में 21 हजार परिवार अपने पते पर नहीं मिले। इससे यह पता चलता है कि लोग रोजगार की तलाश में पलायन हो गए हैं। इसी के चलते इतनी बड़ी संख्या में परिवार नहीं मिले हैं।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जिले में अब तक 1663 परिवारों को गोल्डन ई-कार्ड जारी किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 39,236 तथा शहरी क्षेत्र में 26,863 परिवारों का डाटा योजना के लिए तैयार किया गया था। वहीं सरकार की तरफ से आदेश आने पर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने संयुक्त रूप से मई में लाभार्थियों का पता करने के लिए डाटा उपलब्ध कराए तो पता चला कि करीब 21 हजार परिवार 2011 में किए गए सर्वे के अनुसार अपने पते पर नहीं मिले। इसके बाद उनका नाम इस योजना से काट दिया गया। बता दें कि प्रत्येक परिवार का पांच लाख बीमा योजना के तहत किया गया है। सरकारी के अलावा पैनल में शामिल गैर सरकारी व निजी अस्पतालों में परिवार इलाज करा सकेंगे।
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फिर से बनाना पड़ सकता है डाटा और गोल्डन ई-कार्ड
आयुष्मान योजना में गरीबी रेखा से ऊपर वालों के नाम सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जो सर्कुलर जारी किया है, उसके नियम के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को फिर से गोल्डन ई-कार्ड बनवाने पड़ सकते हैं। अब तक 2011 के सर्वे के अनुसार गोल्डन ई-कार्ड बनाए जा रहे थे। इसके तहत जिले में 1663 लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। नए नियम में इन सात सालों में किसी के घर पर फ्रीज, दोपहिया वाहन व लैंडलाइन फोन भी हों तो वे इस योजना के हकदार नहीं माने जाएंगे।
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ये हैं नई शर्तें
- परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी न हो।
- खेती के अतिरिक्त कोई भी कामर्शियल प्रापर्टी जैसे प्लाट आदि न हो।
- 10 हजार महीना से ऊपर इनकम न हो।
- इनकम टैक्स न भरता हो।
- दो या तीन रूम वाले, जिनकी छत पक्की है तो वे भी हकदार नहीं हैं।
- घर में फ्रीज, लैंडलाइन फोन, दोपहिया, चारपहिया वाहन व किश्ती न हो।
- तीनपहिया का कृषि यंत्र या किसान क्रेडिट कार्ड 50 हजार से ऊपर न हो।
- ढाई एकड़ से ऊपर खेती की जमीन जिसमें एक पानी का स्रोत याना ट्यूबवेल न हो।
- 5 एकड़ जमीन, जिसमें दो या तीन फसलें उगाई गई हैं तो वह भी हकदार नहीं है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
वर्ष 2011 में हुए सर्वे के अनुसार ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में करीब 21 हजार परिवार अपने पते पर नहीं मिले हैं। जिले में 1663 लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। जल्द ही अन्य लोगों के भी कार्ड बनाए जाएंगे।
- अरविंद्र जीत सिंह, नोडल अधिकारी, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
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