Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   - मई माह में निगम का पहला कार्यकाल होना था पूरा

- मई माह में निगम का पहला कार्यकाल होना था पूरा

Sun, 18 Feb 2018 01:24 AM IST
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:24 AM IST
विज्ञापन
- मई माह में निगम का पहला कार्यकाल होना था पूरा
पहले कार्यकाल के तीन महीने पहले नगर निगम भंग, भाजपाई खुश तो कांग्रेस करेगी कोर्ट का रुख, निगम में शामिल 27 गांव परिषद में हो सकते हैं शामिल
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
आखिरकार शनिवार को हुआ वही जिसका कांग्रेसियों को आशंका थी और भाजपाइयों को उम्मीद, यानि चंडीगढ़ में मंत्रिमंडल की बैठक में अंबाला नगर निगम को भंग करने का फैसला हुआ। साल 2010 में बने अंबाला नगर निगम के 2013 में चुनाव के बाद पहले कार्यकाल के पूरे होने के करीब तीन महीने पहले ही भंग होने की घोषणा होते ही अंबाला में जहां भाजपाई खुशी से झूम उठे, वहीं कांग्रेस ने इसका पुरजोर तरीके से विरोध जताया। शनिवार शाम मेयर रमेश मल के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षद दल ने सरकार के इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान कर दिया। भाजपा खुश और कांग्रेसी नाराज क्यों हुए इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 20 में से 15 पार्षद कांग्रेसी थे। इस तरह से हम यह भी अंदाजा लगा सकते हैं कि कहीं ‘राजनीतिक उद्देश्य’ पूर्ति के लिए तो निगम को भंग नहीं किया गया। हालांकि निगम भंग करने के पीछे मुख्य निगम कार्यालय की दूरी, जनसंख्या का आंकड़ा पूरा न होना और आय से अधिक खर्च का तर्क दिया गया है। अंबाला के अब भावी भविष्य की बात करें तो सिटी और कैंट में फिर से नगर परिषद का गठन हो सकता है। वहीं निगम में शामिल किए गए 27 गांव भी नगर परिषद की सीमा में शामिल हो सकते हैं, मगर इस पर अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। यदि गांव का क्षेत्र नगर परिषद में शामिल होता है तो सिटी और कैंट नगर परिषद में 32-32 से अधिक वार्ड हो सकते हैं।


निगम भंग करने के लिए यह दिया गया तर्क
अंबाला कैंट के निगम कार्यालय और अंबाला सिटी स्थित मुख्य नगर निगम कार्यालय के बीच की दूरी 10-13 किलोमीटर है। निगम के आयुक्त और सभी शाखा प्रमुखों के कार्यालय भी मुख्य कार्यालय में स्थित हैं। इसके अलावा अंबाला कैंट क्षेत्र के 15 गांवों में से अधिकांश मुख्य निगम कार्यालय से दूर हैं। अधिकतर नगरपालिका कार्यों और शिकायतों के निवारण के लिए अंबाला सदर क्षेत्र के लोगों को अंबाला सिटी में निगम कार्यालय जाना पड़ता था। इसके अलावा भारतीय सेना के स्टेशन सेल वाले अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के सैन्य स्टेशन और छावनी क्षेत्रों ने अंबाला सदर क्षेत्र के साथ अंबाला शहर के इलाके की भौगोलिक निरंतरता को भी तोड़ा है क्योंकि छावनी क्षेत्र इन दोनों क्षेत्रों में आता है। इसके अतिरिक्त यह दोनों क्षेत्र दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में आते हैं।
विज्ञापन


जनसंख्या का आंकड़ा भी नहीं था पूरा
जनगणना 2001 और 2011 के अनुसार अंबाला शहर क्षेत्र की जनसंख्या क्रमश: 139279 और 195153 थी। इसी प्रकार अंबाला सदर (कैंट) क्षेत्र की जनसंख्या क्रमश: 106568 और 170223 थी। इसके अलावा निगम बनाने के लिए हुड्डा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या को जोड़ आंकड़ा 10 लाख से अधिक दिखाया था जबकि शहरी क्षेत्र की जनसंख्या कम थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


निगम का आय से अधिक खर्च
वित्त वर्ष 2016-17 के लिए नगर निगम अंबाला की आय 51.15 करोड़ रुपये थी। वहीं अपने स्वयं के प्रतिष्ठान प्रभारों जैसे अपने कर्मचारियों का वेतन, भविष्य निधि शेयर, पेंशन, ग्रैच्युटी और अन्य स्थानीय एवं अनिवार्य दायित्व जैसे लेखा परीक्षा शुल्क, उनके द्वारा अनुबंधित ऋणों का पुनर्भुगतान करने के लिए निगम का खर्च 51.19 करोड़ रुपये था, जोकि आय का 100.08 प्रतिशत है। इसी तरह वित्त वर्ष 2015-16 के लिए व्यय 104.89 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2010-11 से 2016-17 तक निगम की आय और व्यय विवरण यह बताते हैं कि 2013-14 को छोड़कर नगर निगम अंबाला का खर्च कुल आय के 80 प्रतिशत से अधिक था।

यह है स्थिति
नगर निगम बनाने की घोषणा 2010 में की गई थी जिसके बाद निगम कागजों में अस्तित्व में आ गया था। इसके बाद जून 2013 में निगम का चुनाव हुआ था जिसका कार्यकाल आगामी मई माह में समाप्त हो रहा था। अंबाला सिटी व कैंट नगर निगम को जोड़कर 20 वार्ड बनाए गए थे। चुनाव में 16 वार्डों में कांग्रेस जीती थी जबकि भाजपा के खाते में चार वार्ड ही आए थे। हालांकि एक पार्षद द्वारा कांग्रेस छोड़ने पर कांग्रेसी पार्षदों की संख्या सदन में 15 रह गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की निगम में चलती नहीं थी और इसी वजह से निगम को भंग करने की योजना तैयार की गई।

विज बोले- हुड्डा सरकार की ढींगा मस्ती से बना था निगम
अंबाला नगर निगम को भंग करने के मामले में मंत्री अनिल विज ने इसे लोक हितैषी करार दिया है। कैंट रेस्टहाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विज ने कहा कि हुड्डा सरकार ने ढींगा मस्ती करते हुए इसे नगर निगम बनाया था। यह फैसला सरकार ने पूरी तरह से सोच समझकर लिया है। विज ने संभावना जताते हुए कहा कि जो गांव सिटी नगर निगम और कैंट नगर निगम में आते थे वह अब सिटी नगर परिषद में और कैंट परिषद में हो जाएंगे। अंबाला कैंट और सिटी दो भागों में बंटे हुए शहर हैं। इन दोनों के बीच में कैंटोनमेंट एरिया भी है। लोगों की दिक्कत को देखते हुए इन्हें दोबारा से परिषद बना दिया गया है। निगम भंग होने के बाद परिषद बनने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।


जिद्दी मंत्री के आगे झुकी सरकार, अदालत जाएंगे : मेयर
वहीं नगर निगम के पहले और आखिरी मेयर कहलाये जाने वाले मेयर रमेश लाल मल निगम टूटने को केवल कैबिनेट मंत्री अनिल विज की जिद्द बता रहे है। उनका कहना है कि सरकार अंबाला को पीछे ले जा रही है। मेयर ने कहा कि जब से सरकार बनी है अंबाला नगर निगम को तोड़ने की कोशिश करती रही है और आज इस फैसले से अंबाला काफी पीछे हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में चार हजार नगर निगम है जिसमें अंबाला का नाम भी आता है, लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद अंबाला नगर निगम खत्म हो गया। यह फैसला अंबाला के लोगों के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार का यह फैसला इतिहास में पहला फैसला है जो किसी शहर को आगे की बजाये पीछे ले जा रहा है। सरकार का तर्क है कि निगम अपना खर्चा खुद नहीं उठा सकता। यह बिलकुल झूठ है क्योंकि निगम का लोगों पर काफी पैसा बकाया है जो स्टाफ न होने के कारण लोगों से वसूले नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का ये फैसला बिलकुल गलत है जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने इस फैसले पर सीधे अनिल विज को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed