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लंपी त्वचा रोग की चपेट में आ चुकी 1767 गाय, एक संदिग्ध मौत
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बराड़ा। जिले के पशुओं में लंपी त्वचा रोग तेजी से फैल रहा है। इस बीमारी की चपेट में अब तक करीब 1767 गाय आ चुकी हैं। जिसमें 441 गाय रिकवरी कर चुकी हैं। एक गाय की संदिग्ध मौत हुई है। जिससे पशुपालक सहम गए हैं। वहीं पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने इसे सामान्य मौत बताया है। पशुपालन विभाग के अनुसार इस बीमारी से बचाव अथवा उपचार के लिए अभी कोई खास दवा या टीका उपलब्ध नहीं है। यदि वैक्सीन उपलब्ध हो भी तो इस समय रोग ग्रसित पशु को नहीं लगाई जा सकती। इस रोग से ग्रसित पशु को 14 दिन अथवा जब तक बीमारी पूरी तरह से ठीक न हो जाए तब तक आइसोलेट करना पड़ रहा है। यह एक संक्रामक बीमारी है। पशुओं को आइसोलेट कर बीमारी के फैलने से रोक का प्रयास किया जा सकता है। पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
लक्षण
बुखार होना, शरीर व पांव में सूजन, शरीर में गाठें व चकते, गांठों का झड़कर गिरना व घाव बनना।
बचाव
संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखे, पशुओं व पशु घर में टिक्स मारक दवा का उपयोग करें।
जिले में हुई गाय की मौत सामान्य थी। वह इस रोग से ग्रस्त नहीं थी। गोशालाओं में जगह कम होने की वजह से यह समस्या ज्यादा आ रही है। एलएसडी की जांच पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सकों से करवाएं। पशुपालकों से आग्रह है कि एलएसडी से भयभीत न होकर बताए जा रहे तरीकों से पशुओं का बचाव व उपचार करवाएं। विशेष परिस्थितियों में पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। विभाग के चिकित्सक लगातार इस पर काम कर रहे हैं।
-डॉ. प्रेम सिंह, उपनिदेशक पशु पालन विभाग
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लक्षण
बुखार होना, शरीर व पांव में सूजन, शरीर में गाठें व चकते, गांठों का झड़कर गिरना व घाव बनना।
बचाव
संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखे, पशुओं व पशु घर में टिक्स मारक दवा का उपयोग करें।
जिले में हुई गाय की मौत सामान्य थी। वह इस रोग से ग्रस्त नहीं थी। गोशालाओं में जगह कम होने की वजह से यह समस्या ज्यादा आ रही है। एलएसडी की जांच पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सकों से करवाएं। पशुपालकों से आग्रह है कि एलएसडी से भयभीत न होकर बताए जा रहे तरीकों से पशुओं का बचाव व उपचार करवाएं। विशेष परिस्थितियों में पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। विभाग के चिकित्सक लगातार इस पर काम कर रहे हैं।
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-डॉ. प्रेम सिंह, उपनिदेशक पशु पालन विभाग