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इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर डेमो में व्यस्त, एक्सीडेंट केस के मरीजों को आधे घंटा कराया इंतजार
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इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर डेमो में व्यस्त, हादसे में घायल मरीजों को कराया आधा घंटा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। सिविल अस्पताल में स्टाफ की बड़ी लापरवाही सामने आई है। हादसे में घायल मरीज को प्राथमिकता के आधार पर उपचार देने के बजाय उसे इमरजेंसी वार्ड में आधे घंटे तक इंतजार करवाया गया। इंतजार केवल इसलिए क्योंकि उस समय कई डॉक्टर एनेस्थीसिया का डेमो ले रहे थे। इस दौरान किसी भी मरीज को अटेंड नहीं किया गया। घायलों की हालत खराब होती देख परिजनों ने स्टाफ के समक्ष रोष जताया। इसके बाद आनन-फानन में स्टाफ एवं डॉक्टरों ने इलाज आरंभ किया और मरीजों को एक्सरे कराने के लिए कहा। मगर, फिर पता चला कि अस्पताल की एक्सरे मशीन ही खराब थी। लगातार होती देरी को देख परिजन मरीजों को पास में ही स्थित एक निजी अस्पताल ले गए।
टिंबर मार्केट निवासी अमित वशिष्ठ ने बताया कि उनकी मां किरण शर्मा एवं पत्नी मुस्कान शर्मा स्कूटर पर टिंबर मार्केट के पास से दोपहर को गुजर रहे थे। इसी बीच एक बैंड की रेहड़ी को कुछ लोग रैंप पर चढ़ा रहे थे, मगर वह रेहड़ी उनके हाथ से छूट सड़क पर आ गई और स्कूटर से टकरा गई। दोनों स्कूटर से गिरकर घायल हो गए। उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। अमित का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड में उन्हें दाखिल नहीं होने दिया गया। स्टाफ ने बताया कि इमरजेंसी की ओटी में मीटिंग चल रही है। उनके दस मिनट इंतजार करने को कहा गया। मगर, इस बीच काफी समय बीत गया। उन्होंने फिर चेक किया तो इमरजेंसी में कई डॉक्टर मौजूद थे, मगर उन्होंने इलाज नहीं किया। इसके बाद करीब आधे घंटे तक डॉक्टर ने घायलों को अटेंड नहीं किया।
एक्सरे मशीन खराब, सिटी सिविल अस्पताल में एक्सरे कराने को बोला
घायलों को उपचार नहीं मिलने पर परिजनों ने रोष जताया जिसके बाद स्टाफ ने उन्हें अटेंड किया। इस दौरान घायलों का एक्सरे कराने को कहा गया। फिर स्टाफ ने परिजनों को बताया कि कैंट सिविल अस्पताल की एक्सरे मशीन खराब है और एक्सरे कराने के लिए उन्हें सिटी सिविल अस्पताल जाना होगा। इस पर परिजनों का पारा और चढ़ गया। मगर, वह मरीजों को सिविल अस्पताल से ले गए और दोनों का इलाज निजी अस्पताल में कराया गया।
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एनेस्थीसिया का डेमो था वार्ड में
बताते हैं कि जिस समय मरीजों के परिजनों ने रोष जताया उस समय इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर एनेस्थीसिया का डेमो कर रहे थे। इस दौरान कई डॉक्टर वहां मौजूद थे। पीड़ितों ने सवाल उठाया कि इमरजेंसी वार्ड में ही यह डेमो क्यों किया गया। यदि डेमो करना ही था तो इसके लिए अस्पताल में कई वार्ड हैं जहां यह डेमो आसानी से किया जा सकता था। इमरजेंसी में जहां मरीज के लिए पल-पल कीमती है और ऐसे में आधे घंटे तक उन्हें इंतजार कराना क्या मुनासिब है।
कोट्स
वार्ड में एनेस्थीसिया का डेमो चल रहा था। मरीजों को इंतजार नहीं करवाया गया। उनका इलाज किया गया था, मगर मरीजों ने बिना वजह रोष जताया जोकि सही नहीं है।
-डॉ. साची, ड्यूटी डॉक्टर, कैंट सिविल अस्पताल।
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इधर, बच्चे को कुत्ते ने काटा, सिविल अस्पताल में नहीं मिला इंजेक्शन
डॉक्टर ने केमिस्ट शॉप का दिखाया रास्ता, बच्चे के पिता ने बाजार से खरीदा 1750 रुपये का इंजेक्शन
अंबाला कैंट। स्ट्रीट डॉग बाइट का केस कैंट सिविल अस्पताल में आया, मगर अस्पताल में इंजेक्शन नहीं होने से मरीज को डॉक्टरों ने केमिस्ट शॉप का रास्ता दिखा दिया। दिहाड़ीदार मजदूर पहले रुपये लेने के लिए घर गया, फिर वह लौटा और 1750 रुपये में रेबीज का इंजेक्शन केमिस्ट शॉप से लिया। बाद में अस्पताल स्टाफ द्वारा यह इंजेक्शन लगाया गया। परिजनों को इस बात को लेकर मायूसी थी कि उन्हें इंजेक्शन लेने के लिए बाहर भेजा गया जबकि यह इंजेक्शन अस्पताल में होना चाहिए था।
न्यू टैगोर नगर निवासी दस वर्षीय तनिश दोपहर को घर के पास खेल रहा था जब गली में एक लावारिस कुत्ते ने उसकी बाजू पर काट लिया। परिजन उसे कैंट सिविल अस्पताल लेकर आए। जख्म गहरा था जिस वजह से एंटी रेबीज वेक्सीनेशन का इंजेक्शन तो अस्पताल से ही उपलब्ध करा दिया गया। मगर, जख्म गहरा होने की वजह से एक इंजेक्शन रेबीशिल्ड बाहर केमिस्ट शॉप से लाने को कहा गया। तनिश के माता-पिता मजदूरी करते हैं और उनके पास 1750 रुपये नहीं थे। वह ऑटो से पहले अपने घर गए जिसके बाद रुपयों का इंतजाम कर वह केमिस्ट शॉप से इंजेक्शन लेकर अस्पताल पहुंचे जहां इंजेक्शन लगवाया गया। उधर, अस्पताल स्टाफ ने बताया कि जो इंजेक्शन बाहर से लाने को कहा गया, वह अंबाला में नहीं है, मगर पंचकूला अस्पताल में उपलब्ध है।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। सिविल अस्पताल में स्टाफ की बड़ी लापरवाही सामने आई है। हादसे में घायल मरीज को प्राथमिकता के आधार पर उपचार देने के बजाय उसे इमरजेंसी वार्ड में आधे घंटे तक इंतजार करवाया गया। इंतजार केवल इसलिए क्योंकि उस समय कई डॉक्टर एनेस्थीसिया का डेमो ले रहे थे। इस दौरान किसी भी मरीज को अटेंड नहीं किया गया। घायलों की हालत खराब होती देख परिजनों ने स्टाफ के समक्ष रोष जताया। इसके बाद आनन-फानन में स्टाफ एवं डॉक्टरों ने इलाज आरंभ किया और मरीजों को एक्सरे कराने के लिए कहा। मगर, फिर पता चला कि अस्पताल की एक्सरे मशीन ही खराब थी। लगातार होती देरी को देख परिजन मरीजों को पास में ही स्थित एक निजी अस्पताल ले गए।
टिंबर मार्केट निवासी अमित वशिष्ठ ने बताया कि उनकी मां किरण शर्मा एवं पत्नी मुस्कान शर्मा स्कूटर पर टिंबर मार्केट के पास से दोपहर को गुजर रहे थे। इसी बीच एक बैंड की रेहड़ी को कुछ लोग रैंप पर चढ़ा रहे थे, मगर वह रेहड़ी उनके हाथ से छूट सड़क पर आ गई और स्कूटर से टकरा गई। दोनों स्कूटर से गिरकर घायल हो गए। उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। अमित का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड में उन्हें दाखिल नहीं होने दिया गया। स्टाफ ने बताया कि इमरजेंसी की ओटी में मीटिंग चल रही है। उनके दस मिनट इंतजार करने को कहा गया। मगर, इस बीच काफी समय बीत गया। उन्होंने फिर चेक किया तो इमरजेंसी में कई डॉक्टर मौजूद थे, मगर उन्होंने इलाज नहीं किया। इसके बाद करीब आधे घंटे तक डॉक्टर ने घायलों को अटेंड नहीं किया।
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एक्सरे मशीन खराब, सिटी सिविल अस्पताल में एक्सरे कराने को बोला
घायलों को उपचार नहीं मिलने पर परिजनों ने रोष जताया जिसके बाद स्टाफ ने उन्हें अटेंड किया। इस दौरान घायलों का एक्सरे कराने को कहा गया। फिर स्टाफ ने परिजनों को बताया कि कैंट सिविल अस्पताल की एक्सरे मशीन खराब है और एक्सरे कराने के लिए उन्हें सिटी सिविल अस्पताल जाना होगा। इस पर परिजनों का पारा और चढ़ गया। मगर, वह मरीजों को सिविल अस्पताल से ले गए और दोनों का इलाज निजी अस्पताल में कराया गया।
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एनेस्थीसिया का डेमो था वार्ड में
बताते हैं कि जिस समय मरीजों के परिजनों ने रोष जताया उस समय इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर एनेस्थीसिया का डेमो कर रहे थे। इस दौरान कई डॉक्टर वहां मौजूद थे। पीड़ितों ने सवाल उठाया कि इमरजेंसी वार्ड में ही यह डेमो क्यों किया गया। यदि डेमो करना ही था तो इसके लिए अस्पताल में कई वार्ड हैं जहां यह डेमो आसानी से किया जा सकता था। इमरजेंसी में जहां मरीज के लिए पल-पल कीमती है और ऐसे में आधे घंटे तक उन्हें इंतजार कराना क्या मुनासिब है।
कोट्स
वार्ड में एनेस्थीसिया का डेमो चल रहा था। मरीजों को इंतजार नहीं करवाया गया। उनका इलाज किया गया था, मगर मरीजों ने बिना वजह रोष जताया जोकि सही नहीं है।
-डॉ. साची, ड्यूटी डॉक्टर, कैंट सिविल अस्पताल।
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इधर, बच्चे को कुत्ते ने काटा, सिविल अस्पताल में नहीं मिला इंजेक्शन
डॉक्टर ने केमिस्ट शॉप का दिखाया रास्ता, बच्चे के पिता ने बाजार से खरीदा 1750 रुपये का इंजेक्शन
अंबाला कैंट। स्ट्रीट डॉग बाइट का केस कैंट सिविल अस्पताल में आया, मगर अस्पताल में इंजेक्शन नहीं होने से मरीज को डॉक्टरों ने केमिस्ट शॉप का रास्ता दिखा दिया। दिहाड़ीदार मजदूर पहले रुपये लेने के लिए घर गया, फिर वह लौटा और 1750 रुपये में रेबीज का इंजेक्शन केमिस्ट शॉप से लिया। बाद में अस्पताल स्टाफ द्वारा यह इंजेक्शन लगाया गया। परिजनों को इस बात को लेकर मायूसी थी कि उन्हें इंजेक्शन लेने के लिए बाहर भेजा गया जबकि यह इंजेक्शन अस्पताल में होना चाहिए था।
न्यू टैगोर नगर निवासी दस वर्षीय तनिश दोपहर को घर के पास खेल रहा था जब गली में एक लावारिस कुत्ते ने उसकी बाजू पर काट लिया। परिजन उसे कैंट सिविल अस्पताल लेकर आए। जख्म गहरा था जिस वजह से एंटी रेबीज वेक्सीनेशन का इंजेक्शन तो अस्पताल से ही उपलब्ध करा दिया गया। मगर, जख्म गहरा होने की वजह से एक इंजेक्शन रेबीशिल्ड बाहर केमिस्ट शॉप से लाने को कहा गया। तनिश के माता-पिता मजदूरी करते हैं और उनके पास 1750 रुपये नहीं थे। वह ऑटो से पहले अपने घर गए जिसके बाद रुपयों का इंतजाम कर वह केमिस्ट शॉप से इंजेक्शन लेकर अस्पताल पहुंचे जहां इंजेक्शन लगवाया गया। उधर, अस्पताल स्टाफ ने बताया कि जो इंजेक्शन बाहर से लाने को कहा गया, वह अंबाला में नहीं है, मगर पंचकूला अस्पताल में उपलब्ध है।