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- 16 सालों से अमरनाथ की यात्रा के पहले जत्थे में जाता है दोस्तों का जत्था
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:48 AM IST
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बर्फानी बाबा के चरणों में चढ़ाई चांदी की छड़ी
अंबाला कैंट। बर्फनी बाबा के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। कई श्रद्धालु यात्रा का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद यात्रा पर जा चुके है तो कई जाने की तैयारियों में लगे हुए है। अमरनाथ की गुफा में अंबाला की तरफ से भी अनूठी आस्था देखने को मिली है, जहां अंबाला के एक समाजसेवी व्यक्ति द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर बर्फानी बाबा के चरणों में चांदी की छड़ी चढ़ाई गई है।
ये जत्था अमरनाथ की शुरूआत में ही अंबाला से अमरनाथ के लिए रवाना हो गया था और पूरे श्रद्धाभाव के साथ यात्रा कर बर्फनी बाबा की गुफा तक पहुंचा और बाबा के समक्ष चांदी की छड़ी चढ़ाकर लौटा है। समाजेसवी राजिंद्र पाल बिन्नी ने बताया कि वह पिछले सोलह सालों से अमरनाथ यात्रा के दौरान बर्फनी बाबा के समक्ष अपने समाजसेवी दोस्तों के साथ चांदी की छड़ी चढ़ाता आ रहा है। उनका कहना है कि अमरनाथ की यात्रा के अंतिम दिन वहां के लोगों द्वारा एक छड़ मुबारक परंपरा निभाई जाती है, जिसमें गुफा के अंदर श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार लकड़ी, तांबे व अन्य किस्म की छड़ी चढ़ाते है और परिवार की सुख शांति के मन्नतें मांगें है। इस परंपरा को देखते हुए उनमें भी छड़ चढ़ाने की इच्छा जागी थी। उन्होंने 16 साल पहले एक चांदी की छड़ी तैयार करवाई थी और बर्फानी बाबा के चरणों पर चढ़ाया था। उनका कहना है कि ये परंपरा यात्रा के अंतिम दिनों में निभाई जाती है, परंतु वह यात्रा से पहले ही चांदी की छड़ी चढ़ाकर वापिस लौट आते हैं और ये गुफा खुलने के बाद पहली ही छड़ी मानी जाती है। ये छड़ करीबन पचास हजार की लागत से तैयार हुई थी। इस जत्थे में समाजसेवी राजीव डिंपल, कृष्णा, वरिंद्र मौजूद रहे।
20 दिन पहले शुरू हो जाती है छड़ी की पूजा अर्चना
समाजसेवी राजिंद्र पाल बिन्नी ने बताया कि 26 जून को यात्रा में जाने से करीबन 20 दिन पहले चांदी की छड़ी तैयार करवाई गई थी। जोकि दिल्ली से तैयार होकर आई थी और ये छड़ी खासतौर पर राजस्थानी कलाकारों द्वारा तैयार की थी। उनका कहना है कि यात्रा से पहले छड़ी की बानूमल की बगीची स्थित भद्रकाली मंदिर से पूरे श्रद्धाभाव से रोजाना पूजा अर्चना की जाती थी और यात्रा से पहले विशेष पूजा कर चांदी को छड़ी को माता रानी से चरणों से उठाकर बाबा बर्फानी के चरणों में रखा गया। उन्होंने कहा कि वह केवल पांच दिन के अंदर अपनी यात्रा कर वापस अंबाला लौट गए थे।
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सात सालों से अमरनाथ में टेक रहे माथा
अमरनाथ की यात्रा कर से लौटे दयाल बाग निवासी विजय शर्मा ने बताया कि वह सात सालों से अपने दोस्तों संग अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। यात्रा का जुनून इस कदर है कि वह यात्रा के रजिस्ट्रेशन खुलने के पहले ही दिन मेडिकल करवाकर रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं। उनका कहना है कि उनमें यात्रा की श्रद्धा उनके साथी विक्रम से हुई, जोकि 12 सालों से लगातार जा रहा है और उसे माध्यम से अमरनाथ यात्रा की बारे में पता चला था। उनके जत्थे की खास बात यह है कि हर यात्रा के दौरान वह हर बार एक नए साथी को जोड़ते है और बाबा बर्फानी के समक्ष नतमस्तक होते हैं। उनका कहना है कि यात्रा पर जाने के बाद उन्हें मन को शांति को मिलती है।
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अंबाला कैंट। बर्फनी बाबा के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। कई श्रद्धालु यात्रा का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद यात्रा पर जा चुके है तो कई जाने की तैयारियों में लगे हुए है। अमरनाथ की गुफा में अंबाला की तरफ से भी अनूठी आस्था देखने को मिली है, जहां अंबाला के एक समाजसेवी व्यक्ति द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर बर्फानी बाबा के चरणों में चांदी की छड़ी चढ़ाई गई है।
ये जत्था अमरनाथ की शुरूआत में ही अंबाला से अमरनाथ के लिए रवाना हो गया था और पूरे श्रद्धाभाव के साथ यात्रा कर बर्फनी बाबा की गुफा तक पहुंचा और बाबा के समक्ष चांदी की छड़ी चढ़ाकर लौटा है। समाजेसवी राजिंद्र पाल बिन्नी ने बताया कि वह पिछले सोलह सालों से अमरनाथ यात्रा के दौरान बर्फनी बाबा के समक्ष अपने समाजसेवी दोस्तों के साथ चांदी की छड़ी चढ़ाता आ रहा है। उनका कहना है कि अमरनाथ की यात्रा के अंतिम दिन वहां के लोगों द्वारा एक छड़ मुबारक परंपरा निभाई जाती है, जिसमें गुफा के अंदर श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार लकड़ी, तांबे व अन्य किस्म की छड़ी चढ़ाते है और परिवार की सुख शांति के मन्नतें मांगें है। इस परंपरा को देखते हुए उनमें भी छड़ चढ़ाने की इच्छा जागी थी। उन्होंने 16 साल पहले एक चांदी की छड़ी तैयार करवाई थी और बर्फानी बाबा के चरणों पर चढ़ाया था। उनका कहना है कि ये परंपरा यात्रा के अंतिम दिनों में निभाई जाती है, परंतु वह यात्रा से पहले ही चांदी की छड़ी चढ़ाकर वापिस लौट आते हैं और ये गुफा खुलने के बाद पहली ही छड़ी मानी जाती है। ये छड़ करीबन पचास हजार की लागत से तैयार हुई थी। इस जत्थे में समाजसेवी राजीव डिंपल, कृष्णा, वरिंद्र मौजूद रहे।
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20 दिन पहले शुरू हो जाती है छड़ी की पूजा अर्चना
समाजसेवी राजिंद्र पाल बिन्नी ने बताया कि 26 जून को यात्रा में जाने से करीबन 20 दिन पहले चांदी की छड़ी तैयार करवाई गई थी। जोकि दिल्ली से तैयार होकर आई थी और ये छड़ी खासतौर पर राजस्थानी कलाकारों द्वारा तैयार की थी। उनका कहना है कि यात्रा से पहले छड़ी की बानूमल की बगीची स्थित भद्रकाली मंदिर से पूरे श्रद्धाभाव से रोजाना पूजा अर्चना की जाती थी और यात्रा से पहले विशेष पूजा कर चांदी को छड़ी को माता रानी से चरणों से उठाकर बाबा बर्फानी के चरणों में रखा गया। उन्होंने कहा कि वह केवल पांच दिन के अंदर अपनी यात्रा कर वापस अंबाला लौट गए थे।
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सात सालों से अमरनाथ में टेक रहे माथा
अमरनाथ की यात्रा कर से लौटे दयाल बाग निवासी विजय शर्मा ने बताया कि वह सात सालों से अपने दोस्तों संग अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। यात्रा का जुनून इस कदर है कि वह यात्रा के रजिस्ट्रेशन खुलने के पहले ही दिन मेडिकल करवाकर रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं। उनका कहना है कि उनमें यात्रा की श्रद्धा उनके साथी विक्रम से हुई, जोकि 12 सालों से लगातार जा रहा है और उसे माध्यम से अमरनाथ यात्रा की बारे में पता चला था। उनके जत्थे की खास बात यह है कि हर यात्रा के दौरान वह हर बार एक नए साथी को जोड़ते है और बाबा बर्फानी के समक्ष नतमस्तक होते हैं। उनका कहना है कि यात्रा पर जाने के बाद उन्हें मन को शांति को मिलती है।