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विश्व संग्रहालय दिवस पर विशेष: कला और विज्ञान की देवियां संग्रहालय में करती हैं निवास, 1987 में हुई थी इस जगह की स्थापना
Tue, 18 May 2021 04:18 PM IST
vivek shukla
विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 18 May 2021 04:18 PM IST
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राजकीय बौद्ध संग्रहालय।
- फोटो : अमर उजाला।
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सभ्यताओं का संगम हो या ऐतिहासिक बेशकीमती मुद्राएं। हर दौर की यादें हों या फिर इतिहास को प्रमाणित करते साक्ष्य। संग्रहालय में स्वर्णिम इतिहास से लेकर वर्तमान तक का सफर करने का मौका मिलता है। इस हाईटेक युग में भी बेशक हर चीज पूर्ण जानकारी के साथ हमें मोबाइल पर भी मिल सकती है लेकिन जो मजा संग्रहालय में जाकर इतिहास समेटे चीजों को देखने और समझने का है, उसका आज भी कोई मुकाबला नहीं। हर किसी की चाहत होती है कि वह अपने पूर्वजों की यादों को संजोकर रखे। यह चीजें पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों तक पहुंचें, इसके लिए संग्रहालय बनाए गए। दुनिया भर के संग्रहालयों में हमारे पूर्वजों की अनमोल यादों का खजाना है। म्यूजियम शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द म्यूजियन शब्द से हुई। जिसका अर्थ वह स्थान जहां कला और विज्ञान की देवियां निवास करती हैं।
राजकीय बौद्ध संग्रहालय।
- फोटो : अमर उजाला।
मुगलकाल के बाद भारत में अंग्रेजी शासन की नींव पड़ी, जैसे मुगलकाल में भारतीय कला एवं संस्कृति को संरक्षण प्राप्त था उसी तरह अंग्रेजी शासनकाल में भी भारतीय कला एवं संस्कृति को संरक्षित करने के कुछ कारगर प्रयास किये गए। भारतीय सांस्कृतिक सम्पदा से प्रभावित होकर सन 1784 ई0 में सर विलियम जोन्स ने एशियाटिक सोसायटी ऑफ इंडिया की स्थापना की और एशियाटिक सोसायटी के सतत् प्रयास से ही 1814 ई में भारतीय संग्रहालय, कलकत्ता की स्थापना हुई, जिसे भारत का प्रथम संग्रहालय होने का गौरव प्राप्त हुआ। इसके बाद अनेक संग्रहालयों के स्थापना की प्रक्रिया शुरू हुई। 1851 ई. में केंद्रीय संग्रहालय, मद्रास तथा इसी वर्ष बंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज में एशिया का प्रथम मेडिकल संग्रहालय भी स्थापित हुआ। 1863 ई0 में राज्य संग्रहालय, लखनऊ की स्थापना हुई जो उत्तर प्रदेश का पहला संग्रहालय है।
राजकीय बौद्ध संग्रहालय।
- फोटो : अमर उजाला।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर परिक्षेत्र जैन एवं बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल के साथ ही साथ मौर्य, शुंग, कुषाण एवं गुप्त साम्राज्य का अभिन्न अंग रहा है तथा इसके साथ ही साथ बौद्ध धर्म के उद्भव और विकास का हृदय स्थल भी रहा है। भगवान बुद्ध के जीवन एवं बौद्ध धर्म से सम्बन्धित स्थलों की क्रमबद्ध श्रृंखला दिखाई देती है जिसमें प्रमुख रूप से कपिलवस्तु, देवदह, कोलियों का रामग्राम, कोपिया एवं तथागत की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक गुरु गोरक्षनाथ की तपोभूमि भी गोरखपुर है और कालान्तर में गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर ही इस शहर का नाम गोरखपुर पड़ा। इतना ही नहीं यह परिक्षेत्र मध्ययुगीन प्रसिद्ध संत, समाज सुधारक तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता के पोषक संत कबीर की निर्वाण स्थली को भी अपने आंचल में संजोए हुए है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की बहुमूल्य सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से 23 अप्रैल 1987 को राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर की स्थापना की गई। संग्रहालय अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिये लगातार प्रयासरत है जिसमें नित्य नये शोध एवं सांस्कृतिक संपदा एवं संस्कृति के संरक्षण के कार्य किये जा रहे हैं।
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राजकीय बौद्ध संग्रहालय।
- फोटो : अमर उजाला।
नौ करोड़ रुपये से चमकाया जा रहा संग्रहालय
राजकीय बौद्ध संग्रहालय के सुंदरीकरण के लिए सरकार की ओर से नौ करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। जिसके अंतर्गत भवन के सुंदरीकरण के साथ साथ वहां संरक्षित मूर्तिमा की अंतरराष्ट्रीय मानकों को मुताबिक डिस्प्ले किया जाएगा। वहीं बाहर मौजूद पार्क का सुंदरीकरण कराया गया है।
राजकीय बौद्ध संग्रहालय के सुंदरीकरण के लिए सरकार की ओर से नौ करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। जिसके अंतर्गत भवन के सुंदरीकरण के साथ साथ वहां संरक्षित मूर्तिमा की अंतरराष्ट्रीय मानकों को मुताबिक डिस्प्ले किया जाएगा। वहीं बाहर मौजूद पार्क का सुंदरीकरण कराया गया है।
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डॉ. मनोज गौतम, उपनिदेशक राजकीय बौद्ध संग्रहालय।
- फोटो : अमर उजाला।
राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ मनोज गौतम ने बताया कि संग्रहालय में नव पाषाण काल से लेकर आधुनिक काल तक की प्राचीन संपदाओं का समृद्ध संग्रह है। जिसमें विशेष कर मृण मूर्तियों के संग्रह के लिये इस संग्रहालय को धनी माना जाता है। वैसे तो यहां पर प्रस्तर मूर्तियां, सिक्के, पाण्डुलिपियों, लघुचित्र, थंका, आभूषण एवं ताड़पत्र इत्यादि अनेक विषयों पर समृद्ध संग्रह है, जिस पर नियमित रूप से रिसर्च स्कालर आकर शोधन कार्य करते हैं और संग्रहालय द्वारा भी नित्य नये आयाम जोड़े जा रहे हैं।