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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Women's Day 2020: International Women's Day roli special story in gorakhpur

International Women's Day: बिन पैरों के सफलता की सीढ़ी चढ़ मिसाल बनीं रोली

Sun, 08 Mar 2020 06:22 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 08 Mar 2020 06:22 PM IST
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Women's Day 2020: International Women's Day roli special story in gorakhpur
महिला दिवस 2020: रोली नारायण - फोटो : अमर उजाला।
लखनऊ के जीटी रोड पर सन 1994 में हुए एक हादसे ने बिस्तर पर पहुंचा दिया, मगर जिंदादिल रोली को ये स्वीकार नहीं था। खुद पर निर्भर होने की जिद और परिवार से मिले आत्मबल ने उन्हें बिन पैरों के ही सफलता की बुलंदियों तक पहुंचा दिया।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हम आपको मिलाने जा रहे हैं ओरियन मॉल में ओरेलिया और डब्ल्यू स्टोर का संचालन करने वाली शहर की बेटी और तारामंडल निवासी रोली नारायन से।
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संघर्षों से भरी इनकी कहानी हर किसी को मुश्किल से मुश्किल हालात में भी हार न मानने का जज्बा देती है। ऐसे हालात में जब आधे से अधिक शरीर में जान न हो, रोली ने हाईस्कूल से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई प्रथम श्रेणी में पास की। परीक्षाओं के लिए वो दीवार के सहारे कमरों तक पहुंचती थीं। स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद ऐसा लगा शायद अब आत्मनिर्भर होने का सपना पूरा हो जाएगा।
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इस दौरान पैरालिसिस को ठीक करने के लिए वर्ष 2006 में एक और आपरेशन कराना पड़ा। मगर इस आपरेशन के बाद रोली बेहतर होने की बजाय पूरी तरह से बेड तक ही सिमट कर रह गईं। फिर भी हार मानने की बजाय दो साल बाद रोली ने मोबाइल रिचार्ज का काम शुरू किया।
 

परिवार ने दिया आत्मबल

बिजनेस अच्छा तो नहीं चला मगर अनुभव अच्छा दे गया। फिर रोली ने कौड़ीराम स्थित अपने पैतृक आवास के बेसमेंट में मुस्कान कलेक्शन के नाम से कपड़ों का शोरूम खोला। घर के नीचे ही शो रूम होने की वजह से रोली ने अपना ज्यादा से ज्यादा समय शोरूम को दिया। वो खुद ही कपड़ों के डिजाइन तैयार करवाने के साथ ही सामानों की खरीदारी भी खुद ही करती थीं। आमदनी बढ़ी तो रोली ने फिर गोरखपुर के ओरियन मॉल की तरफ रुख किया।

रोली ने बताया कि उनके दिवंगत पिता गिरीश नारायण, मां पूनम नारायण और भाई चंदन और अक्षत नारायण ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया है। यही वजह है कि वो आत्मनिर्भर बन सकी हैं।

सामाजिक सरोकारों में भी आगे
रोली स्वावलंबी होने के साथ ही सामाजिक सरोकारों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती हैं। कश्मीर में कनईल मझगांवा के रहने वाले शहीद साहब शुक्ला के परिवार को रोली ने एक लाख 11 हजार रुपये का चेक प्रदान किया था। वहीं चवरिया के भुलेश्वर विश्वकर्मा की पत्नी की दवाओं और पप्पू विश्वकर्मा के घर हर महीने राशन का प्रबंध रोली ही कराती हैं।

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